अमेरिका ने बुधवार, 7 जनवरी को जिस रूसी जहाज मैरिनेरा (Marinera) को पकड़ा था, उस पर तीन भारतीय नागरिक भी सवार थे. इस बीच भारत द्वारा रूसी तेल आयात को लेकर पोलैंड की तरफ से बड़ा बयान सामने आया है. पोलैंड ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के रूसी तेल आयात को लेकर भारत पर लगाए गए टैरिफ धमकियों के बीच भारत का खुलकर समर्थन किया है. पोलैंड ने कहा है कि वो भारत के रूस से तेल आयात में की गई कटौती से संतुष्ट है.
पोलैंड का भारत पर ये बयान डॉनल्ड ट्रंप को चुभेगा, जिस रूसी जहाज को पकड़ा उसमें 3 भारतीय भी थे
रूसी सांसद और डिफेंस कमेटी के वरिष्ठ सदस्य एलेक्सी ज़ुरावल्योव (Aleksey Zhuravlyov) ने राष्ट्रपति पुतिन से अपील की कि अमेरिकी कोस्ट गार्ड के जहाजों पर परमाणु हथियारों से हमला किया जाए और उन्हें डुबो दिया जाए.


ये बयान पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने पेरिस में दिया. जहां भारत ने पहली बार वेमर ट्रायंगल (पोलैंड, फ्रांस और जर्मनी) की बैठक में हिस्सा लिया. इस बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारोट, जर्मन प्रतिनिधियों और सिकोरस्की के साथ चर्चा की. इस दौरान सिकोरस्की ने कहा,
"मैं इस बात से संतुष्ट हूं कि भारत ने रूसी तेल आयात कम किया है, क्योंकि ये पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन दे रहा था."
उन्होंने आगे कहा कि अगले सप्ताह अपनी भारत यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर और विस्तार से बात की जा सकती है.
जहाज में 3 भारतीय नागरिकउधर, रूसी न्यूज एजेंसी रशिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका ने बुधवार, 7 जनवरी को जिस रूसी जहाज मैरिनेरा को पकड़ा था, उस पर तीन भारतीय नागरिक भी सवार थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मैरिनेरा जहाज पर कुल 28 लोग मौजूद थे. इनमें 17 यूक्रेनी, 6 जॉर्जियाई, 3 भारतीय और 2 रूसी नागरिक थे. हालांकि, भारतीय क्रू मेंबर्स की कोई विशेष भूमिका नहीं बताई गई. वो सामान्य चालक दल का हिस्सा थे. रूस ने अमेरिका से मांग की है कि वो रूसी नागरिकों के साथ मानवीय व्यवहार करे, और उन्हें सुरक्षित वापस भेजा जाए. वहीं, अमेरिका का कहना है कि क्रू पर मुकदमा चल सकता है और उन्हें जरूरत पड़ने पर अमेरिका लाया जा सकता है.
अमेरिका का आरोप है कि ये जहाज वेनेजुएला से तेल ले जा रहा था और उसने अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन किया. अमेरिका का आरोप है कि ये टैंकर वेनेजुएला से प्रतिबंधित तेल ढोने जा रहा था, जो ट्रंप प्रशासन द्वारा दिसंबर 2025 में लगाए गए सख्त प्रतिबंधों का उल्लंघन है.
अमेरिका ने दावा किया कि जहाज ने जानबूझकर अपनी पहचान छिपाई, ट्रांसपोंडर बंद किए और पहले भी ईरानी तेल ढोने के आरोप में बच निकला था. फेडरल कोर्ट के आदेश पर अमेरिकी कोस्ट गार्ड जहाज USCGC Munro ने हफ्तों की निगरानी के बाद इसे रोका. ब्रिटेन ने भी हवाई और निगरानी सहायता दी.
परमाणु हथियारों से हमला करें पुतिन!इस घटना के बाद रूसी सांसद और डिफेंस कमेटी के वरिष्ठ सदस्य एलेक्सी ज़ुरावल्योव (Aleksey Zhuravlyov) ने बेहद आक्रामक बयान दिया. उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन से अपील की कि अमेरिकी कोस्ट गार्ड के जहाजों पर परमाणु हथियारों से हमला किया जाए और उन्हें डुबो दिया जाए. उन्होंने इसे ‘अमेरिका द्वारा समंदर में डकैती’ बताया और कहा कि ऐसा व्यवहार रूस सहन नहीं करेगा.
इस धमकी ने वैश्विक स्तर पर तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं को हवा दे दी है. चीन ने भी अमेरिका के एकतरफा प्रतिबंधों की आलोचना की है. जबकि कुछ पूर्व अमेरिकी अधिकारी और ऑस्ट्रिया के पूर्व विदेश मंत्री ने भी कार्रवाई को गैरकानूनी बताया.
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