The Lallantop

अरबपति बीजेपी विधायक 'भिखारी' बन दर-दर भटके, दुनिया से ये 'ज्ञान' मिला

महाराष्ट्र के घाटकोपर से बीजेपी विधायक पराग शाह ने अपना हुलिया बदलकर करीब 3 घंटे तक भिखारी बनकर सड़कों, स्टेशन और दुकानों पर घूमकर लोगों का व्यवहार देखा.

Advertisement
post-main-image
पराग शाह भिखारी बनकर घाटकोपर की सड़कों पर घूमते रहे. (फोटो- India Today)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • महाराष्ट्र के घाटकोपर में बीजेपी के दो बार के विधायक और 3,383.06 करोड़ रुपये संपत्ति के मालिक पराग शाह ने भिखारी का भेष बना कर लोगों के साथ अपने व्यवहार को परखा।
  • यह प्रयोग जैन गुरु नमन मुनि महाराज की सलाह पर किया गया ताकि यह देखा जा सके कि पद, पैसा और पावर के बिना लोगों की सोच और बर्ताव कैसा रहता है।
  • पराग शाह ने इस अनुभव से यह जाना कि उनकी पहचान पद और संपत्ति से थी, और इस प्रयोग के बाद लोगों व गरीबी के प्रति उनकी सोच में बदलाव आया।

महाराष्ट्र का घाटकोपर शहर. तारीख 7 सितंबर. एक भिखारी दिन भर सड़क पर यहां-वहां घूम रहा था. हाथ में थी झाड़ू और गठरी. हरे रंग की टी-शर्ट, नीली पैंट पहने और बढ़ी हुई दाढ़ी वाला वह भिखारी दर-दर भटक रहा था. रेलवे स्टेशन गया. लोगों से पैसे मांगे. दुकानदारों के सामने मिन्नतें कीं कि भूख लगी है. कुछ खाना दे दो. विधायक के दफ्तर में भी गया, जहां सिक्योरिटी गार्ड ने उसे अंदर भी नहीं घुसने दिया. पुलिस वाले, ऑटो वाले हर किसी के पास दया की एक नजर के लिए भटका. 

Advertisement

तीन-चार घंटे तक ये सब चला. बाद में पता चला कि जिसे भिखमंगा समझकर लोगों ने दुत्कारा, जिसकी मौजूदगी भर से लोग परेशान हो गए. वह 3 हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति का मालिक था. इतना ही नहीं, दिन भर जिस इलाके की सड़कें उसने छानीं, वह उसी क्षेत्र का दो बार से विधायक भी था.

लेकिन ये कहानी किसी के अर्श से फर्श पर आने की कहानी नहीं है. ऐसा नहीं था कि वह रातोरात बर्बाद हो गया था और भीख मांगने की नौबत आ गई थी. ये सब एक प्रयोग था. प्रयोग ये जानने के लिए कि ‘शानो-शौकत’ और ‘पावर’ का आवरण हटाने के बाद उसकी ‘पहचान’ क्या बचती है? दुनिया उसे किस नजरिए से देखती है और उसके साथ कैसा बर्ताव करती है.

Advertisement

प्रयोग की ये कहानी घाटकोपर ईस्ट से बीजेपी के दो बार के विधायक पराग शाह की है. दिन भर दर-दर भटकने वाले वो भिखारी पराग शाह ही थे, जिनकी पहचान राजनीतिक शख्सियत के अलावा कारोबारी और रियल एस्टेट डेवलपर की भी है. साल 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में उन्होंने जो हलफनामा दाखिल किया था, उसमें उनकी संपत्ति 3 हजार 383.06 करोड़ रुपये बताई गई थी. यानी वह उस चुनाव के सबसे अमीर उम्मीदवार थे.

लेकिन वह ये प्रयोग कर क्यों रहे थे?

इसका जवाब खुद पराग शाह ने दिया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पराग शाह ने बताया कि यह पूरा काम कोई राजनीतिक स्टंट नहीं था. उन्हें उनके जैन गुरु नमन मुनि महाराज ने एक धार्मिक प्रवचन के दौरान ये सलाह दी थी. जैन मुनि लोगों को उनकी पहचान के बारे में बता रहे थे. संदेश था कि लोग अक्सर मानते हैं कि उन्हें उनकी ‘पहचान’ की वजह से जाना जाता है लेकिन असल बात ये है कि अक्सर लोग उन्हें उनके पद, पावर या पैसे की वजह से पहचानते हैं.

Advertisement

पराग शाह ने कहा कि उन्हें भी यह लगता था कि हर कोई उन्हें पहचानता है. इसके बाद उनके गुरु ने उन्हें अपना हुलिया बदलकर उन जगहों पर जाने को कहा, जहां उन्हें लगता था कि लोग उन्हें जानते हैं. उन्हें देखना था कि लोग उनके साथ किस तरह पेश आते हैं. इतना ही नहीं, इन सबके बाद उसी दिन उन्हीं जगहों पर अपने असली हुलिए में वापस जाकर लोगों की प्रतिक्रिया भी देखनी थी.

ये भी पढ़ेंः 'फिर बाइक चलाऊंगी लेकिन...', सिया ने बताया कल्याण बैंसला की हरकत ने उनके साथ क्या किया

भिखारी के भेष में भटके

फिर क्या था. पराग शाह ने भिखारी का भेष बनाया और घाटकोपर के इलाकों में घूमने लगे. उन्होंने इलाके की अलग-अलग सड़कों पर तकरीबन तीन घंटे से ज्यादा बिताए. वो एक ऐसी जगह गए, जहां पर लोगों को फ्री में खाना बांटा जा रहा था. खाना बांटने का टाइम खत्म हो गया था. फिर भी पराग बांटने वालों के पास गए और उनसे पूछा, क्या खाने के लिए कुछ बचा है? वहां मौजूद एक व्यक्ति ने उन्हें पहचाना नहीं और दाल-चावल के साथ पानी की बोतल दे दी.

शाह इसके बाद एक समोसे की दुकान पर पहुंचे. दुकानदार से बोले कि उनके पास पैसे नहीं हैं. भूख लगी है. वो उन्हें कुछ खाने को दे दे. इसके बाद दुकानदार ने उन्हें पांच समोसे दिए. एख वक्त पर तो पराग अपने दफ्तर में ही पहुंच गए. उनके मुताबिक, वहां जो सिक्योरिटी गार्ड तैनात था, उसने भी उन्हें नहीं पहचाना और उन्हें वहां से भगा दिया. पराग शाह का मेकअप इतना जबर्दस्त था कि उनके परिवार के लोग भी उन्हें पहचान नहीं पाए.

पराग शाह ने कहा कि उन्होंने घाटकोपर स्टेशन, पुल और इलाके की अलग-अलग सड़कों पर करीब तीन घंटे बिताए. इससे उन्हें सिर्फ यही पता नहीं चला कि वह लोगों द्वारा पहचाने जाते हैं या नहीं, बल्कि लोगों और गरीबी को लेकर उनकी सोच भी बदल गई.

वीडियो: ‘ट्रॉफी चोर’ टैग पर घिरे मोहसिन नकवी, फैंस ने जमकर किया रोस्ट

Advertisement