दशरथ मांझी इतिहास के पन्नों में छपा वो नाम है, जो जज्बे और जुनून की मिसाल पेश करता है. एक बड़े पहाड़ की वजह से उनकी पत्नी को समय पर इलाज नहीं मिल सका. जिसके बाद मांझी ने ठान लिया कि गांव में किसी और को पहाड़ की वजह से परेशानी नहीं होगी. और सालोंसाल मेहनत करके उन्होंने पहाड़ काटकर सड़क निकाल दी. इसलिए उन्हें ‘माउंटेन मैन’ के नाम से भी जाना जाता है.
पानी के रास्ते पड़ता था जंगल, महिला ने घर के पास ही जमीन खोद-खोदकर 'कुआं' निकाल दिया!
Odisha Woman digs well in Chandaka: एक महिला को पानी के लिए लगभग 1 घंटा तक चलना पड़ता था. फिर भी साफ पानी नहीं मिलता था. इस बीच जंगली जानवरों के बीच से निकलना भी एक बड़ी समस्या थी. कई बार तो रात के समय भी पानी लेने के लिए जाना पड़ता था. आखिरकार उन्होंने मन बना लिया कि 'बस बहुत हो गया.'


ऐसे ही जज्बे की कहानी ओडिशा के भुवनेश्वर से भी सामने आई है. एक महिला को पानी के लिए लगभग 1 घंटा तक चलना पड़ता था. फिर भी साफ पानी नहीं मिलता था. इस बीच जंगली जानवरों के बीच से निकलना भी एक बड़ी समस्या थी. कई बार तो रात के समय भी पानी लेने के लिए जाना पड़ता था. आखिरकार उन्होंने मन बना लिया कि 'बस बहुत हो गया.' अब वे खुद अपने पानी का इंतजाम करेंगी.
ये कहानी है शकुंतला चतर (35) की, जो मिड-डे-मील बनाने का काम करती हैं. वो रोजाना चंदाका-दंपदा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के अंदर से होते हुए कम से कम एक घंटा पैदल चलकर पानी लेने जाती थीं. उन्हें जंगली जानवरों, खासकर हाथियों के खतरे के बावजूद जंगलों से गुजरना पड़ता था. ये सफर दिन में एक-दो बार होता था. कई बार रात में भी.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, शकुंतला ने बताया कि वे और अन्य लोग हाथियों की वजह से अक्सर वॉटर सोर्स तक जाने से डरते थे. इसलिए उन्होंने 2024 में अपनी ही जमीन पर कुआं खोदने का फैसला किया. 60 दिनों तक लगातार तीन-चार घंटे लगकर खुदाई की. बीच-बीच में शकुंतला की मदद उनके पति लादूराम चतर (जो एक मिस्त्री हैं) और पड़ोसी जगन्नाथ टिंगुआ (जो एक मजदूर हैं) ने भी की. जब गड्ढा 40 फीट पहुंचा, तो उसमें से पानी आने लगा.
अब ये कुआं शकुंतला के परिवार के साथ ही आस-पड़ोस के चार-पांच घरों की भी पानी की समस्या को दूर करता है. गांव वालों का कहना है कि जंगल से लाने वाले पानी के मुकाबले उन्हें कई गुना साफ पानी कुएं से मिल जाता है.
पानी की समस्या दूर करने के बाद सरपंच बिष्णु प्रसाद डेंगा ने भी शकुंतला चतर की तारीफ की. कहा, “उनकी कड़ी मेहनत और पक्के इरादे की वजह से उनका परिवार पूरे गांव में सबसे अलग पहचान बना पाया है.” इस कुएं ने सिर्फ पानी की समस्या दूर नहीं की, बल्कि गड्ढा खोदते समय जो मिट्टी निकली उसे शकुंतला के परिवार ने घर बनाने में इस्तेमाल किया.
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