पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं को हिला रखा है. इसके चलते कच्चा तेल उबाल मार रहा है. शेयर बाजार और सोना सब गिर रहे हैं. ऐसे में निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि क्या अब शेयर से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर जाना चाहिए? अगर आप बाजार की इस उठापटक से परेशान हैं, तो आपके पास अब भी कई निवेश विकल्प मौजूद हैं. इन्हीं में से एक विकल्प है डेट म्यूचुअल फंड.
शेयर-सोना सब गिर रहे, अब कहां लगाएं पैसा? ये म्यूचुअल फंड बचा लेंगे
ईरान युद्ध ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला रखा. कच्चा तेल उबाल मार रहा है. शेयर बाजार, सोना और रुपया सब गिर रहे हैं. ऐसे में निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि क्या अब शेयर से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर जाना चाहिए?


डेट म्यूचुअल फंड (Debt Mutual Funds) ऐसे फंड होते हैं जो आपका पैसा उधार देने वाले इंस्ट्रूमेंट्स में लगाते हैं. निवेश सलाहकार विनोद रावल का कहना है कि डेट म्यूचुअल फंड आपके पैसे को सरकारी बॉन्ड, कॉर्पोरेट बॉन्ड, ट्रेजरी बिल, सर्टिफिकेट ऑफ ऑफ डिपॉजिट और दूसरे डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करता है. आसान भाषा में कहें तो डेट फंड्स सरकारों और कंपनियों को पैसा उधार देते हैं और इससे मुनाफा कमाते हैं.
डेट म्यूचुअल फंड कई प्रकार के होते हैं. लिक्विड फंड, मनी मार्केट फंड, कारपोरेट बॉन्ड फंड, डायनामिक बॉन्ड फंड और गिल्ट फंड आदि डेट म्यूचुअल फंड की श्रेणी में आते हैं. इनमें निवेश करने पर पैसा आसानी से निकाला जा सकता है. ये फंड ट्रेजरी बिल, कमर्शियल पेपर (CP) और सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) जैसे बहुत शॉर्ट-टर्म इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं. इनकी मैच्योरिटी आमतौर पर 91 दिनों तक होती है.
इसी तरह से शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग टर्म फंड भी डेट फंड की एक कैटेगरी है. ये लिक्विड फंड की तुलना में थोड़ा ज्यादा रिटर्न देते हैं. हालांकि इनमें जोखिम भी थोड़ा बढ़ जाता है.
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डेट फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट में क्या फर्क होता है?फाइनेंस एक्सपर्ट शरद कोहली लल्लनटॉप से बताते हैं कि अगर आप बैंक की एफडी में पैसा लगाते हैं तो बैंक आपका पैसा लेकर किसी को लोन देता है और आपको पहले से तय ब्याज देता है. ये ब्याज की दर आपको पहले से ही पता होती है. वहीं, डेट फंड्स में तय रिटर्न नहीं मिलता है. डेट फंड में आपका निवेश उन सभी डेट सिक्योरिटीज की मार्केट वैल्यू के आधार पर बढ़ता है जिनमें फंडों में आपने पैसा लगा रखा है. डेट फंड में निवेश की अवधि 1 दिन से लेकर 3 साल तक हो सकती है.
उनका कहना है कि अगर आप कम से कम 3 साल तक निवेश बनाए रखते हैं तो ये फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में टैक्स कटने के बाद भी रिटर्न देते हैं. FD में मिलने वाला ब्याज हर साल आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स के दायरे में आता है. चाहे आपने पैसा निकाला हो या नहीं. साथ ही, जब ब्याज तय सीमा से ज्यादा हो जाता है तो बैंक TDS भी काट लेते हैं.
वहीं, 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए डेट म्यूचुअल फंड्स पर टैक्स सिर्फ तभी लगता है जब आप उन्हें बेचते हैं. इसमें भी केवल कैपिटल गेन पर ही आपकी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है. यानी होल्डिंग पीरियड के दौरान आपको हर साल टैक्स नहीं देना पड़ता है.
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डेट फंड में किसे निवेश करना चाहिए?इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि डेट फंड शार्ट टर्म में कम अस्थिर होते हैं. ये इक्विटी फंड्स की तुलना में कम जोखिम वाले होते हैं. डेट फंड में उन निवेशकों को पैसा लगाना चाहिए जोकि इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर दांव नहीं लगाना चाहते. अगर आपके पोर्टफोलियो में इक्विटी फंड में ज्यादा निवेश कर रखा है तो डेट फंड आपके निवेश पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाइड करने और पोर्टफोलियो जोखिम को कम करने में भी मदद कर सकते हैं.
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में म्यूचुअल फंड सलाहकार गिल्ट फंड में निवेश करने की सलाह दे रहे हैं. उनका मानना है कि आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती शुरू होने पर गिल्ट फंड बेहतर रिटर्न दे सकते हैं. उनका कहना है कि ब्याज दरों में गिरावट के चलते गिल्ट फंड 10 परसेंट से ज्यादा रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं. गिल्ट फंड सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) में निवेश करते हैं. सेबी के नियमों के मुताबिक, इन डेट फंड्स को अपने फंड का 80% सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करना अनिवार्य है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि निप्पॉन इंडिया गिल्ट फंड, बंधन गिल्ट फंड, एसबीआई गिल्ट फंड आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल गिल्ट फंड , आदित्य बिरला सन लाइफ जी-सेक फंड में निवेश करने के लिए बढ़िया फंड हैं. वहीं, इकोनॉमिक टाइम्स की एक और खबर में बताया गया है कि मध्यम से लंबी अवधि के डेट फंड जैसे एसबीआई मैग्नम मीडियम टू लॉन्ग ड्यूरेशन फंड, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल बॉन्ड फंड और आदित्य बिरला सन लाइन इनकम फंड के लिए बेहतर निवेश विकल्प हो सकते हैं.
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