The Lallantop

इलाज के पैसे नहीं थे, 150 किमी ट्राईसाइकिल चलाकर अस्पताल पहुंचा बुजुर्ग, पैर में फ्रैक्चर था

सुखदेव नाहक ओडिशा के नयागढ़ जिला स्थित बारासाही गांव में रहते हैं. इंडिया टुडे से जुड़े अजय कुमार नाथ की रिपोर्ट के मुताबिक MKCG अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें यहां तक पहुंचने में करीब दो दिन लग गए. बाएं पैर में फ्रैक्चर के बावजूद वो खुद पेडलिंग करते हुए आए. उ

Advertisement
post-main-image
73 साल के सुकादेव इलाज के लिए ट्राइसाइकिल से करीब 150 किलोमीटर दूर सरकारी अस्पताल पहुंचे. (फोटो- इंडिया टुडे)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • सुखदेव नाहक, जिनका बायां पैर फ्रैक्चर्ड है, इलाज के लिए 150 किमी दूर सरकारी एमकेसीजी अस्पताल ट्राईसाइकिल चलाकर पहुंचे।
  • उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे प्राइवेट इलाज नहीं करा पाए और इलाज के लिए बारासाही से बरहामपुर तक खुद सफर करना पड़ा।
  • अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी चोट की जांच की और टेस्ट रिपोर्ट के बाद इलाज शुरू करने का आश्वासन दिया है।
author-image
अजय कुमार नाथ

सुखदेव नाहक 73 साल के हैं. उम्र बताती है वे एक आजाद देश में हुए थे. लेकिन हालत बताती है कि अपने संघर्षों से आजाद नहीं हो पाए हैं. ऐसे संघर्ष जो किसी भी आजाद मुल्क के आजाद नागरिक की जिंदगी में नहीं होने चाहिए. सुखदेव नाहक का पैर फ्रैक्चर्ड है. उन्हें इलाज की जरूरत है. लेकिन इसका खर्च वो अफोर्ड नहीं कर सकते. इसलिए घर से 150 किमी दूर सरकारी अस्पताल पहुंचे हैं. ये यात्रा उन्होंने एंबुलेंस, कार या बस से नहीं की. वे एक ट्राईसाइकिल को खुद चलाते हुए बरहामपुर के MKCG अस्पताल आए.

Advertisement

सुखदेव नाहक ओडिशा के नयागढ़ जिला स्थित बारासाही गांव में रहते हैं. इंडिया टुडे से जुड़े अजय कुमार नाथ की रिपोर्ट के मुताबिक MKCG अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें यहां तक पहुंचने में करीब दो दिन लग गए. बाएं पैर में फ्रैक्चर के बावजूद वो खुद पेडलिंग करते हुए आए. उनके साथ कोई नहीं था. हालांकि, रास्ते में कुछ लोगों ने उनकी मदद की. जैसे तैसे अस्पताल पहुंचकर सुखदेव ने डॉक्टरों को अपनी कहानी बताई. उन्होंने बुजुर्ग को बेहतर इलाज का भरोसा दिलाया.

सुखदेव अपने गांव में चौकीदारी करते थे. कुछ समय पहले एक दुर्घटना में उनका बायां पैर फ्रैक्चर हो गया था. परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते वे प्राइवेट ट्रीटमेंट नहीं करा पा रहे थे. और सरकारी अस्पताल घर से 150 किमी दूर. लेकिन इलाज का कोई विकल्प होता नहीं. कराना ही पड़ता है. सो मजबूरी में ट्राईसाइकिल लेकर घर से निकल पड़े. किसी तरह दो दिन में करीब 150 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया और बेरहामपुर के महाराजा कृष्ण चंद्र गजपति मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (MGCG) पहुंचे.

Advertisement

अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि सबसे पहले उनकी चोट और सेहत की जांच की जाएगी. इसके लिए टेस्ट कराए जाएंगे. रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टर उनका इलाज शुरू करेंगे. उन्हें हर जरूरी स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जाएगी.

सुखदेव नाहक की कहानी बाहर आई तो पत्रकारों ने भी अस्पताल का रुख किया. उनसे बातचीत में बुजुर्ग ने बताया,

‘मेरा नाम सुखदेव नाहक है. मैं नयागढ़ जिले के बारासाही गांव का रहने वाला हूं. मैं इलाज के लिए ट्राइसाइकिल से बेरहामपुर आया. करीब 150 किलोमीटर की दूरी तय करने में मुझे करीब दो दिन लगे. सफर बहुत मुश्किल था, लेकिन मैं इलाज कराना चाहता था. रास्ते में लोगों ने मुझे खाना दिया और उससे मुझे रास्ता पूरा करने में काफी मदद मिली.’

Advertisement

यह भी पढ़ें: फ्रैक्चर्ड पैर का इलाज कराने आया युवक, डॉक्टरों ने गत्ता लगा दिया, फिर वही हुआ जो होना था

सुखदेव ने आगे बताया कि उनका एक बेटा है, लेकिन वह मानसिक रूप से बीमार है. कोई काम नहीं कर पाता है. उनकी पत्नी का निधन साल 2011 में हो गया था. उन्होंने आगे कहा कि डॉक्टरों ने उनकी जांच की है. अब उनको उम्मीद है कि वो ठीक हो जाएंगे और फिर से चलने लगेंगे.

हालांकि एक सवाल भी है. क्या किसी गरीब शख्स को इलाज के लिए इतनी लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी?

वीडियो: तहसीन पूनावाला की सरकार के साथ मीटिंग, एथेनॉल पर क्या फैसला हुआ?

Advertisement