भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन अब पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे हैं. सोमवार, 19 जनवरी को पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए उनके लिए आवश्यक समर्थन प्रस्ताव भी जमा हो चुके हैं. वो भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे.
आसान नहीं है बीजेपी अध्यक्ष की राह, इन चुनौतियों से कैसे निपटेंगे नितीन नबीन
दिसंबर में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन ने तमिलनाडु, पुडुचेरी और असम का दौरा किया था. आने वाले चुनावों में इन राज्यों को वो कैसे मैनेज करते हैं, ये देखना दिलचस्प होगा.


नितिन नबीन के लिए पार्टी का अध्यक्ष पद कई बड़ी चुनौतियां लेकर आ रहा है. खासकर आगामी विधानसभा चुनाव और पार्टी संगठन से जुड़े आंतरिक मुद्दे उनके लिए बड़ा चैलेंज होंगे. नितिन के सामने क्या-क्या चैलेंज होंगे, इस पर बात करेंगे.
तत्काल चुनौती: विधानसभा चुनावआने वाले विधानसभा चुनाव पश्चिम बंगाल, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और असम में होने हैं. इनमें से असम और पुडुचेरी में NDA की सरकार है, लेकिन बाकी राज्यों में भाजपा सत्ता में नहीं है. तमिलनाडु और केरल में पार्टी की मौजूदगी अभी कमजोर है. यहां पार्टी को अपनी पैठ जमानी है.
पश्चिम बंगाल में भाजपा मुख्य विपक्षी दल है, लेकिन वहां जीत का रास्ता बहुत कठिन है. नितिन नबीन के लिए इन राज्यों में पार्टी की मजबूत चुनावी मशीनरी को कम अनुकूल परिस्थितियों में चलाना एक अग्निपरीक्षा होगी. कहा जा रहा है कि उनके लिए सबसे बड़ा चैलेंज इन राज्यों में बड़े फैसले लेने का होगा.
दिसंबर में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने तमिलनाडु, पुडुचेरी और असम का दौरा किया था. जिससे उनके इन राज्यों में हालात का अंदाजा लग सके. आने वाले चुनावों में इन राज्यों को वो कैसे मैनेज करते हैं, ये देखना दिलचस्प होगा.
आंतरिक चुनौतियांपीढ़ीगत बदलाव और युवा नेतृत्व: 45 साल की उम्र में नितिन नबीन पार्टी के सबसे युवा अध्यक्ष हैं. आज का वोटर ज्यादातर जेन Z है. लेकिन पार्टी की संरचना अभी बूमर-जेन-X पीढ़ी पर टिकी है. उन्हें राष्ट्रीय महासचिव, सचिव और मोर्चा प्रमुखों की नियुक्ति में युवा और अनुभवी नेताओं का संतुलन बनाना होगा.
उच्च कमान ने उन्हें चुनकर स्पष्ट संकेत दिया है कि युवा नेताओं को जगह मिलनी चाहिए. लेकिन नए अध्यक्ष को अनुभवी हाथों की भी जरूरत होगी. इस संतुलन को बनाते हुए अपनी सत्ता स्थापित करना उनके लिए बड़ी परीक्षा होगी.
सत्ता और संगठन के बीच संतुलन: भाजपा केंद्र में लंबे समय से सत्तारूढ़ है. ऐसे में पार्टी को संगठन में अपनी अलग पहचान बनाए रखनी है. अमित शाह और जेपी नड्डा के कार्यकाल से इसका एक टेम्पलेट मिला है. नितिन नबीन को सरकार के एजेंडे और मुद्दों के साए में संगठन को मजबूत और पोषित करना होगा. ये एक नाजुक संतुलन का काम है. उनके लिए ये राह आसान नहीं होने वाली.
कुल मिलाकर नितिन नबीन का कार्यकाल पार्टी में नए और युवा नेताओं को लाकर पीढ़ीगत बदलाव लाने का होगा. वो भी पार्टी की मूल विचारधारा और आधार को बिना बदले ये करना सबसे चुनौतीपूर्ण होगा. आगामी विधानसभा चुनावों के परिणाम और पार्टी का आंतरिक संतुलन उनके नेतृत्व को परखेगा.
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