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लश्कर कमांडर ने कबूला, हमास से गहरे रिश्ते, दोहा में हुई गुप्त बैठक

एक हालिया वीडियो में नदीम ने कबूल किया है कि उसने 2024 में कतर के दोहा में हमास के सीनियर नेताओं से मुलाकात की.

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हमास के सीनियर कमांडर नाजी जहीर और लश्कर कमांडर राशिद अली संधू के मंच साझा करने वाला अनडेटेड वीडियो सामने आया था. (फोटो- X)

पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक सीनियर कमांडर ने खुलासा किया है कि उनके संगठन के हमास से गहरे संबंध हैं. कमांडर ने ये भी बताया है कि उन्होंने हमास की टॉप लीडरशिप से मुलाकातें भी की हैं. अब चिंता इस बात की है कि LeT और हमास के बीच ट्रेनिंग, फंडिंग और प्रोपेगैंडा में सहयोग बढ़ सकता है. भारतीय इंटेलिजेंस एजेंसियां इस पर पूरी नजर रख रही हैं, क्योंकि इसका भारत की सिक्योरिटी पर सीधा असर पड़ सकता है.

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2024 में हुई मुलाकात

पाकिस्तान मरकज़ी मुस्लिम लीग (PMML) के कमांडर फैसल नदीम ने ये खुलासा किया है. नदीम को आमतौर पर लश्कर-ए-तैयबा का राजनीतिक मुखौटा माना जाता है. एक हालिया वीडियो में नदीम ने कबूल किया है कि उसने 2024 में कतर के दोहा में हमास के सीनियर नेताओं से मुलाकात की. ये वीडियो NDTV को मिला है. नदीम ने बताया कि उसके साथ पहलगाम आतंकी हमले (जम्मू-कश्मीर) का कथित मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी भी था.

भारतीय खुफिया एजेंसियों का कहना है कि ये खुलासा दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व में सक्रिय आतंकी नेटवर्क के बीच सीधे समन्वय का ठोस सबूत देता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये कबूलनामा एक उभरते गठबंधन को दर्शाता है. जिसके तहत लॉजिस्टिक्स, प्रोपेगैंडा प्लान और ऑपरेशनल अनुभव साझा किया जा रहा था.

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पाकिस्तान के गुजरांवाला में हुआ कार्यक्रम

ये खुलासा 7 जनवरी की एक रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें पाकिस्तान के गुजरांवाला में PMML द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया था. इसमें हमास के सीनियर कमांडर नाजी जहीर और लश्कर कमांडर राशिद अली संधू के मंच साझा करने वाला अनडेटेड वीडियो सामने आया था.

NDTV की जांच के अनुसार, नाजी जहीर PMML इवेंट में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए था. जबकि संधू ने राजनीतिक नेता के रूप में संगठन का प्रतिनिधित्व कर रहा था. सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस बैठक का सार्वजनिक होना दोनों समूहों के बीच बढ़ती विश्वास और गहरे संबंधों को दर्शाता है. जहीर ने अक्टूबर 2023 से अब तक पाकिस्तान की लगभग 15 बार यात्रा की है.

रिपोर्ट के मुताबिक फैसल नदीम के ताजा कबूलनामा को लश्कर के रिश्तों की पुष्टि माना जा रहा है. काउंटर-टेररिज्म एक्सपर्ट्स का कहना है कि हमास और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) दोनों ही अमेरिका और कई अन्य देशों द्वारा आतंकवादी संगठनों के रूप में नामित हैं, और इनके बीच कोई भी समन्वय क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है.

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भारतीय खुफिया तंत्र भी हमास-लश्कर गठजोड़ पर कड़ी नजर रख रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर और FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सके. भारतीय खुफिया एजेंसियां घटनाक्रम की बारीकी से निगरानी कर रही हैं और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके प्रभावों का आकलन कर रही हैं.

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