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नेपाल में DJ की वजह से सांप्रदायिक हिंसा भड़की, 3 की मौत, 4 जिलों में लगा कर्फ्यू

Nepal communal violence: सुनसरी जिले में 26 तारीख की रात करीब साढ़े 10 बजे एक ग्रुप बोलबम की यात्रा पर निकल रहा था. यात्रा के साथ डीजे भी था जिसमें तेज़ आवाज़ में गाने बज रहे थे. दूसरे समुदाय ने इसपर आपत्ति जताई जिसके बाद हिंसा भड़क उठी.

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नेपाल में हिंसा के बाद चार जिलों में कर्फ्यू लगाया गया है. (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • 26 जुलाई की रात सुनसरी जिले में बोलबम धार्मिक यात्रा के दौरान डीजे की तेज आवाज़ को लेकर बहस शुरू हुई, जो हिंसा में बदल गई और तीन लोगों की मौत हो गई।
  • बोलबम यात्रा के दौरान तेज आवाज़ और मुहर्रम के धार्मिक झंडे को लेकर पहले से विवाद चल रहा था, जिससे तनाव बढ़कर सांप्रदायिक हिंसा हुई।
  • हिंसा के बाद चार जिलों में कर्फ्यू लगाया गया और पुलिस, सशस्त्र बल तथा सेना को तैनात कर स्थिति नियंत्रण में लाने का प्रयास किया गया।

नेपाल में 26 जुलाई की रात सांप्रदायिक हिंसा शुरू हो गई. कहीं सड़कों पर आग लगा दी गई, कहीं गोलियां चलीं हैं तो कहीं परिवार को बीच सड़क पर घेरकर मारा गया है. सिचुएशन इतनी बिगड़ गई है कि देश के 4 ज़िलों में कर्फ्यू लगाना पड़ा. इस हिंसा में अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है. यह सारा विवाद डीजे की तेज आवाज की वजह से हुआ था.

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नेपाली मीडिया हाउस काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनसरी जिले में 26 तारीख की रात करीब साढ़े 10 बजे एक ग्रुप बोलबम की यात्रा लेकर निकल रहा था. बोलबम एक धार्मिक यात्रा है जिसे हमारे देश में कांवड़ कहते हैं. बोलबम यात्रा के साथ डीजे भी था. उसमें तेज़ आवाज़ में गाने बज रहे थे. रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे समुदाय ने तेज़ आवाज़ पर आपत्ति जताई. जिसके बाद बहस शुरू हो गई. यहीं से इस हिंसा की आग भड़क उठी. 

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट के मुताबिक, बोलबम यात्रा के अलावा धार्मिक झंडे को लेकर भी विवाद था. बताया जा रहा है कि मंदिर की सार्वजनिक जगह पर मुहर्रम के मौके पर धार्मिक झंडा लगाया गया था. उस झंडे को हटाने को लेकर भी पहले से एक विवाद चल रहा था. उसके बाद बोल बम यात्रा के डीजे ने आग में घी का काम किया.

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डीजे को लेकर बहस शुरू हुई और झगड़ा मारपीट तक पहुंच गया. दोनों तरफ के लोग लाठी, डंडा और पत्थर चलाने लगे. इसमें करीब 22 लोग बुरी तरह से घायल हो गए. भीड़ को शांत करने के लिए पुलिस ने फायरिंग शुरू की. जिसमें एक गोली 24 साल के ओम प्रकाश मेहता को लगी और उनकी मौत हो गई. धीरे-धीरे हिंसा सुनसरी ज़िले से निकल कर नेपाल के दूसरे शहरों में भी पहुंचने लगी.  

हिंसा में तीन लोगों की मौत

हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन ने सुनसरी, सप्तरी, सिराहा और धनुषा जिलों में कर्फ्यू लगा दिया है. स्थिति को कंट्रोल में करने के लिए नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल (APF) और नेपाली सेना को तैनात किया गया है. ओम प्रकाश के बाद 20 साल के जयप्रकाश मेहता और एक नाबालिग लड़के की भी मौत हो गई.

रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों की मौत गोली लगने की वजह से हुई है. पुलिस आंसू गैस और लाठीचार्ज भी कर रही है. इस बीच सरकार की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं. सुरक्षा विशेषज्ञों, विपक्षी नेताओं और ह्यूमन एक्टिविस्ट का आरोप है कि सरकार ने शुरुआती दिनों में खास दखल नहीं दिया. इसके बाद तनाव दूसरे जिलों तक फैल गया.

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PM बालेन शाह ने क्या कहा?

विपक्ष का कहना है कि अगर समय रहते स्थानीय नेताओं और दोनों समुदायों से बातचीत की जाती तो हालात इतने नहीं बिगड़ते. इस घटना पर प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा, 

‘मैं सरकार की ओर से नागरिकों, धार्मिक समुदायों, सभी सम्मानित नेताओं, सभी राजनीतिक दलों और ज़िम्मेदार मीडिया से अपील करता हूं कि वो धैर्य और संयम बरतें. शांति, सद्भाव, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता बनाए रखें. मामले में निष्पक्ष जांच कराई जाएगी.’

इससे पहले जुलाई के शुरुआत में स्टूडेंट्स सड़कों पर उतर आए थे. खूब नारेबाज़ी हुई थी. उनकी नाराज़गी सरकार और प्रधानमंत्री बालेन शाह से थी. आरोप लगाया गया था कि बालेन शाह जिस वादे के दम पर प्रधानमंत्री बने थे, उस वादे को पूरा नहीं किया गया. प्रोटेस्ट के कुछ दिनों बाद ये सांप्रदायिक हिंसा हुई है.

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