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प्रोफेसर कुलकर्णी को कैसे मिला NEET का पूरा पेपर? अरेस्ट के बाद अब खुली पूरी कहानी

CBI के जांच मे NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में रिटायर्ड प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी सबसे अहम कड़ी बनकर सामने आए हैं. उनकी पेपर के सभी सेट्स तक पहुंच थी. इस मामले में अब तक कोचिंग संचालकों और काउंसलरों समेत 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.

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परीक्षा से पहले ही पहुंच गया था NEET पेपर (फोटो - इंडिया टुडे)

‘नीट के पेपर सेट करने वाले को ये नहीं पता होता कि कौन सा सवाल फाइनल पेपर में जाएगा, लेकिन ट्रांसलेटर के तौर पर उसके पास पूरा पेपर होता है.’ जांच एजेंसियों के मुताबिक, यही बात अब NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की सबसे अहम कड़ी बन गई है.

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15 मई को CBI ने पुणे के रिटायर्ड प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया. उन पर NEET-UG 2026 का पेपर लीक करने के आरोप हैं. लेकिन मामला सिर्फ एक पेपर लीक का नहीं है. जांच अब ऐसे नेटवर्क तक पहुंचती दिख रही है, जिसमें प्रोफेसर, कोचिंग संचालक, करियर काउंसलर और लाखों रुपये के लेनदेन की बात सामने आ रही है.

क्या मुख्य साजिश कर्ता प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी हैं?  

कुलकर्णी सिर्फ पेपर सेटिंग से जुड़े पैनल का हिस्सा नहीं थे. वह NEET पेपर को मराठी में ट्रांसलेट करने का काम भी करते थे. और जांच एजेंसियां इसी भूमिका को इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी मान रही हैं.

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The Print ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि पेपर सेट करने वाले किसी व्यक्ति को यह नहीं पता होता कि आखिर कौन से सवाल फाइनल पेपर में जाएंगे. लेकिन ट्रांसलेटर के तौर पर कुलकर्णी के पास पूरे पेपर की पहुंच थी. यानी सभी सेट्स और सभी सवाल उनके सामने थे.

NEET परीक्षा में आमतौर पर चार सेट होते हैं. हर सेट में 180 सवाल रहते हैं. फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के सवाल सभी सेट्स में एक जैसे होते हैं, केवल उनका क्रम बदला जाता है.

सीबीआई के लिए कुलकर्णी इसलिए भी अहम किरदार माने जा रहे हैं क्योंकि वह 2019 से NTA के पैनल का हिस्सा थे. अब जांच एजेंसियां इस एंगल से भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं पहले भी इसी तरह की कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसियां कुलकर्णी से इन सभी पहलुओं पर पूछताछ कर रही हैं.

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पेपर का लीक का पूरा नेटवर्क पता लगा

The Print ने दूसरे सूत्रों के हवाले से लिखा है कि कुलकर्णी की दोस्ती महाराष्ट्र के लातूर के केमिस्ट्री टीचर शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर से थी. जिन्हें 17 मई को गिरफ्तार किया गया. वह ‘रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस’ नाम से कोचिंग चलाते हैं. साथ ही उनका एक यूट्यूब चैनल भी है, जिसका नाम ‘Motegaonkar Sir’s RCC’ है.

जांच एजेंसियों के कोर्ट में जमा दस्तावेजों के मुताबिक, मोटेगांवकर को 23 अप्रैल को ही पेपर मिल गया था, जबकि परीक्षा 3 मई को हुई थी. 14 मई को हुई छापेमारी में उनके मोबाइल फोन से कथित तौर पर लीक पेपर की कॉपी बरामद होने का दावा किया गया. यह भी दावा किया गया है कि कुलकर्णी की पहचान पुणे की बिजनेसवुमन मनीषा वाघमारे और करियर काउंसलर धनंजय लोखंडे से भी थी. दोनों फिलहाल CBI हिरासत में हैं. 16 मई को दिल्ली की एक अदालत ने कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे को 10 दिन की CBI हिरासत में भेजा था.

The Print ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि ये सभी लोग पहले से एक-दूसरे को जानते थे. मनीषा, मोटेगांवकर और धनंजय को पता था कि कुलकर्णी की NTA तक पहुंच है. आरोप है कि इसी के बाद सभी ने मिलकर पेपर हासिल करने और उससे मोटी कमाई करने की साजिश रची. जांच एजेंसियों का कहना है कि इस नेटवर्क को सिर्फ पैसों का फायदा नहीं मिला, बल्कि इनके कोचिंग और काउंसलिंग बिजनेस की साख भी बढ़ी. क्योंकि ये लोग 100 प्रतिशत NEET एडमिशन का दावा करते थे. छात्रों और अभिभावकों को भरोसे के साथ सीट दिलाने की बात कही जाती थी. जांच एजेंसियों के मुताबिक, ऐसा भरोसा तभी बनता है जब अंदर से सेटिंग हो.

NTA के और अधिकारी भी नेटवर्क का हिस्सा?

महाराष्ट्र के इस ग्रुप से पेपर आगे नासिक के शुभम खैरनार तक पहुंचा. वहां से गुरुग्राम के यश यादव और राजस्थान के मांगीलाल बिवाल तक इसकी डील हुई. बताया जा रहा है कि इस पूरे खेल में 10 से 15 लाख रुपये तक का लेनदेन हुआ.

CBI के मुताबिक, जांच की कड़ी बिवाल के परिवार से पीछे की तरफ चली और आखिरकार कुलकर्णी तक पहुंची. एक सूत्र ने कहा कि अब पूरी चेन लगभग स्थापित हो चुकी है. हालांकि बीच में और भी लोग हो सकते हैं, जिनकी जांच अभी जारी है. एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या NTA के और अधिकारी भी इस नेटवर्क में शामिल थे. अब तक इस मामले में दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्यानगर से कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

यानी जिस परीक्षा को लाखों छात्र सालों की मेहनत और उम्मीद के साथ देते हैं, उस पर एक बार फिर भरोसे का संकट खड़ा हो गया है. सवाल सिर्फ पेपर लीक का नहीं, बल्कि उस सिस्टम का भी है, जहां सपनों की कीमत लाखों रुपये में तय होने लगी है.

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