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NEET पेपर लीक पर कितना ही हंगामा हो सजा नहीं होगी? रिपोर्ट में दिखा कड़वा सच

NEET परीक्षा 2026 में पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद इसकी जांच CBI को सौंप दी गई है. CBI ने कई लोगों की धरपकड़ भी की है. लेकिन पेपर लीक के दोषियों को सजा मिलेगी इसका दावा नहीं किया जा सकता. क्योंकि पिछला ट्रैक रिकॉर्ड तो यही बताता है. अधिकतर मामलों में दोषी या तो बरी हो जाते हैं या केस सालों तक अदालतों में लटकने के बाद दम तोड़ देता है.

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पेपर लीक के मामलों में सजा होने की दर लगभग नहीं के बराबर है. (इंडिया टुडे)

नीट परीक्षा 2026 का पेपर लीक हुआ. परीक्षा कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द कर दी. इसके चलते लगभग 23 लाख छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया. अब उनको फिर से 21 जून को परीक्षा देनी होगी. दूसरी तरफ CBSE बोर्ड के नए मार्किंग सिस्टम पर उठे सवालों के चलते 4 लाख छात्र भी अनिश्चितता के भंवर में अटके हैं. लेकिन अब परीक्षा बस मेरिट का नहीं है. उससे कहीं बड़ी परीक्षा सिस्टम में फिर से भरोसा बहाल करने की है.

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मार्किंग सिस्टम को लेकर हुए बवाल के बाद CBSE के अध्यक्ष और सचिव का ट्रांसफर हो गया है. लेकिन ये लोगों का गुस्सा शांत करने की कवायद भर दिखती है. ये मामला शायद ही किसी ठोस नतीजे तक पहुंच पाए, क्योंकि पिछला ट्रैक रिकॉर्ड तो यही बताता है. हर बड़ी परीक्षा लीक के बाद कुछ दिन सुर्खियां, कुछ गिरफ्तारियां, एक जांच कमेटी और फिर... अंतहीन खामोशी. अधिकतर मामलों में दोषी या तो बरी हो जाते हैं या केस सालों तक अदालतों में लटकने के बाद दम तोड़ देता है.

45 बड़े पेपर लीक में सिर्फ दो मामले में सजा

इंडियन एक्सप्रेस ने पिछले दो दशक में हुए 45 बड़ी परीक्षाओं में पेपर लीक से जुड़े मुकदमों की सुध ली है. इन परीक्षाओं में कम से कम 1 लाख कैंडिडेट्स ने शिरकत की है. रिजल्ट परेशान करने वाले हैं. इनमें से केवल दो मामलों में ही दोषियों को सजा मिली है. बाकी अधिकतर मामले या तो अदालतों में लटके हुए हैं या पूरी तरह से बंद हो चुके हैं. जवाबदेही का इंडेक्स इतना नीचे इसलिए है, क्योंकि आरोपियों का राजनीतिक रसूख और ऊंची पहुंच कार्रवाई के आड़े आ जाती है. इसको ऐसे समझिए कि पेपर लीक के दो आरोपी अब उत्तर प्रदेश में विधायक हैं.

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इंडियन एक्सप्रेस ने साल 2002 से लेकर 2025 तक हुई 27 नौकरी भर्ती परीक्षाओं और 18 हायर एजुकेशन एंट्रेस टेस्टों में हुए पेपर लीक से जुड़े मामलों की तफ्सील से जांच की. जांच करने वाली टीम और सीनियर सरकारी अधिकारियों से ब्यौरा लिया, जिससे पता चला कि अब तक कम से कम 1,658 लोगों की गिरफ्तारी हुई है. इनमें 925 के खिलाफ चार्जशीट दायर हुई. दो मामलों में 18 आरोपियों को सजा हुई है. दो मामलों में 32 लोग बरी हो गए और 43 अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं. अब तक केवल गिनती के सीनियर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है.

45 पेपर लीक में से 23 केंद्र या राज्य में बीजेपी की सरकार के दौरान हुए. वहीं 14 पेपर लीक कांग्रेस शासित सरकारों के दौरान हुए. बाकी दूसरे दलों की सरकारों में हुए. सबसे ज्यादा 11 पेपर लीक उत्तर प्रदेश में हुए. इसके बाद गुजरात और राजस्थान का नंबर आता है, जहां क्रमश: 7 और 3 पेपर लीक हुए.

दोबारा परीक्षा कराने में औसतन 183 दिन लगते हैं

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इन आंकड़ों से इतर एक मानवीय पहलू भी है, जो कहीं ज्यादा चुभता है. 3 करोड़ 86 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने नौकरी, कॉलेज में दाखिले और बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे अंक की आस में इन परीक्षाओं के लिए रजिस्ट्रेशन किया था. लेकिन कुछ मामलों में उनका इंतजार चार साल तक खिंच गया. परीक्षा रद्द होने और फिर नई तारीख आने में औसतन 183 दिन लगे. किसी भी प्रतियोगी या एंट्रेस एग्जाम की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए ये कभी भी भरपाई नहीं हो पाने वाला नुकसान है.

2015 से 2023 के बीच 50 से ज्यादा पेपर लीक

इंडिया टुडे की रिपोर्ट संसदीय कार्यवाही और मीडिया जांच के हवाले से बताती है कि साल 2015 से 2023 के बीच आठ राज्यों में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के 50 से ज्यादा मामले सामने आए हैं. NEET और UGC-NET जैसी नेशनल लेवल की प्रतियोगी परीक्षाओं को जोड़ लें तो ये संख्या और बड़ी हो जाती है.  

अकेले राजस्थान में साल 2011 से 2022 के बीच पेपर लीक की 26 घटनाएं हुई हैं. इनमें से 14 तो आखिरी के चार साल यानी 2018 से 2022 के बीच हुई हैं. मतलब हर साल तीन से ज्यादा बार पेपर लीक. उत्तर प्रदेश में 2017 से 2022 के बीच 6 पेपर लीक के मामले दर्ज हुए. वहीं उत्तराखंड में साल 2019 के बाद से पेपर लीक के चार मामले सामने आए हैं.

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