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'15 लोगों ने तैयार की कोर्ट में भ्रष्टाचार बताने वाली बुक', एक्शन झेलने वाले एक्सपर्ट ने सब बताया

NCERT की 8वीं क्लास की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार बताने वाले चैप्टर पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया था. NCERT को फटकार लगाई. किताब वापस लेने का आदेश दिया. इस चैप्टर को तैयार करने वाले एक्सपर्टस पर भी एक्शन हुआ. अब इन एक्सपर्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा है.

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सुप्रीम कोर्ट में किताब तैयार करने वाले एक्सपर्ट्स ने सफाई दी है. (इंडिया टुडे)

एनसीईआरटी (NCERT) की 8वीं क्लास की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार वाले चैप्टर को लेकर काफी बवाल हुआ. सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया. NCERT को फटकार लगाई. किताब वापस लेने का आदेश दिया. इस चैप्टर को तैयार करने वाले एक्सपर्टस पर भी एक्शन हुआ. अब इन एक्सपर्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा है. 

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, विवादित चैप्टर प्रोफेसर मिशेल डैनिनो की अध्यक्षता में तैयार हुआ था. उनके सहयोगी थे सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार. उन्होंने कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर बताया कि यह विवादित चैप्टर सिर्फ तीन लोगों ने मिलकर तैयार नहीं किया था. इसे एक सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के जरिए तैयार किया गया था. इस चैप्टर को तैयार करने का मकसद अदालत या किसी संस्था का अपमान करना नहीं था.

सुप्रीम कोर्ट ने इन तीनों लोगों को भविष्य में स्कूली सिलेबस या किसी तरह के सिलेबस तैयार करने से ब्लैकलिस्ट करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा कि किसी भी सरकारी संस्था में इनको किसी तरह की एकेडमिक सर्विस देने नहीं दिया जाना चाहिए. कोर्ट ने तीनों को अपनी सफाई देने का ऑप्शन खुला रखा था.

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6 अप्रैल को इन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपनी सफाई दी है. इनकी ओर से बताया गया कि टेक्स्ट बुक किसी एक व्यक्ति ने नहीं लिखी, इसे 15 सदस्यीय टीम ने तैयार किया है. एक्सपर्ट्स ने दावा किया कि ज्यूडिशियरी पर शामिल किया गया चैप्टर पॉजिटिव था. इसमें मानवाधिकारों की रक्षा और गलत कानूनों को रद्द करने जैसे उदाहरण शामिल हैं. इसमें पर्यावरण से जुड़े मामलों में जस्टिस कुलदीप सिंह के काम का जिक्र किया गया है.

मिशेल डैनिनो ने एनसीईआरटी के डायरेक्टर दिनेश प्रसाद सक्लानी के दावे को चुनौती दी है. उन्होंने कहा था कि ड्राफ्ट, कमेटी के लोगों के बीच शेयर किया गया था. उन्होंने बताया कि सिलेबस बनाने की शुरुआत में ही 40 से ज्यादा सदस्यों का गूगल ग्रुप बनाया गया था.

सुपर्णा दिवाकर की भूमिका पर सफाई

हलफनामे में दावा किया गया कि सुपर्णा दिवाकर की ड्राफ्ट तैयार करने में कोई भूमिका नहीं थी. वह केवल रिसर्च, एडिटिंग और कॉर्डिनेशन में मदद कर रही थीं.

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बड़े शिक्षाविद निगरानी कर रहे थे

मिशेल डैनिनो ने बताया कि पद्म भूषण से सम्मानित एनसीईआरटी की सह-अध्यक्ष मंजुल भार्गव भी कंटेट की मॉनिटरिंग कर रही थीं. इसके अलावा भी NSTC और NOC के कई सदस्य लगातार किताब तैयार करने की प्रक्रिया में जुड़े हुए थे. 

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