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लापता बेटे की तलाश में जासूस बनी मां, दो-दो मर्डर का खुलासा कर दिया

Mumbai के J J Hospital में नर्स का काम करने वाली फरीदा खातून ने महीनों की तलाश के बाद अपने बेटे की गुमशुदगी का मामला सुलझा दिया. लेकिन उनकी इस तलाश का अंत बेहद दर्दनाक निकला.

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मुंबई में एक मां ने अपने बेटे की हत्या का मामला सुलझाया. (इंडिया टुडे, प्रतीकात्मक तस्वीर)

साल 2015. मुंबई का उपनगर मुंब्रा. यहां रहने वाली फरीदा खातून (Mumbai Farida Khatoon Story) का 17 साल का बेटा लापता हो गया. परेशान फरीदा शिकायत दर्ज कराने पुलिस स्टेशन पहुंची. लेकिन यहां उनकी सुनवाई नहीं हुई. जिसके बाद वह खुद से ही बेटे की खोजबीन में जुट गईं. उन्होंने सुरागों का पीछा किया. संदिग्धों से पूछताछ की. और मामले को सुलझा लिया. साथ ही उनकी इस तलाश ने एक और मामले को सुलझा दिया.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 17 अप्रैल 2015 में फरीदा खातून का बेटा 10 मिनट में वापस लौटने का वादा करके घर से निकला था. लेकिन तीन दिन तक वापस नहीं लौटा. जिसके बाद परेशान फरीदा पुलिस स्टेशन गईं. जहां अधिकारियों ने उनकी बात नहीं सुनी. उन्होंने कहा कि वह अपने दोस्तों की तरह अजमेर दरगाह गया होगा. और फिर उन्हें वापस लौटा दिया.

कई दिन बीतने के बाद भी जब कुरैशी का कोई सुराग नहीं मिला तो फरीदा ने स्थानीय पत्रकार मुबीन शेख की मदद से मामले की जांच शुरू की. कुरैशी के ज्यादातर दोस्त रबाले में रहते थे. इसलिए दोनों वहां के पुलिस स्टेशन गए. रबाले के पुलिस अधिकारियों ने फरीदा से आस-पास की जेलों में पता लगाने को कहा.

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इसके बाद फरीदा ने पहले अजमेर में अपने रिश्तेदारों को फोन किया. उन्हें कोई सुराग नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने ठाणे, कल्याण और तलोजा की जेलों में कुरैशी की तलाश की. कई बार तो उन्होंने पूरे दिन जेलों के बाहर इंतजार में बिताया. लेकिन इसका भी कोई नतीजा नहीं निकला. इसके बाद भी हार नहीं मानते हुए उन्होंने चाइल्ड रिमांड होम और फिर मुर्दाघरों की भी खाक छानी. लेकिन यहां भी निराशा हाथ लगी.

एक और दोस्त लापता

फरीदा मुंबई के जेजे अस्पताल अस्पताल में नर्स का काम करती थीं. कुछ महीनों तक तलाश करने के बाद उन्होंने अस्पताल में अपना काम संभाल लिया. यहां उनके दूसरे बेटे की सर्जरी भी चल रही थी. काम के साथ-साथ फरीदा ने अपने लापता बेटे की तलाश जारी रखी.

सितंबर में फरीदा को पता चला कि कुरैशी का एक दोस्त शब्बीर भी उसी दिन से लापता है. वह शब्बीर की मां हसीना से मिलीं. उन्होंने इसकी पुष्टि की. इसके बाद फरीदा को दोनों लड़कों की हत्या का शक हुआ. और उन्होंने कुरैशी के दोस्तों से कुरैशी और शब्बीर के एक कॉमन फ्रेंड के बारे में जानकारी ली. उस दोस्त ने उन्हें इस मामले में दीपक वाल्मिकि उर्फ सैम और मोहम्मद चौधरी के जुड़े होने के बारे में बताया.

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फरीदा ने ये सारी जानकारी मुंबई क्राइम ब्रांच को दी. इसके बाद क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच शुरू कर दी. पुलिस की जांच में पता चला कि कुरैशी और शब्बीर की हत्या वाल्मिकि और चौधरी ने ही की थी. पुलिस ने बताया कि दोनों ने पहले शब्बीर की हत्या की क्योंकि वाल्मिकि और शब्बीर की बहन रिश्ते में थे. शब्बीर इस रिश्ते का विरोध कर रहा था. पुलिस ने आगे बताया कि कुरैशी की हत्या इसलिए हुई कि इन दोनों को शक था कि कुरैशी ने ही शब्बीर को इस रिश्ते के बारे में बताया था. नवंबर 2015 में पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर कुरैशी और शब्बीर के शव के अवशेष को बरामद किया. 

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