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9 साल का इंतजार, जमीन पर काम और अब रफ्तार की बारी, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन पर बड़ा अपडेट

Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project को लेकर बड़ा अपडेट आया है. खबरों के मुताबिक प्रोजेक्ट का करीब साठ फीसदी काम पूरा हो चुका है. साथ ही बेंगलुरु में बन रहे स्वदेशी बुलेट ट्रेन का का प्रोटो टाइप अगले साल तक बन जाने की उम्मीद है.

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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन पर आया बड़ा अपडेट (फोटो- AI)

भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना (Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project) पर बड़ा अपडेट आया है. मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR) के बारे में खबर आ रही है कि प्रोजेक्ट का 60 फीसदी काम पूरा हो चुका है. इस प्रोजेक्ट की नींव 2017 में रखी गई थी. लेकिन जमीन अधिग्रहण से जुड़े विवाद, पर्यावरण संबंधी मंजूरियां और कोरोना महामारी की वजह से इसका काम काफी समय तक अटका रहा.

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रेल मंत्रालय के दिल्ली मुख्यालय के गेट नंबर-4 पर लगी एक नई तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर मीडिया के गलियारों तक चर्चा का विषय बनी हुई है. इस डिजिटल पोस्टर में एक बेहद आधुनिक, नुकीली और हरे-भरे ट्रैक पर दौड़ती बुलेट ट्रेन दिखाई दे रही है. 

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रेल मंत्रालय के गेट नंबर 4 पर लगी बुलेट ट्रेन की तस्वीर (फोटो- सोशल मीडिया)

ये तस्वीर महज एक पोस्टर भर नहीं है. ये तस्वीर इशारा कर रही है कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन अब बहुत जल्दी ही सपनों की दुनिया से निकलकर हकीकत की पटरी पर दौड़ने वाली है. वैसे रेलवे ने मीडिया से ये साफ कर दिया है कि बुलेट ट्रेन की ये फोटो असली नहीं है. मगर इस ट्रेन का इंतजार करने वालों के अंदर इसके चलते उम्मीद फिर से जाग गई है. 

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मुंबई से अहमदाबाद के बीच की दूरी लगभग 508 किलोमीटर है. अभी इस सफर को पूरा करने में कम से कम 6 से 7 घंटे का समय लगता है. लेकिन जब यह दूरी महज 2 घंटे में सिमट जाएगी, तो जरा सोचिए कि देश के दो सबसे बड़े आर्थिक केंद्रों की सूरत कितनी बदल जाएगी.

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर अब तक लगभग 9 साल का समय बीत चुका है. इन 9 सालों में भारतीय रेल ने तकनीक और बुनियादी ढांचे के मामले में एक लंबा सफर तय किया है. शुरुआत में धीमी रफ्तार से चलने वाली यह परियोजना अब सुपरफास्ट मोड में आ चुकी है. सरकार और नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस पूरे कॉरिडोर का 60% से अधिक निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है.

गुजरात के हिस्से में तो काम अंतिम चरण में है, जहां पुलों, पिलर्स और स्टेशनों का ढांचा लगभग तैयार हो चुका है. वहीं महाराष्ट्र में भी जमीन से जुड़े सारे विवाद सुलझाकर काम में तेजी ला दी गई है. यह प्रोजेक्ट सिर्फ दो शहरों को जोड़ने का जरिया नहीं है, बल्कि यह भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर की नई पहचान बनने जा रहा है.

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बुलेट ट्रेन का नया एयरोडायनामिक डिजाइन और खूबियां

रेल मंत्रालय ने अपने हेड ऑफिस के गेट पर बुलेट ट्रेन की जो कॉन्सेप्ट फोटो लगाई है. वो बेहद खास है. इस तस्वीर में बुलेट ट्रेन का लुक पूरी तरह से एयरोडायनामिक है. आसान भाषा में कहें तो इसकी बनावट हवा के दबाव को चीरते हुए आगे बढ़ने के लिए तैयार की गई है. जब कोई ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती है, तो हवा का प्रतिरोध सबसे बड़ी रुकावट बनता है. 

इस खास डिजाइन की वजह से ट्रेन न सिर्फ कम बिजली की खपत करेगी, बल्कि तेज रफ्तार के दौरान ट्रेन के भीतर बैठे यात्रियों को झटके या तेज आवाज का अहसास भी नहीं होगा. इसका अगला हिस्सा एक लंबी नाक की तरह दिखता है, जो इसे जापान की मशहूर शिकानसेन ट्रेनों जैसा लुक देता है.

शुरुआती चरण के लिए भारत सरकार जापान से शिकानसेन E5 सीरीज की ट्रेनें मंगवा रही है. ये ट्रेनें अपनी सुरक्षा, समय की पाबंदी और बेहतरीन तकनीक के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती हैं. जापान में पिछले कई दशकों से ये ट्रेनें चल रही हैं और आज तक वहां एक भी बड़ा हादसा नहीं हुआ है.

भारत की भौगोलिक स्थिति और मौसम को ध्यान में रखते हुए इन जापानी ट्रेनों में कुछ जरूरी बदलाव भी किए जा रहे हैं. मकसद है कि ये भारत की भीषण गर्मी और धूल भरे माहौल में भी बिना किसी रुकावट के पूरी क्षमता से चल सकें.

बेंगलुरु में तैयार हो रही स्वदेशी B28 सीरीज

ऐसा नहीं है कि बुलेट ट्रेन पूरी तरह से जापानी आयात पर निर्भर है. भारत अपनी खुद की स्वदेशी बुलेट ट्रेन बनाने के काम में भी जुट गया है. बेंगलुरु की बीईएमएल लिमिटेड (BEML) फैक्ट्री में भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का निर्माण काम चल रहा है. इस मेक इन इंडिया ट्रेन कोे 'B28 सीरीज' का नाम दिया गया है. ये भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान में एक मील का पत्थर माना जा रहा है.

रेल मंत्रालय के रोडमैप के मुताबिक, इस स्वदेशी बुलेट ट्रेन का पहला प्रोटोटाइप साल 2026-2027 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है. इसका मतलब यह है कि जब तक मुंबई-अहमदाबाद ट्रैक पूरी तरह से चालू होगा, तब तक भारत के पास अपनी खुद की तकनीक से बनी हाई-स्पीड ट्रेन भी परीक्षण के लिए तैयार होगी.

वंदे भारत एक्सप्रेस की सफलता के बाद भारतीय इंजीनियरों का हौसला बढ़ा है और अब वे 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेनों को देश में ही डिजाइन और विकसित करने की क्षमता हासिल कर रहे हैं. इससे आने वाले समय में बुलेट ट्रेन के विस्तार की लागत काफी कम हो जाएगी.

कहां तक पहुंचा काम? गुजरात और महाराष्ट्र का ग्राउंड रिपोर्ट कार्ड

इस 508 किलोमीटर लंबे पूरे रूट के काम को दो हिस्सों में देखा जा सकता है. गुजरात के हिस्से में आने वाले लगभग 352 किलोमीटर के रूट पर काम की रफ्तार बेहद शानदार रही है. आणंद, सूरत, वडोदरा और साबरमती जैसे प्रमुख स्टेशनों के सिविल स्ट्रक्चर का काम लगभग पूरा हो चुका है. नदियों पर बनने वाले विशेष पुलों का कंस्ट्रशन भी पूरा कर लिया गया है. 

रेल मंत्रालय के अनुसार, गुजरात के सूरत से बिलिमोरा के बीच का पहला सेक्शन सबसे पहले शुरू होने की उम्मीद है, जिसका ट्रायल रन जल्द ही देखने को मिल सकता है.

दूसरी तरफ महाराष्ट्र का हिस्सा, जो लगभग 156 किलोमीटर का है, शुरुआती सालों में राजनीतिक कारणों और भूमि अधिग्रहण की समस्याओं की वजह से काफी पिछड़ गया था. बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में बनने वाले अंडरग्राउंड स्टेशन और पालघर के इलाकों में जमीन मिलने में काफी देरी हुई.

लेकिन अब महाराष्ट्र में भी सौ फीसदी भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है. मुंबई से ठाणे के बीच समुद्र के नीचे बनने वाली देश की पहली 7 किलोमीटर लंबी अंडरवाटर टनल का काम भी शुरू हो चुका है. कुल मिलाकर, दोनों राज्यों को मिलाकर अब तक 60% से ज्यादा फिजिकल प्रोग्रेस हासिल कर ली गई है.

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट एक नजर में

आगे बढ़ने से पहले जरा भारत के इस पहले बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की खूबियों को इस इंफो ग्राफिक के जरिए समझने की कोशिश करते हैं,

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट एक नजर में

कुल लंबाई 508 किलोमीटर (गुजरात: 352 किमी, महाराष्ट्र: 156 किमी, दादरा और नगर हवेली: 4 किमी)
प्रस्तावित स्टेशन 12 स्टेशन (मुंबई बीकेसी, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती)
अधिकतम रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटा (ऑपरेशनल स्पीड)
कुल प्रगति 60% से अधिक काम पूरा (2026 तक के आंकड़े)
विदेशी सहयोग जापान की शिकानसेन E5 सीरीज तकनीक
स्वदेशी पहल BEML बेंगलुरु द्वारा B28 सीरीज का निर्माण जारी
विशेष आकर्षण मुंबई-ठाणे के बीच 7 किलोमीटर की अंडरवाटर टनल

Note: AI की मदद से तैयार इंफो ग्राफिक्स, सोर्स: रेल मंत्रालय

अर्थव्यवस्था और समाज पर क्या असर पड़ेगा?

नीति आयोग (NITI Aayog) और बुनियादी ढांचा विशेषज्ञों की कई रिपोर्टों में यह साफ कहा गया है कि हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर सिर्फ परिवहन का साधन नहीं होते, बल्कि वे पूरे क्षेत्र की आर्थिक किस्मत बदल देते हैं. जब मुंबई और अहमदाबाद जैसी दो बड़ी आर्थिक ताकतें आपस में जुड़ेंगी, तो व्यापार, रियल एस्टेट और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. 

छोटे शहरों जैसे वापी, बिलिमोरा और भरूच के लोगों के लिए मुंबई या अहमदाबाद जाकर काम करना और शाम को वापस लौट आना मुमकिन हो जाएगा. इससे बड़े शहरों पर आबादी का दबाव भी कम होगा.

शॉर्ट टर्म में इस प्रोजेक्ट ने निर्माण क्षेत्र में हजारों कुशल और अकुशल मजदूरों को रोजगार दिया है. स्टील, सीमेंट और भारी मशीनरी उद्योगों को इससे बड़ा बूस्ट मिला है. 

वहीं लॉन्ग टर्म में, यह भारत के लॉजिस्टिक्स और बिजनेस ट्रैवल को पूरी तरह बदल देगा. जो लोग समय बचाने के लिए हवाई यात्रा करते हैं, उन्हें एयरपोर्ट की सुरक्षा जांच और शहर से दूर कनेक्टिविटी की तुलना में बुलेट ट्रेन का विकल्प ज्यादा बेहतर और समय बचाने वाला लगेगा. इसके अलावा, बिजली से चलने के कारण यह परिवहन का एक बेहद पर्यावरण अनुकूल माध्यम भी साबित होगा.

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आधुनिक भारत की नई लाइफलाइन

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना महज एक ट्रेन चलाने का प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह बदलते और आधुनिक होते भारत की एक बड़ी तस्वीर है. तमाम अड़चनों, बहसों और चुनौतियों को पीछे छोड़कर जब यह ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी, तो यह भारतीय इंजीनियरिंग के एक नए युग की शुरुआत होगी.

60 फीसदी से ज्यादा काम का पूरा होना और देश के भीतर ही स्वदेशी बुलेट ट्रेन का प्रोटोटाइप तैयार करना यह दिखाता है कि भारत अब बड़े सपने देखने और उन्हें तय समय में सच करने का हुनर सीख चुका है.  

वीडियो: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पहली बुलेट ट्रेन शुरू करने की तारीख बता दी!

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