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165 रुपये के रसगुल्ले और तंबाकू की चोरी हुई, पुलिस ने गंभीरता से जांच की, अब FIR दर्ज करने वाले पर ही कार्रवाई

Madhya Pradesh News: 165 रुपये की चोरी के मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू की गई. इसकी जानकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक भी पहुंची. इसके बाद FIR दर्ज करने वाले अधिकारी को समन किया गया.

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FIR दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारी को समन किया गया. (सांकेतिक तस्वीर: इंडिया टुडे/सोशल मीडिया)
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अमृतांशी जोशी

मध्य प्रदेश पुलिस (MP Police) के पास चोरी का एक मामला आया. पूरे 165 रुपये के रसगुल्ले और तंबाकू के पैकेट की चोरी हुई थी. जबलपुर पुलिस ने FIR दर्ज कर अपनी जांच शुरू कर दी. चोरी की इस वारदात को सिहोरा पुलिस थाना क्षेत्र में अंजाम दिया गया था. हालांकि, अब FIR दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारियों को विभाग की ओर से समन किया गया है.

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स्थानीय पुलिस के मुताबिक, देवकरण विश्वाकर्मा और उनके बेटे आयुष विश्वकर्मा इलाके में एक बेकरी चलाते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि 24 अप्रैल को आशुतोष ठाकुर और संचित नाम के दो युवक उनकी बेकरी में आए. उन्होंने तंबाकू के पैकेट खरीदने का बहाना बनाया. लेकिन आशुतोष का ध्यान काउंटर पर रखे रसगुल्लों के एक पैकेट पर था.

आयुष की नींद पूरी नहीं हुई थी, लिहाजा उसका ध्यान ठीक से दुकान पर नहीं लग पा रहा था. आरोप है कि इसी बात का फायदा उठाते हुए आशुतोष ने चुपके से 125 रुपये की कीमत वाले रसगुल्ले के डिब्बे को अपनी जेब में डाल लिया. इस बीच, संचित दुकान के किनारे खड़े होकर निगरानी करता रहा. इसके बाद, आशुतोष ने ऑनलाइन पेमेंट करने का वादा करते हुए, 20-20 रुपये के दो तंबाकू के पाउच मांगे.

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FIR के अनुसार, जैसे ही उन्हें सामान मिला, वो और उनका साथी वहां से चला गया. आयुष को पता चला कि ऑनलाइन कोई पैसा ट्रांसफर नहीं हुआ है. आयुष को संदेह हुआ तो उन्होंने सीसीटीवी फुटेज की जांच की. इसमें साफ तौर पर आशुतोष को रसगुल्ले का पैकेट जेब में रखते हुए देखा गया. वीडियो में ये भी देखा गया कि घटना के बाद दोनों भाग रहे थे. वीडियो देखें-

विभाग की चिंता बढ़ गई

26 अप्रैल को दुकान के मालिक देवकरण पुलिस के पास पहुंचे और अपनी शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने पूरी गंभीरता के साथ दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया.

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जल्द ही इलाके में इस बात की चर्चा होने लगी. शुरू में ये एक छोटी-सी चोरी लग रही थी. लेकिन जैसे ही इसकी जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंची तो इससे विभाग की चिंता बढ़ गई. सिहोरा पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) और एफआईआर दर्ज करने वाले सहायक उप निरीक्षक (ASI) दोनों को स्पष्टीकरण के लिए बुलाया गया. उनसे कहा गया कि वो इतने कम पैसे वाले मामले में कानूनी कार्यवाही शुरू करने के फैसले को सही ठहराएं.

नियम बदल गए हैं

भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अनुसार, 5000 रुपये से कम मूल्य की वस्तुओं की चोरी को अब गैर-संज्ञेय अपराध की कैटेगरी में रखा गया है. इसका मतलब ये है कि पुलिस ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट या अदालत से पूर्व अनुमति के बिना एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती है. या गिरफ्तारी नहीं कर सकती है. ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करना हमेशा जरूरी नहीं होता. 

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अधिकारी को नए कानून की जानकारी नहीं थी

इंडिया टुडे ने FIR दर्ज करने वाले ASI मथुरा प्रसाद पौराणिक से संपर्क किया. बातचीत के दौरान, उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें BNS के तहत एफआईआर दर्ज करने के नियमों की जानकारी नहीं थी. उनके मुताबिक, भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत 100 रूपये से अधिक की राशि की चोरी को एफआईआर दर्ज करने के लिए पर्याप्त आधार माना जाता था. उस पुरानी गाइडलाइन के अनुसार काम करते हुए, उन्होंने 165 रुपये मूल्य की चोरी में आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया.

इंडिया टुडे ने इस मामले को लेकर जबलपुर जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) संपत उपाध्याय से भी बात की. उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है. SHO को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है. संबंधित थाने को इसी सप्ताह में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है. 

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