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'मेरी बेटी कोई सामान नहीं है... ', बेटी के तलाक पर पूरा परिवार झूमा, ढोल बजाकर मनाया जश्न

Meerut की प्रणिता की शादी 7 साल पहले मेजर गौरव अग्निहोत्री से हुई थी. आरोप है कि मेंटली, इमोशनली और फिजिकली टॉर्चर ने प्रणिता की जिंदगी को ससुराल में मुश्किल बना दिया. जिसके बाद मामला कोर्ट पंहुचा. प्रणिता के पिता ने कहा कि उनकी बेटी कोई सामान नहीं है. तलाक के बाद शादी जैसा जश्न मनाया.

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रिटायर्ड जज पिता ने बेटी के तलाक का मनाया जश्न.

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  • मेरठ के फैमिली कोर्ट ने 4 अप्रैल 2026 को प्रणिता शर्मा और मेजर गौरव अग्निहोत्री के तलाक को मंजूरी दी, जिसके बाद उनके परिवार ने तलाक का जश्न मनाया।
  • प्रणिता को मेंटली, इमोशनली और फिजिकली प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था, जिससे रिश्ते में तनाव बढ़ा और अंततः मामला कोर्ट तक पहुंचा।
  • तलाक के बाद प्रणिता ने खुद को मजबूत बनाने पर जोर दिया और इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभिन्न प्रतिक्रियाएँ आईं।

अगर परिवार साथ खड़ा हो तो किसी महिला के लिए शादी बंधन नहीं रह जाती. मेरठ का एक केस इसकी बानगी पेश करता है. मेरठ में एक कोर्ट के बाहर, तलाक मिलने के बाद महिला के घरवाले बेटी की आज़ादी का जश्न मना रहे हैं. फूलों की माला और ढोल-नगाड़े के साथ परिवार उनका स्वागत करता है. सभी सदस्यों ने एक जैसी टी शर्ट पहन रखी है. जिस पर लिखा है - ‘I Love my daughter. My Heart, My Soul.’

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आजतक से जुड़े उस्मान चौधरी की रिपोर्ट के मुताबिक मेरठ के शास्त्री नगर इलाके में रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपनी बेटी प्रणिता शर्मा के तलाक का जश्न खुशी के साथ मनाया. ठीक वैसे ही जैसे 7 साल पहले उनकी विदाई की थी. इस जश्न का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. 

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प्रणिता की शादी साल 2018 में शाहजहांपुर के रहने वाले मेजर गौरव अग्निहोत्री के साथ हुई थी. शादी के शुरू-शुरू में सब कुछ ठीक था. लेकिन फिर धीरे-धीरे रिश्ते में तनाव बढ़ने लगा. आरोप है कि मेंटली, इमोशनली और फिजिकली टॉर्चर ने प्रणिता की जिंदगी को ससुराल में मुश्किल बना दिया. जिसके बाद मामला लीगल हो गया. कोर्ट में लंबी सुनवाई चली. जब रिश्ते में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं दिखी तो 4 अप्रैल 2026 को मेरठ के फैमिली कोर्ट ने दोनों के तलाक को मंजूरी दे दी. इस शादी से प्रणिता का एक बेटा भी है. 

प्रणिता के पिता हमेशा उनके साथ खड़े रहे. रिपोर्ट के मुताबिक़, ज्ञानेंद्र शर्मा ने बताया कि ‘उनकी बेटी कोई सामान नहीं है. अगर वो शादी में खुश नहीं है, तो उसे वहां जबरदस्ती नहीं रखा जाना चाहिए.’ छह साल तक उसने बहुत कुछ सहा, लेकिन अब वो आजाद है. उनका कहना है कि वो वह अपनी बेटी को दुखी नहीं देख सकते थे. जब वह मेंटली और इमोशनली टूट चुकी थी, तब उनका कर्तव्य था कि उसे सहारा दें.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रणिता ज्यूडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर हैं. उन्होंने साइकोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएट किया है. तलाक के बाद प्रणिता ने कहा कि ‘सबसे जरूरी है, खुद को मजबूत बनाना. अगर आप किसी भी तरह की प्रताड़ना झेल रही हैं, तो चुप न रहें.' उन्होंने समाज से अपील की कि बेटी की शादी को लेकर जल्दी मत करो. 

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इस जश्न का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ. लोगों ने अलग-अलग रिएक्शन भी दिए. कुछ यूज़र्स ने प्रणिता का सपोर्ट किया और कहा कि समाज में ऐसी लड़कियों की ज़रूरत है जो खुद को आगे रखती हैं. वहीं कुछ लोगों ने उन्हें ट्रोल किया. लिखा फेमिनिस्ट का ये पाखंड हास्यास्पद है क्योंकि यदि उन्होंने आपसी सहमति से तलाक का विकल्प चुना होता तो एक वर्ष के भीतर तलाक मिल जाता. लेकिन उन्होंने दूल्हे के परिवार को परेशान करना चुना. आपकी इसपर क्या राय है? 

वीडियो: तारीख: कहानी भारत के पहले तलाक की जिसने महिलाओं को उनका अधिकार दिलाया

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