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महाराष्ट्र में बीजेपी से गठबंधन के बाद कांग्रेस ने जिन पार्षदों को निलंबित किया वो बीजेपी के हो लिए

गठबंधन की बदौलत बीजेपी की प्रत्याशी तेजश्री करंजुले ने नगराध्यक्ष पद का चुनाव जीता था. बीजेपी की कांग्रेस और AIMIM के साथ इस गठबंधन की पूरे देश में चर्चा हो रही है.

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बीजेपी की विकास की राजनीति से प्रभावित होकर ये कदम उठाया है. (फोटो- आजतक)

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी और कांग्रेस ने साथ आकर चुनाव जीता. खबर सामने आते ही परिषद में राजनीतिक समीकरण एक बार फिर से पूरी तरह बदल गए हैं. इस गठबंधन के चलते कांग्रेस उच्च कमान ने अपने 12 पार्षदों को पार्टी से निलंबित कर दिया था. गुरुवार, 8 जनवरी को एक और बड़ा ट्विस्ट आया. निलंबित हुए ये सभी 12 कांग्रेस पार्षद औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए.

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बीजेपी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने देर रात इसकी घोषणा की. इन पार्षदों ने कहा कि उन्होंने जनता से विकास का वादा किया था. और बीजेपी की विकास की राजनीति से प्रभावित होकर ये कदम उठाया है. रवींद्र चव्हाण ने कहा,

"ये फैसला विकास के लिए है. इन पार्षदों ने कमल को हाथ में लिया है और बीजेपी परिवार का हिस्सा बनकर अंबरनाथ के विकास में योगदान देंगे."

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रवींद्र चव्हाण का पोस्ट.

इंडिया टुडे से जुड़े प्रतीक चक्रवर्ती की रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में हुए नगर परिषद चुनावों में बीजेपी को 16 सीटें, कांग्रेस को 12 सीटें और अजित पवार गुट की एनसीपी को 4 सीटें मिलीं. कुछ निर्दलीय भी जीते. अकेले बीजेपी के पास बहुमत नहीं था, इसलिए नगराध्यक्ष (मेयर) पद के लिए स्थानीय स्तर पर उन्होंने कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन किया.

इस गठबंधन के कुल 32 पार्षदों (बीजेपी 16 + कांग्रेस 12 + एनसीपी 4) का समर्थन होने से स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ. गठबंधन की बदौलत बीजेपी की प्रत्याशी तेजश्री करंजुले ने नगराध्यक्ष पद जीत लिया. इससे शिवसेना का शासन समाप्त हो गया, जो पिछले कई वर्षों से अंबरनाथ पर काबिज था.

शिवसेना में इस पर तीखी नाराजगी है. शिंदे गुट के विधायक बालाजी किनिकर ने इसे ‘अपवित्र गठबंधन’ (unholy alliance) करार दिया. उन्होंने कहा,

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"जो पार्टी कांग्रेस मुक्त भारत की बात करती है, वही आज कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता चला रही है. ये शिवसेना के साथ विश्वासघात है."

इस गठबंधन से बीजेपी का स्थानीय स्तर पर आधार और मजबूत हुआ है. जबकि कांग्रेस को स्थानीय स्तर पर एक बड़ा झटका लगा है. दूसरी ओर, शिवसेना (शिंदे गुट) के लिए ये लगातार दूसरा झटका है. पहले गठबंधन से बाहर होना और अब कांग्रेस पार्षदों का बीजेपी में चले जाना,  इससे महायुति के भीतर भी तनाव बढ़ गया है.

वीडियो: महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव के पहले बीजेपी ने अकेले कितनी सीटें हासिल की?

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