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सनातन खत्म करने की बात पर मद्रास हाईकोर्ट सख्त, बोला- ये तो नरसंहार जैसा है

High Court on Udhayanidhi Stalin: कोर्ट ने भाजपा आईटी विभाग के हेड अमित मालवीय पर की गई FIR रद्द कर दी. कहा कि जो लोग नफरत फैलाने वाले भाषण देते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती. जो लोग प्रतिक्रिया देते हैं, उन्हें आपराधिक कार्रवाई का सामना करना पड़ता है.

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मद्रास हाई कोर्ट ने उदयनिधि (बाएं) के भाषण को हेट स्पीच माना. (Photo: ITG/File)

मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु के उप मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की सनातन धर्म पर की गई टिप्पणी को 'नरसंहार' जैसा माना है. कोर्ट ने इसे हेट स्पीच बताते हुए कहा कि जो लोग नफरत भरा भाषण देते हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती. लेकिन जो लोग इस पर रिएक्ट करते हैं, उनके खिलाफ कानूनी हथकंडे अपनाए जाते हैं.

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इसी के साथ कोर्ट ने भाजपा आईटी विभाग के हेड अमित मालवीय पर की गई FIR रद्द कर दी. उन्होंने उदयनिधि का भाषण शेयर करते हुए उस पर सवाल उठाए थे. मालूम हो कि पूरा मामला उदयनिधि स्टालिन के सितंबर 2023 में दिए गए एक भाषण से जुड़ा है. उदयनिधि तमिलनाडु प्रोग्रेसिव राइटर्स आर्टिस्ट्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित "सनातन उन्मूलन सम्मेलन" नाम के कार्यक्रम में बोल रहे थे.

उदयनिधि ने क्या कहा था?

अपने भाषण में उदयनिधि ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और COVID-19 जैसी बीमारियों से की थी. उन्होंने इन बीमारियों की तरह सनातन धर्म को भी खत्म करने की मांग की थी. उदयनिधि ने कहा था,

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सनातन धर्म का विरोध या मुकाबला नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे खत्म किया जाना चाहिए.

भाजपा नेता और पार्टी के आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने उनके भाषण का यह वीडियो शेयर किया था. साथ ही सवाल उठाया था कि क्या यह सनातन धर्म को मानने वाली भारत की 80% आबादी के नरसंहार का आह्वान नहीं है. इस पर तमिलनाडु पुलिस ने मालवीय के खिलाफ एक FIR दर्ज की थी. यह आरोप लगाते हुए कि उन्होंने मंत्री के भाषण को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और समूहों के बीच दुश्मनी भड़काने की कोशिश की. अमित मालवीय के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153A (हेट स्पीच) और 505 (सार्वजनिक नफरत को बढ़ावा देने वाले बयान) के तहत मामला दर्ज किया था.

हाई कोर्ट में की थी अपील

अमित मालवीय ने इस FIR के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट में अपील की थी. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार मद्रास हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए उदयनिधि के भाषण को नरसंहार के आह्वान से जुड़ा हुआ माना. हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने मामले पर कहा,

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अगर कहा जा रहा है कि सनातन धर्म मानने वाले लोगों का समूह नहीं होना चाहिए, तो इसके लिए सही शब्द 'नरसंहार' है. अगर सनातन धर्म एक धर्म है तो यह 'धार्मिक नरसंहार' है. इसका मतलब है कि लोगों को किसी भी तरीके से या अलग-अलग तरीकों से खत्म करना. इसमें पर्यावरण का विनाश, फैक्ट का विनाश या संस्कृति का विनाश (सांस्कृतिक नरसंहार) हो सकता है. इसलिए, तमिल में कहा गया वाक्य 'सनातन ओझिप्पु' का साफ मतलब नरसंहार या संस्कृति विनाश होगा.

"ओझिप्पू" शब्द पर विवाद

कोर्ट ने कहा कि पूरी मामला स्टालिन द्वारा भाषण में इस्तेमाल किए गए "ओझिप्पू" शब्द से जुड़ा है. राज्य के अनुसार, इस शब्द का मतलब "खत्म करना" होता है. कोर्ट ने शब्द के सामान्य अर्थ और उसके पर्यायवाची शब्दों की भी जांच की. इसके बाद कोर्ट ने पाया कि इसका मतलब होता है, खत्म करना, मिटाना, नष्ट करना, तबाह करना या सफाया करना. कोर्ट ने इसी अर्थ को किसी धर्म पर लागू करते हुए तर्क दिया कि ऐसी भाषा स्वाभाविक रूप से सामान्य विचार से कहीं आगे तक जाती है.

कोर्ट ने अपने फैसले में आगे टिप्पणी करते हुए कहा,

अगर सनातन धर्म नहीं होना चाहिए, तो सनातन धर्म को मानने वाले लोग भी नहीं होने चाहिए. इन परिस्थितियों में मंत्री के भाषण में छिपे हुए अर्थ पर सवाल उठाने वाली पोस्ट को हेट स्पीच नहीं माना जा सकता. याचिकाकर्ता (अमित मालवीय) की पोस्ट एक सवाल के रूप में थी और इसमें हिंसा या आंदोलन का आह्वान नहीं किया गया था. याचिकाकर्ता ने किसी भी व्यक्ति से मंत्री या उनकी पार्टी के खिलाफ कोई आंदोलन शुरू करने के लिए नहीं कहा है.

कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया कि अमित मालवीय की पोस्ट ने हिंदू बहुमत को अन्य समूहों के खिलाफ भड़काया. कोर्ट ने कहा कि अगर इस तर्क को मान लिया जाता है, तो इसका मतलब यह है कि मंत्री (उदयनिधि) 80% आबादी के खिलाफ 20% आबादी को भड़का रहे हैं. इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि जब मंत्री हेट स्पीच देते हैं तो याचिकाकर्ता द्वारा उसका विरोध करने को अपराध नहीं माना जा सकता.

कोर्ट ने कहा कि IPC की धारा 153A और 505 के तहत सजा के लिए आपराधिक इरादा और कम से कम दो पहचाने गए समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना ज़रूरी है. कोर्ट के मुताबिक मौजूदा मामले में, याचिकाकर्ता ने किसी भी दो समुदायों का ज़िक्र नहीं किया है. उनका कोई भी आपराधिक इरादा नजर नहीं आता है.

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गांधी, बुद्ध के बयानों का हवाला

हालांकि राज्य सरकार ने कई ऐतिहासिक और आध्यात्मिक हस्तियों का हवाला देते हुए उदयनिधि को टिप्पणी को सही ठहराया था. सरकार ने कहा था कि गांधी, बुद्ध, कामराज, वल्लालार जैसे लोग भी सनातन धर्म की आलोचना करते रहे हैं. इस पर कोर्ट ने इन हस्तियों के कथनों का जिक्र करते हुए कहा कि पेरियार को छोड़कर, उनमें से किसी ने भी सनातन धर्म के खिलाफ कुछ नहीं कहा.

इसके बाद कोर्ट ने इस पर चिंता जताई कि जो लोग नफरत फैलाने वाले भाषण देते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती. जो लोग प्रतिक्रिया देते हैं, उन्हें आपराधिक कार्रवाई का सामना करना पड़ता है. कोर्ट ने मामले में जांच अधिकारी की भूमिका की भी आलोचना की. कहा कि उन्होंने अपने जवाबी हलफनामे में राजनीति शामिल थी. कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को गैर-राजनीतिक होना चाहिए और किसी राजनीतिक दल का पक्ष लेना निंदनीय है. इसके बाद कोर्ट ने अमित मालवीय की याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी.

वीडियो: सनातन को गाली देने के मामले में उदयनिधि स्टालिन को सुप्रीम कोर्ट ने डांट लगा दी

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