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पेड़ से गिरकर घायल हुए, अस्पताल गए इलाज कराने तो वहां लिफ्ट गिर गई, दबने से मौत

Rewa Hospital Lift Death: मैहर जिले के रहने वाले सुरेश सेन इलाज कराने के लिए रीवा के एक प्राइवेट अस्पताल आए थे. पेड़ से गिरने की वजह से वह घायल हो गए थे. इलाज के लिए अस्पताल आए, तो लिफ्ट हादसे में उनकी मौत हो गई.

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मरीज की मौत के बाद अस्पताल के बाहर लोग इकट्ठा हो गए. (ITG)

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  • 30 अगस्त की रात रीवा के एक निजी अस्पताल की लिफ्ट गिरने से 50 वर्षीय सुरेश सेन की मौत हो गई, जो इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थे और लिफ्ट गिरने पर गर्दन फंसने से उनकी मृत्यु हुई।
  • सुरेश सेन के परिवार का आरोप है कि दिन में लिफ्ट एक बार पहले ही खराब हो गई थी और मरीज फंसे थे, जिससे लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ, जिसके बाद अस्पताल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए।
  • मध्यप्रदेश सरकार ने इस घटना की जांच के लिए 5 सदस्यीय कमेटी बनाई है, मुख्यमंत्री ने 2 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया और परिवार 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग पर अड़े हैं।
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हरिओम सिंह

मध्यप्रदेश के रीवा जिले के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में 30 अगस्त की रात लिफ्ट गिरने से एक मरीज की दर्दनाक मौत हो गई. मृतक का नाम सुरेश सेन है, जो मैहर जिले के लालपुर अमरपाटन के रहने वाले थे. 50 साल के सुरेश पेड़ से गिरकर घायल हो गए थे. उन्हें इलाज के लिए रीवा के एक निजी अस्पताल - नेशनल हॉस्पिटल - में लाया गया. अस्पताल की लिफ्ट से ऊपर की मंजिल पर ले जाते समय लिफ्ट अचानक गिर गई. लिफ्ट में गर्दन फंसने के कारण सुरेश की मौत हो गई.

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सुरेश सेन के साथ हादसा देखकर परिवार के लोग घबरा गए. चीखने-चिल्लाने लगे. हंगामा और अफरा-तफरी मचने लगी. डॉक्टरों ने सुरेश सेन को मृत घोषित कर दिया. इंडिया टुडे से जुड़े हरिओम सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरेश के परिवार ने नेशनल हॉस्पिटल के मैनेजमेंट पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया.

अस्पताल के खिलाफ प्रदर्शन-नारेबाजी

काफी देर तक हंगामा कटा. अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया गया. परिजनों ने जमकर नारेबाजी की. घटना की जानकारी पुलिस को दी गई. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात को काबू में किया. परिवारवालों को समझाया कि मामले की जांच की जा रही है.

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परिवारवालों का आरोप है कि दिन में एक बार लिफ्ट खराब हो गई थी और एक मरीज फंस गया था. अगर समय रहते लिफ्ट ठीक कर दी गई होती, तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता और सुरेश की जान बच सकती थी.

मृतक का परिवार हॉस्पिटल के सामने विरोध प्रदर्शन करता रहा. वे देर शाम तक 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग पर अड़े रहे. हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने 16 लाख रुपये मुआवजा देने की बात कही. रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी पीड़ित परिवार को 2 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया.

कांग्रेस ने घेरा

विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राज्य सरकार पर निशाना साधा. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल की आलोचना की. जीतू पटवारी ने फेसबुक पर लिखा,

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"मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री बनाम उपमुख्यमंत्री के रीवा में एक निजी अस्पताल में लिफ्ट में फंसकर एक निर्दोष नागरिक की जान चली गई!
इस 'सरकारी हत्या' का जवाब कौन देगा?"

jitu patwari
जीतू पटवारी का पोस्ट. (Facebook)

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रीवा में जच्चा-बच्चा की मौत

कांग्रेस ने प्राइवेट हॉस्पिटल में सुरेश सेन की मौत को 'सरकारी हत्या' बताया. इससे पहले 26 अगस्त को रीवा के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एक गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की मौत हो गई थी. पीड़ित परिवार ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया था. कांग्रेस ने इस पर भी सरकार को घेरा था. इस मामले की जांच के लिए सरकार ने 5 सदस्यीय कमेटी गठित की है.

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