स्कूल के क्लासरूम में गए तो, लेकिन अपने मतलब की बात खुद ड्रोन बनाकर ही सीखी. 2020 के कोविड लॉकडाउन में नमन पुष्प की उम्र 15 साल थी. ये वो समय था, जब हर कोई घर में बंद था. बाहर आने-जाने पर कड़ी पाबंदी. ये नमन का बचपन ही था. बचपन में बच्चों को शौक भी होते हैं. नमन को भी एक बड़ा शौक था- ड्रोन बनाने का. उन्होंने लॉकडाउन में ही तय कर लिया कि लाइफ में कुछ करना है, तो ड्रोन टेक्नोलॉजी में ही करना है.
15 साल की उम्र में ड्रोन के जुनून में यूनिवर्सिटी छोड़ी, 352 करोड़ की कंपनी खड़ी कर दी
Airbound के फाउंडर Naman Pushp का जन्म मुंबई में हुआ. उनके बचपन का कुछ हिस्सा हैदराबाद और मलेशिया में बीता. नमन मलेशिया से वापस भारत आ गए. पांचवी और छठी क्लास से ही उन्होंने ड्रोन बनाने शुरू कर दिए. अब इस लड़के ने कमाल कर दिया है.

नमन पुष्प लॉकडाउन में ही कुछ शुरू करने की सोच रहे थे. ड्रोन का जुनून था, तो उस पर ही एक प्रोजेक्ट शुरू कर दिया. प्रोजेक्ट का नाम 'ओपन ड्रोन' रखा. नमन इसे एक हैकाथॉन में ले गए. वहां उन्हें 500 डॉलर का इनाम मिला. उन्होंने इनाम में मिली रकम को वापस इसी प्रोजेक्ट में लगाया और उससे अपना पहला सीरियस प्रोटोटाइप तैयार किया.
352 करोड़ की फंडिंगये ड्रोन प्रोटोटाइप आज भी नमन पुष्प के एयरबाउंड ऑफिस में टंगा है. नमन की उम्र अब 21 साल है. वे बेंगलुरु बेस्ड एयरपोस्पेस स्टार्टअप Airbound के फाउंडर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) हैं. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में उन्हें Greenoaks की अगुआई वाले Series A में 37 मिलियन डॉलर (लगभग 352 करोड़ रुपये) की फंडिंग मिली है. इससे कंपनी की कुल फंडिंग करीब 50 मिलियन डॉलर (लगभग 475 करोड़ रुपये) पहुंच गई.
लॉकडाउन से 352 करोड़ रुपये की फंडिंग तक के सफर में नमन पुष्प ने अपनी इंजीनियरिंग प्रॉब्लम को ही अपना बिजनेस बना दिया. यह एयरस्पेस से जुड़ी बड़ी प्रॉब्लम है, जिसका तोड़ निकालने में नमन पूरी तरह जुटे हैं. इससे पहले उनकी लाइफ और एजुकेशन को समझ लेते हैं, ताकि उनकी प्रॉब्लम सॉल्विंग कैपेसिटी का पता चल सके.
नमन पुष्प की लाइफनमन पुष्प का जन्म मुंबई में हुआ. उनके बचपन का कुछ हिस्सा हैदराबाद और मलेशिया में बीता. नमन मलेशिया से वापस भारत आ गए. पांचवी और छठी क्लास से ही उन्होंने ड्रोन बनाने शुरू कर दिए. वे रोबोटिक्स कंपटीशन और इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स में भी हिस्सा लेते थे.
मुंबई के धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल से उन्होंने स्कूलिंग पूरी की. हायर स्टडीज के लिए अमेरिका जाने का प्लान बना. कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी में एडमिशन पक्का हो गया, लेकिन नमन वहां नहीं गए. अमेरिकी यूनिवर्सिटी छोड़ दी, और अपने ड्रोन वाले काम पर लग गए.
प्रॉब्लम को ही बिजनेस बनायाअब बात उस एयरस्पेस प्रॉब्लम की, जिसका तोड़ नमन निकालने में लगे हैं. अब तक जो एयरक्राफ्ट चलते आ रहे हैं, उनमें बड़ी दिक्कत ये है कि उनकी ज्यादातर उनका अपना ही वजन ढोने में खर्च हो जाती है. फिर एयरक्राफ्ट पर लदे सामान को ढोने के लिए भी एनर्जी चाहिए. इस वजह से लागत के मामले में रोड ट्रांसपोर्ट के मुकाबले ड्रोन डिलीवरी का मुकाबला करना मुश्किल हो जाता है. एयरबाउंड इसे पलटना चाहती है.
नमन पुष्प का प्लानएयरबाउंड के फाउंडर नमन पुष्प ड्रोन डिलीवरी को आम लॉजिस्टिक्स का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहे हैं. कंपनी का मौजूदा TRT ड्रोन करीब 1.5 किलो का है और लगभग 1 किलो सामान ले जा सकता है. यह पहले सीधे ऊपर उड़ान भरता है और फिर नॉर्मल हवाई उड़ान में बदल जाता है. कंपनी अब 5 किलो तक सामान ले जाने वाला मॉडल बना रही है और बड़े स्तर पर प्रोडक्शन की तैयारी कर रही है.
एयरबाउंड ने बेंगलुरु और गुंटूर में 13,000 से ज्यादा ऑटोनॉमस फ्लाइट पूरी की हैं. इनमें नारायणा हेल्थ के लिए 1,000 से ज्यादा उड़ानें शामिल हैं. ड्रोन अब क्लिनिक से अस्पताल तक ब्लड सैंपल पहुंचाते हैं, जिससे सड़क के रास्ते होने वाली आवाजाही कम हुई है.
बेंगलुरु में नारायणा हेल्थ के नए बनशंकरी अस्पताल को बिना डायग्नोस्टिक लैब के डिजाइन किया गया था. अस्पताल अलग-अलग सेंटर्स के बीच मेडिकल सैंपल लाने-ले जाने के लिए एयरबाउंड के ड्रोन पर निर्भर रहा.
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आंध्र प्रदेश में कंपनी अमरावती, विजयवाड़ा और गुंटूर को जोड़ने की योजना बना रही है. उसका टारगेट भविष्य में रोजाना 10,000 उड़ानें करना है. अब कंपनी का सबसे बड़ा लक्ष्य हल्के कार्बन-फाइबर ड्रोन का बड़े पैमाने पर निर्माण करना है.
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