एक सरकारी अफसर. पेपर लीक. करोड़ों रुपये की कथित डील. और परीक्षा से एक दिन पहले कैंडिडेट्स को रिजॉर्ट में ले जाकर उत्तर रटवाने का आरोप. कर्नाटक में KPSC यानी कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन की वेटरनरी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में जांच आगे बढ़ने के साथ एक बड़े भर्ती घोटाले के आरोप सामने आ रहे हैं.
14 टॉपर्स से 50 लाख लिए, रिजॉर्ट में सवाल रटवाए, CID जांच में सब खुला
KPSC Paper leak: कर्नाटक में KPSC यानी कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन की वेटरनरी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में एक बड़े भर्ती घोटाले का मामला सामने आया है. जांच में अब तक 11 कैंडिडेट्स से जुड़े कुल 1.52 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन का पता चला है. जानिए पूरा मामला.

आरोप है कि इस परीक्षा का पेपर सिर्फ लीक ही नहीं हुआ, बल्कि चुनिंदा कैंडिडेट्स को परीक्षा से पहले लीक हुए सवालों के जवाब भी याद करवाए गए. इसके लिए कथित तौर पर करोड़ों रुपए का लेन-देन हुआ. जांच एजेंसियों को करीब 20 कैंडिडेट्स के इस नेटवर्क से जुड़े होने का शक है. वहीं, जांच का दायरा अब KPSC की दूसरी भर्ती परीक्षाओं तक भी पहुंच गया है.
जनवरी 2026 में हुई इस परीक्षा में करीब 1,400 कैंडिडेट शामिल हुए थे. कुल 400 पदों पर भर्ती होनी थी. लेकिन अब जांच एजेंसियों के दावों ने एग्जाम की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
इंडियन एक्सप्रेस में जॉनसन टीए की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने एग्जाम में टॉप रैंक हासिल करने वाले 14 कैंडिडेट्स के उत्तरों का एनालिसिस किया. इसमें उनके सही और गलत जवाबों के पैटर्न में असामान्य समानता पाई गई. जांच एजेंसियों ने Statistical Probability Test का इस्तेमाल किया. इस एनालिसिस से कथित तौर पर ऐसे संकेत मिले कि इन 14 कैंडिडेट्स को एग्जाम से पहले सवालों की जानकारी मिली थी.
इस मामले में सबसे गंभीर आरोप परीक्षा से एक दिन पहले की घटनाओं को लेकर हैं. ED (प्रवर्तन निदेशालय) की जांच के मुताबिक, परीक्षा से एक दिन पहले लीक हुआ एग्जाम पेपर कथित बिचौलिये बसवराज कन्नाले तक पहुंचा था. इसके बाद कुछ चुनिंदा कैंडिडेट्स को बेंगलुरु के बाहरी इलाके में मौजूद एक रिजॉर्ट में ले जाया गया. आरोप है कि वहां उन्हें लीक हुए पेपर के सवालों के सही जवाब दिए गए और उन्हें याद करवाया गया.
CID की जांच में भी कुछ कैंडिडेट्स को बेंगलुरु के बाहरी इलाके में मौजूद विला और रिजॉर्ट में ले जाने की बात सामने आई है. एजेंसी को शक है कि वहां कैंडिडेट्स को पहले से करीब 60 से 80 सवाल दिए गए और उन्हें सॉल्व करने की प्रैक्टिस कराई गई.
यानी जांच एजेंसियों के आरोपों के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क में सिर्फ पेपर हासिल करना ही शामिल नहीं था, बल्कि परीक्षा से पहले कैंडिडेट्स को उसकी तैयारी करवाने का इंतजाम भी किया गया था. इसके बाद अगले दिन उन्हें एग्जाम सेंटर्स तक पहुंचाया गया.
कितने पैसों का लेन-देन हुआ?अब बात उस रकम की, जिसके लिए कथित तौर पर पूरा खेल रचा गया. CID और ED की जांच में अब तक 11 कैंडिडेट्स से जुड़े कुल 1.52 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन का पता चला है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बैकलॉग कैटेगरी में पहले, दूसरे और तीसरे नंबर पर आए कैंडिडेट्स ने कथित तौर पर 50-50 लाख रुपये दिए थे.
वहीं, 84वीं रैंक पर आए एक कैंडिडेट से परीक्षा के बाद OMR शीट में कथित हेरफेर के लिए 30 लाख रुपये मांगे जाने का आरोप है. जांच में शुरुआत में प्रति कैंडिडेट करीब 80 लाख रुपये की मांग किए जाने की बात भी सामने आई है. ED के मुताबिक, कुछ कैंडिडेट्स से 30 से 40 लाख रुपये तक वसूले गए.
आरोपी कौन हैं?इस पूरे मामले की जांच के केंद्र में दो नाम हैं. पहला, ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और दूसरा, कथित बिचौलिया बसवराज कन्नाले. ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार 2016 बैच के IAS अधिकारी हैं. वो KPSC में कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन के पद पर तैनात थे. CID ने उन्हें 29 अगस्त को गिरफ्तार किया था. इसके बाद 18 सितंबर को ED ने भी उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
ED का आरोप है कि कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन के तौर पर गंगवार के पास एग्जाम पेपर को फाइनल करने, उसकी प्रिंटिंग और परीक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों की कस्टडी जैसी अहम जिम्मेदारियां थीं. एजेंसी को शक है कि इसी पद का इस्तेमाल करके एग्जाम पेपर को एग्जाम से पहले बाहर पहुंचाया गया.
दूसरे आरोपी बसवराज कन्नाले पर कैंडिडेट्स और पेपर लीक कराने वाले लोगों के बीच बिचौलिये की भूमिका निभाने का आरोप है. CID के मुताबिक, कन्नाले ने कैंडिडेट्स से परीक्षा में पेपर दिलाने के नाम पर पैसे लिए थे. ED ने उन्हें सितंबर में गिरफ्तार किया. 29 सितंबर को अदालत ने उन्हें 14 दिन की ED कस्टडी में भेज दिया.
ED अब इस बात की भी जांच कर रही है कि कथित तौर पर पेपर लीक से मिले पैसों को कहां और कैसे इस्तेमाल किया गया. एजेंसी के मुताबिक, रकम को अलग-अलग बैंक ट्रांजैक्शन, कैश पेमेंट और सोने के गहनों की खरीद के जरिए घुमाने की कोशिश की गई. इस पूरे मनी ट्रेल की जांच जारी है.
इस मामले में पेपर लीक के लिए पैसे देने के आरोपी सभी कैंडिडेट्स की अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि किस कैंडिडेट की भूमिका क्या थी. साथ ही यह भी तय किया जा रहा है कि किन कैंडिडेट्स को सरकारी गवाह यानी अप्रूवर बनाया जा सकता है और किनके खिलाफ आरोपी के तौर पर कार्रवाई की जाएगी. इस बीच, तीसरे नंबर पर आई एक महिला कैंडिडेट का मामला कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंच गया है. 29 साल की इस कैंडिडेट को हाईकोर्ट ने 13 अक्टूबर तक अंतरिम गिरफ्तारी से राहत दी है.
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KPSC की दूसरी भर्तियों में भी खेल हुआ?अब तक सामने आए आरोप सिर्फ वेटरनरी अफसर भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं हैं. ED की जांच में KPSC की दूसरी भर्तियों में भी शॉर्टलिस्टिंग और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने की आशंका सामने आई है.
ED के मुताबिक, एक KPSC अधिकारी के यहां से मिली कथित रफ डायरी में कुछ कैंडिडेट्स के नाम के सामने रकम लिखी हुई थी. एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि क्या अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में कैंडिडेट्स से पैसे लेकर उन्हें शॉर्टलिस्ट कराने या फाइनल चयन में मदद पहुंचाने की कोशिश की गई.
इसी सिलसिले में KPSC की सदस्य डॉ. शांता होसमानी की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है. एजेंसियां एक चयनित KAS कैंडिडेट और उनके बीच परीक्षा से पहले हुई 13 फोन कॉल्स की भी जांच कर रही हैं. KAS भर्ती प्रक्रिया भी विवादों के चलते प्रभावित हुई है.
जांच का दायरा तत्कालीन KPSC चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकर तक भी पहुंचा है. उनके खिलाफ वेटरनरी अफसर भर्ती मामले के अलावा उनकी बेटी की कथित अवैध भर्ती से जुड़े एक अलग मामले की भी जांच चल रही है.
इस पूरे मामले में 21 सितंबर को कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश दिया. कोर्ट ने KPSC से जुड़े कथित घोटालों की जांच के लिए SIT यानी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाने का निर्देश दिया.
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