कर्नाटक में बीजेपी से जुड़े एक बूथ लेवल एजेंट पर अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले वोटरों के नाम कटवाने की कोशिश करने का आरोप लगा है. कांग्रेस के बीएलए की शिकायत पर मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है. आरोप के मुताबिक, बीजेपी के BLA-1 टी. श्रीनिवास मोथकुर ने SIR की ड्राफ्ट लिस्ट से 7561 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बार-बार फॉर्म-7 भरा था. ये वो फॉर्म है, जो किसी अयोग्य मतदाता का नाम वोटर्स लिस्ट से हटाने के लिए भरा जाता है.
BJP एजेंट पर हजारों वोटर्स के नाम कटवाने के लिए बार-बार फॉर्म-7 भरने का आरोप, FIR दर्ज
कर्नाटक के बल्लारी में बीजेपी के बूथ लेवल एजेंट टी. श्रीनिवास मोथकुर पर आरोप है कि उन्होंने SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 7,561 नाम हटाने के लिए बार-बार Form-7 जमा करने की कोशिश की.

मामला बल्लारी सिटी विधानसभा क्षेत्र का है. यहां बीजेपी के बीएलए-1 हैं श्रीनिवास मोथकुर. सितंबर 2026 की बात है. मोथकुर ने दावा किया कि विधानसभा क्षेत्र के तकरीबन साढ़े 7 हजार से ज्यादा वोटर्स या तो अपने पते पर नहीं हैं या कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं. इसके बाद उन्होंने इन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए फॉर्म-7 भरने की बार-बार कोशिश की. लेकिन बीएलओ ने उनके कुछ ही फॉर्म स्वीकार किए. कई बीएलओ ने फॉर्म-7 लेने से इनकार कर दिया.
‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद मोथकुर ने बल्लारी सिटी कॉरपोरेशन को एक चिट्ठी लिखी. इसमें उन्होंने बताया कि बीएलओ ने जब उनके कई फॉर्म स्वीकार नहीं किए तो वो उसे सीधे ERO यानी चुनाव रजिस्ट्रेशन अधिकारी के पास ले गए. चुनाव अधिकारियों ने उसी दिन जवाब देते हुए कहा कि मोथकुर के ये दावे किसी डॉक्युमेंट या दूसरे सबूतों से साबित नहीं होते.
इसके बाद मोथकुर ने फिर कोशिश की. उन्होंने वोटरों की एक लिस्ट भेजकर चुनाव अधिकारियों से मांग की कि वो इस पर कार्रवाई करें. अधिकारियों ने फिर ये कहते हुए मना कर दिया कि सिर्फ शिकायत के आधार पर ये तय नहीं हो सकता कि किसी वोटर का रजिस्ट्रेशन सही है या नहीं.
मोथकुर की बार-बार की इन कोशिशों पर कांग्रेस के बूथ लेवल एजेंट गौतम एस की नजर थी. उन्होंने इसकी थाने में शिकायत की और आरोप लगाया कि जिन मतदाताओं के नाम फॉर्म-7 भरकर बीजेपी के बीएलए हटवाना चाहते हैं, उनमें से ज्यादा माइनॉरिटी कम्युनिटी से आते हैं. उनका मकसद सिर्फ अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम वोटर्स लिस्ट से हटाना है.
एफआईआर दर्जगौतम की शिकायत के बाद 1 अक्टूबर को बल्लारी के ब्रूसपेट थाने में मोथकुर के खिलाफ FIR दर्ज हो गई. FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 353 लगाई गई है, जो भ्रामक बयान फैलाने से जुड़ी है. रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक में फॉर्म-7 के कथित गलत इस्तेमाल से जुड़ी ये छठवीं FIR है. इससे पहले दर्ज पांच FIR में से 3 में भी बीजेपी से जुड़े लोगों को आरोपी बनाया गया था.
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मोथकुर ने क्या कहा?इधर मोथकुर अपनी बात पर अड़े हैं. उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए 'द हिंदू' से कहा कि उन्होंने न तो वोटर्स के नाम हटाने की मांग की थी, न ये दावा किया था कि जो जानकारी उन्होंने दी है, वो सही है. उन्होंने सिर्फ चुनाव अधिकारियों को सत्यापन करने के लिए जानकारी उपलब्ध कराई थी.
नियम क्या है?SIR के दौरान ऐसे वोटर्स के नाम हटाने के लिए नियम हैं, जो अब दूसरे पते पर शिफ्ट हो गए हैं. या कहीं और रजिस्टर्ड है. बूथ लेवल एजेंट्स इन ‘अयोग्य’ वोटर्स को हटाने के लिए एक साथ कई आवेदन दे सकता है. लेकिन एजेंट एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को एक बार में या एक दिन में 10 से ज्यादा आवेदन नहीं दे सकता. अगर किसी एजेंट को 30 से ज्यादा आपत्तियां हैं तो ERO या AERO खुद उसकी जांच करेंगे. इसके अलावा, BLA को इन आवेदनों की लिस्ट के साथ एक डिक्लेरेशन भी देना होता है कि उसने खुद संबंधित वोटर्स की जानकारी की जांच की है और उसे सही पाया है.
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