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पहले कारसेवक और राम मंदिर की पहली ईंट रखने वाले कामेश्वर चौपाल का निधन

Kameshwar Choupal ने 1989 के राम जन्मभूमि आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. उन्होंने अयोध्या राम मंदिर की नींव में पहली ईंट रखी थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर दुख जताया है. कामेश्वर चौपाल की पहचान एक दलित लीडर के तौर पर भी रही है. आइए जानते हैं इनके बारे में.

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RSS ने कामेश्वर चौपाल को 'प्रथम कारसेवक' का दर्जा दिया था. (SRJTK/X @@ShobhaBJP)

1989 के राम जन्मभूमि आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले कामेश्वर चौपाल का निधन हो गया है. उन्होंने अयोध्या श्रीराम मंदिर की नींव में पहली ईंट रखी थी. कामेश्वर ने 69 साल की उम्र में दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई बड़ी हस्तियों ने उनके निधन पर शोक जताया है. कामेश्वर चौपाल की पहचान एक दलित लीडर के तौर पर भी है. वे बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं.

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बिहार के सुपौल जिले से ताल्लुक रखने वाले कामेश्वर चौपाल की जिंदगी राम जन्मभूमि आंदोलन को समर्पित रही. राम भक्तों के बीच उन्हें प्रथम कारसेवक भी माना जाता है. कामेश्वर रामजन्मभूमि ट्रस्ट के परमानेंट मेंबर भी थे. उन्होंने 2014 में BJP के टिकट पर सुपौल से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था, जिसमें उनकी हार हुई थी.

1989 में कामेश्वर चौपाल विश्व हिंदू परिषद (VHP) के स्वयंसेवक थे. उन्हें ही राम मंदिर के लिए पहली 'राम शिला' यानी ईंट रखने के लिए चुना गया था. कामेश्वर चौपाल 2002 से 2014 तक बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे. बिहार बीजेपी के बड़े नेताओं में शामिल चौपाल, सुपौल के कमरैल गांव से आते हैं. 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है.

PM मोदी ने पोस्ट में बताया कि कामेश्वर चौपाल बड़े राम भक्त थे. उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में बहुमूल्य योगदान दिया है. मोदी ने आगे कहा कि दलित पृष्ठभूमि से आने वाले चौपाल को वंचित समुदायों के कल्याण के काम करने के लिए हमेशा याद किया जाएगा.

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी एक्स पर शोक जताया. उन्होंने लिखा, "1989 को आयोजित ऐतिहासिक शिलान्यास समारोह में पूज्य संत गण की उपस्थिति में श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की प्रथम शिला रखने वाले परम राम भक्त श्री कामेश्वर चौपाल जी का निधन अत्यंत दुःखद है."

चौपाल ने 1991 में बीजेपी का दामन थामने के बाद विश्व हिंदू परिषद (VHP) का साथ छोड़ दिया था. इसके बाद 2002 से लेकर 2014 तक वे बिहार विधान परिषद में एमएलसी रहे.

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