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'..लड़कियां बॉयफ्रेंड बदलती हैं', '..शूर्पणखा लगती हैं', कैलाश विजयवर्गीय के विवादित बयान गिनने में 'घंटे' कम पड़ जाएं!

Kailash Vijayvargiya के विवादित बयानों की हमने एक लिस्ट बनाई है. हालांकि, यह स्वीकारने में बिल्कुल गुरेज नहीं कि ये लिस्ट अधूरी है.

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मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)

"तुम फोकट के प्रश्न मत पूछो, यार... घंटा होकर आए हो तुम?" 

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ये शब्द हैं मध्यप्रदेश के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) के. 9 लोगों की मौत के सवाल पर इससे असभ्य, फूहड़ और हल्का जवाब शायद ही कुछ होगा. बयान की असंवेदनशीलता बताने में शब्द सामर्थ्य चूक जाएं. लेकिन ‘तंत्र’ के सामने ‘लोक’ की जान की शायद यही कीमत है. जनता के जिन रहनुमाओं पर साफ पानी पिलाने का जिम्मा है, वो लोगों की जान से जुड़े सवाल को ‘घंटा’ में उड़ा रहे हैं. ऐसा भी नहीं कि जबान फिसली हो. बयान देने वाले माननीय ‘सीरियस ऑफेंडर’ हैं. कभी आम महिलाओं के लिए तो कभी साथी राजनेताओं पर, विवादित बयान देना जैसी इनकी फितरत में शामिल हो.

विवादित बयानों की लंबी फेहरिस्त

कैलाश विजयवर्गीय बीजेपी के सीनियर नेता है. 1990 से लगातार विधायक हैं. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भी हैं. पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में प्रभारी रहे हैं. लेकिन इस सबके साथ उनकी CV में विवादों की भी एक लंबी फेहरिस्त है. इसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर विवादित टिप्पणी से लेकर, महिलाओं के कपड़ों से जुड़े असंवेदनशील बयान और ताजमहल को मंदिर बताना शामिल हैं.

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ऑस्ट्रिलियाई महिला क्रिकेटर पर बिगड़े बोल

23 अक्टूबर 2025 को ICC महिला विश्व कप में हिस्सा ले रही दो ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेटर के साथ यौन हिंसा का मामला सामने आया. कैलाश विजयवर्गीय ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण तो बताया लेकिन साथ में ‘डिस्क्लेमर’ लगा दिया- "खिलाड़ी अपना स्थान छोड़ें, तो हमारी सिक्योरिटी या लोकल एडमिनिस्ट्रेशन को बताकर निकलें.”

नेताजी यहां तक भी रूक जाते तो ठीक था. लेकिन अपनी बात को जस्टिफाई करने के लिए उन्होंने जो उदाहरण दिया उसे किसी भी भाषा और सभ्य समाज में ‘शोभनीय’ की संज्ञा नहीं दी जा सकती है. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में मंत्री जी का ढिठाई दिखाने वाला बयान छपा. आप शब्दश: पढ़कर अर्थ समझ सकते हैं.

क्रिकेट एक ऐसा खेल है, जैसे इंग्लैंड के अंदर फुटबॉल का खेल है. मैंने फुटबॉल खिलाड़ियों के कपड़े फटते देखे हैं. हम जिस होटल में रूके थे, वो वहां कॉफी पी रहा था. वहां अचानक इतने सारे नौजवान आ गए. कोई ऑटोग्राफ ले रहा था, एक लड़की ने मेरे सामने उसको चूम लिया. उसके कपड़े फट गए. खिलाड़ी बहुत लोकप्रिय होते हैं, इसलिए वे ध्यान रखें. जब भी कभी घूमने जाएं. ये घटना हमारे लिए भी और खिलाड़ियों के लिए भी सबक है.

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राहुल और प्रियंका पर विवादित बयान

बीते साल 25 सितंबर को कैलाश विजयवर्गीय शाजापुर में एक सभा को संबोधित कर रहे थे. यहां उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की संयुक्त रैली पर टिप्पणी करते हुए कहा था,

हम पुरानी संस्कृति के लोग हैं. पुराने जमाने में लोग अपनी बहनों के गांव का पानी तक नहीं पीते थे, लेकिन आज के हमारे प्रतिपक्ष के नेता ऐसे हैं कि अपनी बहन का चौराहे पर चुंबन लेते हैं. ये संस्कारों का अभाव है. ये विदेश के संस्कार हैं.

कांग्रेस समेत कई लोगों ने उनके बयान की आलोचना करते हुए इसे महिला विरोधी बताया था. 

कम कपड़ों वाली लड़कियों पर भी बोले

पिछले साल जून में इंदौर में लोगों को संबोधित करते हुए कहा, 

हमारे यहां महिला देवी का स्वरूप होती है. वो खूब अच्छे कपड़े पहने, श्रृंगार करे. मुझे तो कम कपड़े पहनने वाली लड़कियां पसंद नहीं. लड़कियां मेरे पास सेल्फी खिंचाने आती हैं तो मैं कहता हूं बेटा पहले अच्छे कपड़े पहनकर आना फिर खिंचाना. और मैं मना कर देता हूं.

उन्होंने आगे कहा कि विदेशों में कम कपड़े पहनने वाली लड़कियों को अच्छा मानते हैं, लेकिन हमारे यहां अच्छे कपड़े, श्रृंगार और गहने पहनने वाली लड़की को सुंदर माना जाता है. 

मंत्री जी ने बताया आज की ‘शूर्पणखा’ कौन?

कैलाश विजयवर्गीय भजन गाने के शौकीन हैं. आवाज सुरीली है. 'माता' का भजन भी गाते है, जिनके वीडियोज वायरल हैं. लेकिन महिलाओं के बारे में बयान देने की बारी आती है, तो उनके सुर बहक जाते हैं. शब्द शुचिता को भूल जाते हैं. अप्रैल 2023 में हनुमान जयंती के मौके पर एक समारोह में कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान पर काफी बवाल हुआ. इसमें उन्होंने लड़कियों के ‘शूर्पणखा’ होने का क्राइटेरिया सेट कर दिया था. उन्होंने कहा था,

 मैं रात को जब पढ़े-लिखे नौजवानों को झूमते हुए देखता हूं तो इच्छा होती है कि उतर के उन्हें पांच-सात खींच के दे दूं तो इनका नशा उतर जाए. लड़कियां भी इतने गंदे कपड़े पहनकर निकलती हैं कि उनमें देवी का स्वरूप नहीं दिखता. शूर्पणखा लगती हैं. 

उनके इस बयान की काफी तीखी आलोचना हुई. तब कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल में बीजेपी के प्रभारी थे. तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता महुआ मोइत्रा ने उन्हें जवाब दिया था. उन्होंने कहा था,

आपकी सोच गंदी है. आपकी नजर गंदी है. हमारे कपड़ों से कोई फर्क नहीं पड़ता.

नीतीश कुमार पर भी विवादित बयान

अगस्त 2022 में नीतीश कुमार बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़कर राजद के साथ चले गए थे. तब कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान पर काफी हंगामा हुआ था. उन्होंने कहा था,

जब मैं विदेश में था, जिस दिन बिहार की सरकार बदली, तो एक (व्यक्ति) ने बोला ये तो हमारे यहां होता है- लड़कियां कभी भी बॉयफ्रेंड बदल लेती हैं. फिर बोले- बिहार के मुख्यमंत्री की भी ऐसी पोजिशन है कि कब किस से हाथ मिला लें, कब किसका हाथ छोड़ दें.

विवाद बढ़ता देख विजयवर्गीय को सफाई देनी पड़ गई. उन्होंने कहा, “मैंने अपने मित्र के बयान को कोट किया था. नारी हमारे लिए पूजनीय है. नारी के लिए, कम से कम भारतीय नारी के लिए हमारे मन में बहुत सम्मान है.” 

'मर्यादा के उल्लंघन पर सीता हरण'

महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर कैलाश विजयवर्गीय के बोल अक्सर मर्यादा की लक्ष्मण रेखा लांघ जाते हैं. जनवरी 2013 में रेप की लगातार बढ़ती घटनाओं पर उनकी टिप्पणी से काफी विवाद हुआ. उनके साथ-साथ बीजेपी की भी काफी फजीहत हुई थी. मीडिया से बात करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था,

 एक ही शब्द है मर्यादा. मर्यादा का उल्लंघन होता है, तो सीता हरण हो जाता है. लक्ष्मण रेखा हर व्यक्ति की खींची गई है. उस लक्ष्मण रेखा को कोई भी पार करेगा, तो रावण सामने बैठा है. वह सीता हरण करके ले जाएगा. 

विजयवर्गीय की इस आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद विवाद बढ़ता देख बीजेपी ने इस बयान से खुद को अलग कर लिया था. तब पार्टी के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने उन्हें बयान वापस लेने के लिए कहा था. इसके बाद विजयवर्गीय ने कहा था कि उनका मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था.

बेटे पर अधिकारी को बैट से पीटने का आरोप

मामला 26 जून 2019 का है. इंदौर नगर निगम की टीम गंजी कंपाउंड क्षेत्र में एक जर्जर मकान तोड़ने पहुंची थी. इस बीच स्थानीय लोगों ने तत्कालीन विधायक आकाश विजयवर्गीय को बुला लिया. विधायक के आते ही बीजेपी कार्यकर्ता जोश में आ गए. उनकी अधिकारियों से कहासुनी हो गई. इस दौरान निगम के जोनल अधिकारी धीरेंद्र बायस पर क्रिकेट बैट से हमले का वीडियो वायरल हुआ. आरोप आकाश पर लगा. 

निगम अधिकारी ने उनके खिलाफ 26 जून 2019 को शिकायत दर्ज कराई. उसी तारीख को आकाश की गिरफ्तारी भी हुई. फिर तीन दिन बाद जमानत मिल गई. आकाश कैलाश विजयवर्गीय के 'चश्मो-चराग' यानी बेटे हैं. लोगों ने तंज में कहा ‘शब्द बाण’ चलाते हैं, तो बेटा हाथ चलाता है. हालांकि, पीड़ित धीरेंद्र बायस के कोर्ट में पलटने के चलते आकाश को बरी कर दिया गया. 

जब ताजमहल को बताया मंदिर

27 दिसंबर 2025 को कैलाश विजयवर्गीय मध्यप्रदेश के सागर जिले में एक कार्यक्रम में थे. यहां उन्होंने दावा किया कि ताजमहल मूल रूप से एक हिंदू मंदिर था, जिसे शाहजहां ने मकबरे में बदल दिया. यही नहीं, उन्होंने इतिहासकारों को भी ‘चुनौती’ दे डाली या कहें कि ‘नई जानकारी’ दे दी. बताया कि शाहजहां की पत्नी मुमताज को पहले बुरहानपुर में दफनाया गया, फिर मंदिर वाली जगह पर शव ले जाकर ताजमहल बनवा दिया गया.

सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर खूब हो हल्ला मचा. विरोधियों ने मजे लिए, वहीं समर्थकों ने इसे ‘ऐतिहासिक व्याख्या’ करार दिया. हालांकि इस मसले का सच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) बता चुका है. उनकी खुद की सरकार ने 24 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट में ASI की रिपोर्ट का हवाला देते हुए एक हलफनामा देकर बताया था कि ताजमहल वाली जगह पर किसी मंदिर का कोई अस्तित्व नहीं है.

'30 साल में गृहयुद्ध'

19 अगस्त 2024.  इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि बड़े पैमाने पर डेमोग्राफी में बदलाव के चलते भारत में 30 साल के समय में गृह युद्ध छिड़ सकता है. उन्होंने दावा किया था कि वे कुछ दिन पहले मिलिट्री के एक रिटायर्ड ऑफिसर के साथ बैठे थे. विजवर्गीय ने कहा कि तब ऑफिसर ने उन्हें बताया कि अगले 30 साल बाद देश में गृह युद्ध शुरू हो जाएगा.

ये कैलाश विजयवर्गीय से जुड़े विवादों की फेहरिस्त है. हालांकि, स्वीकारने में गुरेज नहीं कि अतीत के आईने से निकाली ये लिस्ट अधूरी है. साथ में ये ऐतबार भी नहीं कि बदजुबानी और विवादों के नगीने भविष्य में उनकी राजनीतिक सीवी में नहीं जुड़ेगें. 

वीडियो: इंदौर में दूषित पानी पर कैलाश विजयवर्गीय से पूछा गया सवाल, भड़क गए नेता

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