एक गलत ट्रेन पकड़ी और छोटा बच्चा अपने परिवार से बिछड़ गया. राजा गोप 6 साल के थे जब उनसे ये गलती हुई थी. इसकी कीमत उन्होंने अगले 14 साल चुकाई. राजा गोप ने अपने परिवार को ढूंढ लिया है. लेकिन इसमें जीवन का करीब डेढ़ दशक लग गया. अब राजा 20 साल के हैं. परिवार से मिलना अब भी बाकी है.
गलत ट्रेन में चढ़ 6 साल का बच्चा ऐसा भटका, 'सही गाड़ी' मिलने में 14 साल लग गए
Jharkhand Raja Gope: झारखंड के चाईबासा के रहने वाले राजा अपने पिता के साथ ईंट भट्टे के काम के लिए पश्चिव बंगाल के हावड़ा जा रहे थे. लेकिन वो गलती से दूसरी ट्रेन में बैठ गए और केरल पहुंच गए. अब 14 साल बाद वे अपने परिवार से मिलने जा रहे हैं.


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड के चाईबासा के रहने वाले राजा साल 2012 के किसी रोज अपने पिता के साथ ईंट भट्टे के काम के सिलसिले में हावड़ा जा रहे थे. मगर गलती से वो दूसरी ट्रेन में चढ़ गए, जो उन्हें केरल के एर्नाकुलम ले आई. वहां एक्टिविट्स ने उन्हें बचाया और शेल्टर दिया. उन्हें अपने होमटाउन चाईबासा का नाम, अभिभावकों का पहला नाम और परिवार के दूसरे सदस्यों का नाम याद था. लेकिन अपने गांव की सही जगह नहीं पता थी. इस वजह से उनके परिवार को उस समय ढूंढना मुश्किल रहा था.
लेकिन उम्मीदों की किरण तब जगी, जब राजा कन्नूर पहुंचे. वे केरल चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के स्किल डेवलपमेंट और रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम के लिए यहां आए थे. यहां लोकल एक्टिविस्ट ने उनकी मुलाकात फरदीन खान से करवाई.
फरदीन खान, नॉन-प्रॉफिट संस्था रेलवे चिल्ड्रन के झारखंड प्रोजेक्ट प्रोग्राम के लीड हैं. उन्होंने राजा का एक वीडियो चाईबासा में सर्कुलेट करवाया. कुछ समय बाद राजा का वीडियो उनके परिवार तक भी पहुंच गया, जो वेस्ट सिंहभूम जिले के हरिमारा गांव में रहते हैं. मगर इन 14 सालों में काफी कुछ बदल चुका था.
रिपोर्ट के मुताबिक, राजा के पिता की चार साल पहले मौत हो गई थी. उनकी मां मणि और भाई-बहन दिहाड़ी मजदूरी करके अपना गुजारा कर रहे थे. जब परिवार को पता लगा कि राजा जिंदा हैं, तो वे काफी खुश हो गए.
राजा की मां मणि ने बेटे की वापसी की खबर सुनकर कहा,
‘मैं बहुत खुश हूं कि मेरा बेटा जिंदा है और घर लौटेगा. अगर मेरे पति आज होते और अपने बेटे को देख पाते तो मुझे और भी ज्यादा खुशी होती.’
झारखंड महिला और बाल विकास (WCD) डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने कहा कि वे केरल WCD डिपार्टमेंट के साथ कोऑर्डिनेट कर रहे हैं. कुछ पेपरवर्क पूरा होने के बाद राजा अपने परिवार से फिर मिल पाएंगे. झारखंड पहुंचने के बाद उन्हें आफ्टर केयर स्कीम और स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम से जोड़ने की भी कोशिश की जाएगी.
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