दिल्ली पुलिस ने लाल किले के पास से एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा है, जो खुद को NIA (National Investigation Agency) का अफसर बता रहा था. उसने NIA का एक आईडी कार्ड भी दिखाया, लेकिन जांच में पता चला कि आईडी कार्ड नकली है. वहीं पुलिस के मुताबिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि संदिग्ध शख्स लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगता है. खासकर वह कश्मीर के युवाओं को निशाना बनाता था.
लालकिले के पास मिली कार, ड्राइवर बोला- 'NIA अफसर हूं', जांच में मिला सालों से चल रहा फर्जीवाड़ा
दिल्ली की कोतवाली थाना पुलिस की टीम लाल किले के पास पेट्रोलिंग कर रही थी. तभी लाल किले के पीछे दिल्ली चलो पार्क के पास पुलिस को एक संदिग्ध गाड़ी दिखी. ड्राइवर ने खुद को बताया NIA अफसर, लेकिन फिर पता चला कि वो कश्मीर से लेकर दिल्ली तक सालों से बड़ा फर्जीवाड़ा कर रहा था.


आजतक से जुड़े अरविंद ओझा के इनपुट के अनुसार पूछताछ में शख्स ने अपना नाम मुदस्सिर बताया है. वह कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला है. जानकारी के मुताबिक 18 फरवरी को दिल्ली की कोतवाली थाना पुलिस की टीम लाल किले के पास पेट्रोलिंग कर रही थी. तभी लाल किले के पीछे दिल्ली चलो पार्क के पास पुलिस को एक संदिग्ध गाड़ी दिखी. गाड़ी एक काले कलर की ह्यूंडई सैंट्रो कार थी, जिसका नंबर जम्मू कश्मीर में रजिस्टर्ड था.
सामने आई सच्चाईगाड़ी में उस वक्त दो लोग बैठे थे. पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि उनमें से एक शख्स मुदस्सिर है और दूसरा एक नाबालिग था. पुलिस के पूछने पर मुदस्सिर ने खुद को NIA का अफसर बताया और उसका एक आईडी कार्ड भी दिखाया. पहली नजर में यह कार्ड संदिग्ध लग रहा था. इसलिए पुलिस दोनों को पूछताछ के लिए कोतवाली थाना लेकर गई. पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी मुदस्सिर जम्मू-कश्मीर का रहने वाला है और लोगों से पैसे लेकर दिल्ली में नौकरी दिलाने का झांसा देता था.
रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निशाना बनाता था. बताया गया है कि पकड़े जाने के समय जो नाबालिग उसके साथ था, उसे भी वह नौकरी दिलाने के नाम पर ही दिल्ली लाया था. इसके लिए उसने नाबालिग के परिवार से पैसे भी लिए थे. आरोपी ने पुलिस को बताया वो 12 फरवरी को कश्मीर से निकले थे और 13 फरवरी की रात को दिल्ली पहुंचे थे. वो लोग जामा मस्जिद इलाके में एक गेस्ट हाउस में रुके थे.
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जांच एजेंसियों ने भी की पूछताछआरोपी ने पुलिस के सामने यह भी दावा किया कि उसने नाबालिग को नौकरी दिलाने के लिए कुछ लोगों से संपर्क भी किया था. हालांकि वह अपने दावों के सपोर्ट में कोई ठोस सबूत नहीं दे पाया. उसका दिखाया हुआ आईडी कार्ड भी नकली निकला. इसके बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और इंटेलीजेंस ब्यूरो की टीमों ने भी शख्स से पूछताछ की. फिलहाल पूछताछ में यही खुलासा हुआ है कि आरोपी नकली पहचान पत्र के नाम पर अधिकारी बनकर लोगों को नौकरी दिलाने के बहाने ठगता था. पुलिस ने फिलहाल इस मामले में भारतीय न्याय सहिंता की धारा 319(2)/339 (IPC की धारा 419/474 के अनुसार) के तहत मामला दर्ज किया है. साथ ही मामले की आगे की जांच की जा रही है. अभी इस केस में और भी खुलासे हो सकते हैं.
वीडियो: दिल्ली पुलिस ने हत्या के मामले में ब्लिंकिट पर केस क्यों दर्ज किया?











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