झारखंड के चाईबासा में नवंबर 2025 में थैलीसीमिया से पीड़ित 5 बच्चों को HIV संक्रमित खून चढ़ाने के मामले ने तहलका मचा दिया था. लेकिन इससे ठीक दो महीने पहले भी ऐसी ही घटना एक दंपती के साथ हुई थी. झारखंड की एक महिला दूसरी बार प्रेग्नेंट होने के बाद चाईबासा के सरकारी अस्पताल में रेगुलर चेकअप के लिए गई थी. जांच की रिपोर्ट आई तो पता चला कि वो HIV पॉजिटिव हैं. उनके पांव तले जमीन खिसक गई. इसके बाद उनके पति ने HIV टेस्ट कराया तो वह भी पॉजिटिव निकले. उनके बड़े बेटे की तबीयत खराब हुई तो उसे भी चाईबासा अस्पताल ले जाया गया. यहां चेकअप के दौरान पता चला कि वह भी HIV संक्रमित है.
सरकारी अस्पताल में डिलीवरी हुई, महिला के साथ बच्चे और पति को भी HIV हो गया, अब दूसरे बच्चे का भी डर
झारखंड के चाईबासा अस्पताल से खून चढ़वाने वाली महिला, उसके पति और बच्चे में भी HIV संक्रमण पाया गया है. 5 बच्चों को HIV वाला खून चढ़ाने की घटना से दो महीने पहले महिला की उसी अस्पताल में सी-सेक्शन डिलीवरी हुई थी.
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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार का आरोप है कि साल 2023 में महिला को सी-सेक्शन डिलीवरी के दौरान चाईबासा अस्पताल के ब्लड बैंक से खून चढ़ाया गया था. इसके बाद ही ये सब हुआ. दंपती ने ‘लोकलाज’ के डर से मामला छिपाए रखा लेकिन अब वो इस बात से डरे हैं कि कहीं उनका दूसरा बच्चा भी इस जानलेवा बीमारी से संक्रमित न हो. महिला के पति के मुताबिक, सामाजिक कलंक वो वजह थी, जिसके डर से वह और उनकी पत्नी खामोशी से अपना जीवन जी रहे थे. उन्होंने कहा,
हम थैलेसीमिया से पीड़ित 5 बच्चों की खबरें देख रहे थे. उन पांचों बच्चों के परिवार को जो भेदभाव का सामना करना पड़ रहा था, हम वो अपने जीवन में नहीं चाहते थे. लेकिन जब बड़े बेटे का HIV टेस्ट पॉजिटिव आया तो हमने चुप्पी तोड़ने का फैसला किया.
आगे उन्होंने कहा कि वो इस बात से डरे हैं कि उनके दूसरे बेटे को भी HIV संक्रमण हो सकता है. ऐसे हालात में उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं है कि वो आगे क्या करें?
इस घटना को झारखंड के स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. जब इस बारे में पूछताछ के लिए उनसे संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा,
जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है. पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी. हम मामले से जुड़ी संबंधित सरकारी योजनाओं को देखेंगे, जिससे परिवार को वित्तीय सहायता दी जा सके.
उन्होंने पीड़ित परिवार को एकमुश्त वित्तीय सहायता के अलावा पेंशन की व्यवस्था का भी आश्वासन दिया. अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं.
इससे पहले नवंबर 2025 में ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद 5 थैलीसीमिया से पीड़ित 5 बच्चे HIV संक्रमित पाए गए थे. अफसरों ने बताया कि ये संक्रमण विंडो पीरियड में ब्लड डोनेशन की वजह से हो सकते हैं. विंडो पीरियड यानी वो फेज जब ब्लड डोनर HIV से संक्रमित हो जाता है लेकिन उस समय तक इन्फेक्शन टेस्टिंग से डिटेक्ट होने लायक नहीं होता.
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