झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) और झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हजारों छात्र आंदोलन कर रहे हैं. इस आंदोलन के चेहरे के तौर पर छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो का नाम सामने आया हैं. महतो ने प्रदर्शन के बीच भूख हड़ताल पर जाने का फैसला किया है, जिसने कई लोगों का ध्यान उनकी तरफ खींचा है. महतो को ‘सोनम वांगचुक 2.0’ कहा जा रहा है.
कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो जिन्हें लोग 'सोनम वांगचुक 2.0' बुला रहे?
Jharkhand JPSC JSSC exam: रविवार, 2 अगस्त से देवेंद्र महतो हंगर स्ट्राइक पर बैठे हैं. ताकि सरकार उनकी बातें सुने. महतो ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि झारखंड सरकार और आयोग के रवैया के कारण तमाम छात्रों का उनके पास फोन आ रहा है. छात्रों का मनोबल टूट रहा है.

रविवार, 2 अगस्त से देवेंद्र महतो हंगर स्ट्राइक पर बैठे हैं. ताकि सरकार उनकी बातें सुने. महतो ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि झारखंड सरकार और आयोग के रवैया के कारण तमाम छात्रों का उनके पास फोन आ रहा है. छात्रों का मनोबल टूट रहा है. उन्होंने आगे कहा,
“हम छात्र का मनोबल बनाए रखेंगे. हम लड़ाई को आगे बढ़ाते हुए सत्याग्रह के नौवें दिन अपना अन्न त्याग कर रहे हैं. भूख हड़ताल पर बैठ रहे हैं. भूख हड़ताल के सारे नियम का हम पालन करेंगे. यह सरकार को घुटने में टेकने के लिए मजबूर करेंगे. साथ ही साथ जेपीएससी-जेएसएससी के रिफॉर्म के लिए हम मजबूर करेंगे.”
महतो ने 3 अगस्त को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर बताया कि भूखे रहने से उनके शरीर में कमजोरी है. महतो ने लिखा,
“भूख हड़ताल का दूसरा दिन है. 5 जुलाई से शुरू हुआ यह संघर्ष और 25 जुलाई से जारी दिवा-रात्रि सत्याग्रह अब एक कठिन पड़ाव पर है. शरीर में कमजोरी है, कदम भारी हैं, लेकिन छात्रों को न्याय दिलाने का संकल्प पहले से भी अधिक मजबूत है. भूख शरीर को कमजोर कर सकती है, लेकिन न्याय के लिए उठी आवाज को नहीं.”
उन्होंने इंडिया टुडे से जुड़े सत्यजीत कुमार से बात करते हुए कहा कि हफ्तों के विरोध-प्रदर्शन के बाद भी अधिकारियों की तरफ से ठोस जवाब नहीं मिला. इसलिए उनके पास कोई और रास्ता नहीं बचा था.
देवेंद्र नाथ महतो रांची के एक गांव के रहने वाले हैं. ग्रामीण परिवेश से आने वाले महतो ने अपनी स्कूली शिक्षा बुंडू में पूरी की. रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की.
देवेंद्र नाथ के पास हजारीबाग से बैचलर ऑफ एजुकेशन (B.Ed.) में डिग्री है. साथ ही उन्होंने संस्कृत के साथ-साथ कुर्माली, जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं में फर्स्ट-डिविजन के साथ पोस्ट-ग्रेजुएट की है.
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देवेंद्र 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में बतौर निर्दलीय उम्मीदवार इलेक्शन लड़ चुके हैं. उनके चुनावी हलफनामे में दी गई जानकारी के मुताबिक उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यताओं में कई पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्रियों का जिक्र किया है. अपने मुख्य कामों में समाज सेवा और छात्र सक्रियता को शामिल किया है.
महतो 2015 से छात्र आंदोलनों से जुड़े रहे हैं. उन्होंने स्कॉलरशिप, पेपर लीक, भर्ती नियमों, आरक्षण नीतियों और JPSC व JSSC द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मुद्दों को उठाया है. साल 2020 में छठवीं JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन के दौरान उन्होंने अपनी मां को खो दिया था.
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