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अभिजीत दिपके के पिता की सैलरी 65 हजार फिर US से कैसे की पढ़ाई? अब खुद बता दिया

Abhijeet Dipke के पिता एक रिटायर्ड सरकारी अधिकारी हैं. RTI एक्टिविस्ट ने सवाल किया था कि 60 हजार से 65 हजार रुपये महीना सैलरी लेने वाला एक सरकारी कर्मचारी अपने बच्चों को अमेरिका में कैसे पढ़ा सकता है? अब इसका जवाब दिपके ने दिया है.

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29 जुलाई को महाराष्ट्र स्थित अपने गृहनगर संभाजीनगर में अभिजीत दिपके. (PTI)

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  • कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के खर्च के लिए स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन लेने की बात स्वीकार की है।
  • RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने सवाल उठाए थे कि सरकारी कर्मचारी की आय से अमेरिका में पढ़ाई का खर्च कैसे संभव है, जिसके कारण इस मामले की जांच की मांग हुई।
  • दिपके ने बताया कि CJP की फंडिंग आम लोगों से क्राउडफंडिंग के माध्यम से होगी और यह प्रक्रिया पारदर्शी रखी जाएगी।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दिपके इन दिनों एक RTI एक्टिविस्ट के निशाने पर हैं. विवाद उनकी अमेरिका में पढ़ाई पर हुए खर्च को लेकर है. एक्टिविस्ट ने बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए दिपके की फंडिंग की जांच की मांग की. अब इस पूरे विवाद पर खुद अभिजीत दिपके ने चुप्पी तोड़ दी है. उन्होंने खुलकर बताया कि अमेरिका में उनकी पढ़ाई के लिए पैसों का फंड कहां से आया.

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अमेरिका में कैसे पढ़े दिपके?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सीनियर जर्नलिस्ट बरखा दत्त से बात करते हुए अभिजीत दिपके ने बताया कि अमेरिका में डिग्री के लिए किसने फंडिंग की थी. उन्होंने बताया कि अमेरिका में उनकी पढ़ाई का खर्च बोस्टन यूनिवर्सिटी की स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से पूरा हुआ. दिपके ने विदेश में अपनी पढ़ाई के लिए परिवार की संपत्ति के इस्तेमाल से इनकार कर दिया था. 

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपना स्कॉलरशिप लेटर दिखाते हुए कहा,

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"मैंने बोस्टन यूनिवर्सिटी से मिली स्कॉलरशिप और कुछ एजुकेशन लोन लेकर अपनी पढ़ाई की थी. लोन मुझे अभी चुकाना है."

Abhijeet Dipke Scholarship
अभिजीत दिपके का स्कॉलरशिप लेटर.
RTI एक्टिविस्ट की शिकायत

1 अगस्त को गुजरात के सूरत के रहने वाले RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने महाराष्ट्र सरकार समेत कई अधिकारियों से शिकायत की थी. इसमें उन्होंने अभिजीत दिपके की अमेरिका में पढ़ाई के खर्च का सोर्स जानने की मांग की थी. अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MIDC) के जूनियर इंजीनियर पद से रिटायर हैं.

अमित तिवारी ने सवाल किया कि 60 हजार से 65 हजार रुपये महीना सैलरी लेने वाला एक सरकारी कर्मचारी अपने बच्चों को अमेरिका में कैसे पढ़ा सकता है? दिपके ने इसका जवाब दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पढ़ाई स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन की वजह से हुई है.

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CJP की फंडिंग पर क्या बोले?

एक सवाल CJP की फंडिंग पर भी है. अभिजीत दिपके ने इस पर भी जवाब दिया. उन्होंने बताया कि CJP क्राउडफंडिंग से पैसा जुटाएगी. माने, आम लोगों से पैसा जुटाएगी. दिपके ने साफ किया कि यह व्यवस्था एकदम ट्रांसपेरेंट रहेगी.

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अभिजीत दिपके ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रोटेस्ट का भी उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि प्रोटेस्ट साइट पर लोग खाना डोनेट करते थे. पानी साथ लाते थे. दिपके ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस के कर्माचारियों ने भी निजी तौर पर CJP प्रोटेस्ट का समर्थन किया.

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