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ईरान से लौटे कश्मीरी छात्र बसें देखकर क्यों नाराज हो गए?

ईरान से भारत लाए गए कश्मीरी स्टूडेंट्स को घर भेजने के लिए जम्मू कश्मीर सरकार ने बसें लगवाई थीं. छात्रों ने इन बसों की कंडीशन पर सवाल उठाए हैं, जिसे उमर अब्दुल्ला ने संज्ञान में लिया है.

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छात्रों ने खराब बसों पर उठाए सवाल (India Today)

ईरान के उरमिया मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले 110 भारतीय छात्रों का एक ग्रुप गुरुवार 19 जून की सुबह नई दिल्ली पहुंचा. इनमें से ज्यादातर छात्र जम्मू-कश्मीर के रहने वाले थे. उमर अब्दुल्ला की सरकार ने इन छात्रों को दिल्ली से उनके घर पहुंचाने के लिए बसें लगाई थीं. छात्रों ने आरोप लगाया है कि इन बसों की हालत बहुत खराब है. काफी थके होने की वजह से उनके लिए ऐसी बसों से घर वापस जाना बेहद मुश्किल है.

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बात मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तक पहुंची तो उन्होंने कहा कि डीलक्स बसों के इंतजाम के लिए वह राज्य परिवहन निगम से बात कर रहे हैं. 

ईरान में फंसे हैं हजारों छात्र

इजरायल से चल रही जंग के बीच हजारों की संख्या में भारतीय छात्र ईरान में फंसे हैं. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में फिलहाल 4 हजार से ज्यादा भारतीय हैं. इनमें आधे से ज्यादा छात्र हैं जो इस्लामिक आज़ाद यूनिवर्सिटी, ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज और शाहिद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों में पढ़ाई करते हैं. 

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इन छात्रों को ईरान से निकालने के लिए भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंधु’ शुरू किया है. इसके तहत 110 छात्रों के एक समूह को ईरान से निकालकर आर्मेनिया और दोहा होते हुए गुरुवार 19 जून को दिल्ली लाया गया.

बसों को लेकर छात्रों की आपत्ति

दिल्ली पहुंचे अली नाम के एक छात्र ने एनडीटीवी से बताया कि उनके लिए ये यात्रा काफी मुश्किलों भरी थी. तेहरान में उन्होंने कई हमले देखे. एक यात्रा के दौरान मिसाइल उनकी बस के पास आकर गिरी थी. उन्होंने बताया कि सबसे पहले उन लोगों ने आर्मेनिया की सीमा पार की. वहां एक दिन रुकने के बाद गुरुवार को वह दिल्ली आ पाए.

कश्मीर की रहने वाली शेख अफसा ने उमर अब्दुल्ला सरकार की ओर से लगाई गई बसों की हालत पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि काफी थके होने की वजह से उनके लिए बस से अपने घर वापस जाना काफी मुश्किल था. ऊपर से जो बसें मुहैया कराई गई थीं, वो ठीक कंडीशन में नहीं थीं. उन्होंने सरकार से ‘अच्छी बसें’ मुहैया कराने की अपील की.

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जम्मू कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन (जेकेएसए) ने अपनी एक एक्स पोस्ट में कहा कि ईरान से रेस्क्यू कर लाए गए कश्मीरी छात्रों का कहना है कि 4 दिनों की यात्रा के बाद उन्हें एसआरटीसी की बसें उपलब्ध कराई गई हैं. वो 20 घंटे की और यात्रा करने की हालत में नहीं हैं. फ्लाइट्स के टिकट भी काफी महंगे हैं, जिसे सभी छात्र अफोर्ड नहीं कर सकते. 

जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने बसों की क्वालिटी को लेकर ऐसी शिकायतों को संज्ञान में लिया है. उन्होंने छात्रों के अनुरोध पर कहा कि रेजिडेंट कमिश्नर को जेकेआरटीसी के साथ बात करने के लिए कहा गया है ताकि छात्रों के लिए बेहतर डीलक्स बसों की व्यवस्था की जा सके.

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, 94 में से केवल 35 छात्रों ने जम्मू-कश्मीर सरकार की बस सेवा का विकल्प चुना है. बाकी छात्र फ्लाइट से या निजी व्यवस्था के जरिए श्रीनगर के लिए रवाना हो गए. छात्रों की सिर्फ एक बस गुरुवार की दोपहर करीब 12 बजे दिल्ली से रवाना हुई, जो शुक्रवार की सुबह करीब 6 बजे श्रीनगर पहुंचेगी.

600 स्टूडेंट कल पहुंचेंगे दिल्ली

इंडिया टुडे से जुड़े मीर फरीद की रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर के 500 छात्रों समेत तकरीबन 600 भारतीयों का दूसरा समूह शुक्रवार 20 जून को दिल्ली पहुंचेगा. इन छात्रों को ईरान के कोम शहर से 1000 किमी दूर सीमावर्ती इलाके मशहद में लाया गया है. यहां से शुक्रवार को वे दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे.  

इसी बीच तेहरान विश्वविद्यालय के 140 कश्मीरी छात्रों को गिलान प्रांत में सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है. भारतीय छात्रों का ये वही ग्रुप है, जिसमें 2 कश्मीरी छात्र हमले में घायल हुए थे. उन्होंने भारतीय विदेश मंत्रालय से अनुरोध किया है कि उन्हें जल्द से जल्द ईरान से निकालने की व्यवस्था की जाए. 

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