ईरान में धार्मिक सत्ता के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन जारी है. राजधानी तेहरान समेत मशहद, इस्फहान, तबरीज, बाबोल और देजफुल जैसे कई शहरों में सड़कों पर हजारों लोग उतर आए हैं. ये प्रदर्शन पिछले 12 दिनों से हो रहे हैं, और अब 31 प्रांतों के 100 से ज्यादा शहरों-कस्बों तक फैल चुके हैं. देश में इंटरनेट भी बंद कर दिया गया. सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कम से कम 45 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं, जिनमें आठ बच्चे शामिल हैं.
ईरान के कई शहरों में बड़े पैमाने पर उग्र प्रदर्शन, 'शाह जिंदाबाद' के नारे गूंजे
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी (HRANA) ने कहा है कि अब तक कम से कम 34 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जिनमें पांच बच्चे शामिल हैं. इसके अलावा आठ सुरक्षाकर्मियों की भी मौत हुई है और 2270 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है.


गुरुवार, 8 जनवरी की शाम सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए की वीडियोज में देश के मशहद शहर की एक मुख्य सड़क पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी चलते हुए दिखे. बीबीसी ने इन वीडियोज की पुष्टि की है. वीडियोज में ‘शाह जिंदाबाद’ और ‘यह आखिरी लड़ाई है, पहलवी लौटेगा’ जैसे नारे सुने जा सकते हैं. एक जगह कुछ लोग एक ओवरब्रिज पर चढ़ते दिखते हैं और वहां लगे CCTV कैमरों जैसे दिखने वाले डिवाइस हटाते भी नजर आते हैं.
ऑनलाइन पोस्ट किए गए एक दूसरे वीडियो में पूर्वी तेहरान की एक मुख्य सड़क पर भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी चलते दिखे. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी (HRANA) ने कहा है कि अब तक कम से कम 34 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जिनमें पांच बच्चे शामिल हैं. इसके अलावा आठ सुरक्षाकर्मियों की भी मौत हुई है और 2270 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है.

नॉर्वे स्थित संस्था ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) ने कहा है कि सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कम से कम 45 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं, जिनमें आठ बच्चे हैं. वहीं बीबीसी फारसी ने 22 लोगों की मौत और पहचान की पुष्टि की है. ईरानी अधिकारियों ने छह सुरक्षाकर्मियों की मौत की जानकारी दी है.
क्यों हो रहे प्रदर्शन?गुरुवार, 8 दिसंबर की शाम से तेज हुए ये प्रदर्शन वॉशिंगटन डीसी में रह रहे रजा पहलवी का आह्वान पर शुरू हुए. पहलवी ने ईरानियों से कहा था कि वो सड़कों पर उतरें और एकजुट होकर अपनी मांगें बुलंद करें. रजा पहलवी के पिता को 1979 की इस्लामिक क्रांति में सत्ता से हटा दिया गया था. उन्होंने यूरोपीय नेताओं से अपील की कि वो अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ मिलकर शासन को जवाबदेह ठहराएं. पहलवी ने कहा,
"मैं उनसे अपील करता हूं कि वे सभी तकनीकी, वित्तीय और कूटनीतिक संसाधनों का उपयोग करें जो ईरानी लोगों के संचार को बहाल करने के लिए उपलब्ध हैं, ताकि उनकी आवाज और इच्छा सुनी और देखी जा सके."
उन्होंने आगे कहा,
"मेरे साहसी साथियों की आवाजों को चुप न होने दें."
पहलवी ने कहा था कि वो अपनी अपील के जवाब पर निर्भर करते हुए आगे की योजनाएं पेश करेंगे.

ये प्रदर्शन पिछले तीन साल में सबसे बड़ी असंतोष की लहर की वजह से हो रहे हैं. इनकी शुरुआत पिछले महीने तेहरान के ग्रैंड बाजार में दुकानदारों द्वारा शुरू की गई थी. उन्होंने ईरानी रियाल की तेज गिरावट की निंदा की थी. ईरान में हो रहे प्रदर्शन मिसमैनेजमेंट (कुप्रबंधन) और पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण बढ़ती महंगाई के कारण हो रहे हैं. राजनीतिक और सामाजिक स्वतंत्रताओं पर लगाम लगाए जाना भी एक बड़ा कारण है.
ये भी पढ़ें- सायरस से खामनेई तक: ईरान का वो इतिहास, जिसकी गूंज आज सड़कों पर सुनाई दे रही है
ईरान के सांख्यिकी केंद्र (एक सरकारी संस्था) के अनुसार, दिसंबर में महंगाई दर साल-दर-साल 52 प्रतिशत थी. ईरानी अधिकारी आर्थिक कठिनाइयों को स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि विदेशी ताकतों से जुड़े नेटवर्क विरोध प्रदर्शनों को भड़का रहे हैं. सुधारवादी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की नागरिक सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत की कोशिश कर रही है. पेजेशकियान ने तनाव कम करने की कोशिश की है. उन्होंने प्रदर्शनकारियों की वाजिब मांगों को माना है और सरकार से आर्थिक स्थिति सुधारने की अपील की है. उन्होंने पहले कहा था,
"इस्लामी नजरिए से... अगर हम लोगों की रोजी-रोटी का मसला हल नहीं करते, तो हम जहन्नम में पहुंच जाएंगे."
लेकिन उन्होंने ये भी माना कि उनके हाथ में ज्यादा कुछ नहीं है, क्योंकि ईरानी रियाल की कीमत तेजी से गिर रही है. फिलहाल, 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 14 लाख से 14.7 लाख रियाल के आसपास पहुंच गई है.

ईरान में विरोध प्रदर्शनों के जवाब में ईरानी अधिकारी गंभीरता से कार्रवाई कर रहे हैं. एनडीटीवी ने लिखा कि हार्डलाइन अखबार कायहान ने ऑनलाइन एक वीडियो जारी किया, जिसमें दावा किया गया कि सुरक्षा बल ड्रोन की मदद से प्रदर्शनकारियों की पहचान करेंगे. ईरानी अधिकारियों ने अब तक पूरे देश में फैले विरोध प्रदर्शनों की गंभीरता को स्वीकार नहीं किया है.
देश की ज्यूडिशियरी की मिजान न्यूज एजेंसी ने रिपोर्ट किया कि तेहरान के बाहर एक शहर में एक पुलिस कर्नल को चाकू मारकर हत्या कर दी गई. वहीं, सेमी-ऑफिशियल फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि चहारमहाल और बख्तियारी प्रांत के लोरडेगन शहर में बंदूकधारियों ने हमला किया, जिसमें दो सुरक्षाकर्मी मारे गए और 30 अन्य घायल हुए.
खोरासान रजवी प्रांत के एक उप-गवर्नर ने ईरानी स्टेट टीवी को बताया कि बुधवार, 7 जनवरी की रात चेनारन में एक पुलिस स्टेशन पर हमले में पांच लोग मारे गए, जो तेहरान से लगभग 700 किमी (430 मील) उत्तर-पूर्व में है. गुरुवार, 8 जनवरी की देर रात रिवॉल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि केरमानशाह में उनके दो सदस्य मारे गए.
ट्रंप की चेतावनीपिछले हफ्ते ट्रंप ने साफ चेतावनी दी थी कि अगर तेहरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिंसक तरीके से मारता है तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा. टॉक शो होस्ट ह्यू हेविट से बातचीत में ट्रंप ने अपना ये वादा दोबारा दोहराया था. ट्रंप ने कहा,
"ईरान को बहुत सख्ती से, बल्कि मेरे अभी आपसे बोलने से भी ज्यादा सख्ती से बताया गया है कि अगर उन्होंने ऐसा किया, तो उन्हें नरक की आग झेलनी पड़ेगी."
जब उनसे पूछा गया कि क्या वो पहलवी से मुलाकात करेंगे, तो ट्रंप जवाब देने से बचे. उन्होंने कहा कि इस वक्त राष्ट्रपति के तौर पर ऐसा करना उचित नहीं होगा
वीडियो: दुनियादारी: ईरान में जेन-जी के प्रदर्शन पर क्या करेंगे खामेनेई?


















.webp?width=120)
.webp?width=120)

.webp?width=120)
.webp?width=120)