ईरान के एक जहाज IRIS Dena को अमेरिकी टॉरपीडो ने हिंद महासागर में डुबो दिया, जिसमें ईरानी नेवी के 87 जवानों की मौत हो गई. यह जहाज भारत में आयोजित ‘नेवल एक्सरसाइज मिलन-2026’ और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने के लिए विशाखापत्तनम आया था. इस जहाज के साथ ईरान के दो और पानी वाले जहाज भारत आए थे. उनका क्या हुआ? वो अभी कहां हैं? इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों जहाज जब भारत से वापस जा रहे थे तो इनमें से एक IRIS Lavan ने इंडियन नेवी से मदद मांगी थी.
ईरान से तीन जहाज भारत आए थे, एक को अमेरिका ने डुबो दिया, बाकी दो कहां हैं?
Iran Navy की मदद न करने के लिए आलोचनाओं का सामना कर रही Indian Navy ने बताया कि IRIS Dena के डूबने के दिन क्या हुआ था.
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28 फरवरी को ईरान ने नेवी के जहाज Lavan में टेक्निकल दिक्कतें आने की बात कही थी और कोच्चि में तुरंत डॉकिंग (बंदरगाह पर जगह देने) के लिए भारत से संपर्क किया था. ये वही दिन था, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमले शुरू किए थे. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई भी मारे गए.
इंडिया टुडे के सूत्रों के अनुसार, 1 मार्च को IRIS Lavan को डॉकिंग की मंजूरी मिल गई. फिर 4 मार्च को इसे कोच्चि में डॉक किया गया. इस जहाज में सवार 183 क्रू मेंबर्स को अभी भी कोच्चि नेवल बेस में ठहराया गया है. IRIS Lavan ने ठीक समय पर भारत से मदद मांग ली और कोच्चि आ गया लेकिन उसका साथी जहाज IRIS Dena इस मौके से चूक गया. ये जहाज भी नेवल एक्सरसाइज मिलन-2026 और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने के बाद ईरान वापस जा रहा था लेकिन 4 मार्च को एक US सबमरीन से दागे गए टॉरपीडो से टकराने के बाद वह हिंद महासागर में डूब गया.
ये घटना श्रीलंका के दक्षिणी पोर्ट गाले से लगभग 40 नॉटिकल मील (लगभग 75 किलोमीटर) दूर इंटरनेशनल पानी में हुई. यानी ये हमला उस क्षेत्र में हुआ, जहां न भारत की कोई अथॉरिटी थी और न श्रीलंका की. वॉरशिप ने सुबह-सुबह एक डिस्ट्रेस कॉल जारी करके धमाके की जानकारी दी थी लेकिन जब तक श्रीलंकाई रेस्क्यू शिप मौके पर पहुंचे, तब तक वह डूब चुका था. इसमें 80 से ज्यादा लोग मारे गए.
इन दोनों के अलावा एक तीसरा ईरानी जहाज भी भारत से वापस लौट रहा था. इसका नाम IRIS Bushehr है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस जहाज ने भी ठीक टाइम पर श्रीलंका से मदद मांग ली और फिलहाल वह श्रीलंका के त्रिंकोमली डॉक पर है.
इंडियन नेवी ने क्या कहा था?बता दें कि ईरान के IRIS Dena पर हमले को लेकर इंडियन नेवी से भी पूछा गया कि उसने जहाज को बचाने की कोशिश क्यों नहीं की? इस पर भारतीय नेवी ने कहा कि उसने फ्रिगेट से डिस्ट्रेस सिग्नल मिलने के बाद सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया था. श्रीलंकाई अधिकारियों ने पहले से चल रहे रेस्क्यू मिशन को तेज करने के लिए एक लंबी दूरी का निगरानी विमान तैनात किया था जबकि एयर-ड्रॉपेबल लाइफ राफ्ट से लैस एक और विमान को स्टैंडबाय पर रखा गया था.
INS तरंगिनी जो उस समय घटनास्थल के आसपास ही थी, उसे रेस्क्यू मिशन में मदद के लिए भेजा गया. नेवी ने कहा कि एक और जहाज INS इक्षक सर्च ऑपरेशन में मदद के लिए कोच्चि से रवाना हुआ था.
भारत सरकार ने क्या कहा?इस मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी सरकार का स्टैंड साफ किया. डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि
मैं भी UNCLOS और इंटरनेशनल कानून का सपोर्ट करता हूं. हमें ईरानी साइड से मैसेज मिला कि एक शिप जो शायद उस समय हमारे बॉर्डर के सबसे पास था, हमारे पोर्ट में आना चाहता था. वे बता रहे थे कि उन्हें दिक्कत हो रही है. 1 मार्च को हमने कहा कि आप आ सकते हैं और उन्हें आने में कुछ दिन लगे और फिर वे कोच्चि में डॉक हो गए. बहुत सारे युवा कैडेट थे. जब शिप निकली थी और जब वे यहां आए तो सिचुएशन बिल्कुल अलग थी.
वे फ्लीट रिव्यू के लिए आ रहे थे और फिर वे एक तरह से गलत साइड में फंस गए. श्रीलंका में भी एक जहाज के साथ ऐसी ही सिचुएशन थी. उन्होंने जो फैसला लिया, वह उन्होंने किया और उनमें से एक बदकिस्मती से ऐसा नहीं कर पाया. हमने सिचुएशन को इंसानियत के नजरिए से देखा. लीगल इशू के अलावा और मुझे लगता है कि हमने सही काम किया.
डॉ एस जयशंकर ने यह भी कहा कि इस पर सोशल मीडिया पर बहुत बहस चल रही है. इसलिए प्लीज इंडियन ओशियन की असलियत को समझें. उन्होंने कहा कि डिएगो गार्सिया पांच दशकों से इंडियन ओशियन में ही है. जिबूती में भी विदेशी सेनाएं हैं. हंबनटोटा के बारे में सबको पता है.
वीडियो: IRIS Dena डूबा तो भारत ने क्या किया? अब पता चला












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