ईरान और अमेरिका (Iran-USA Tensions) के बीच बीते काफी समय से तनातनी जारी है. दोनों देशों के बीच एक संभावित जंग की आशंका भी जताई जा रही है. और अब तनाव को एक लेवल ऊपर बढ़ाते हुए इस संभावित युद्ध का पहला गोला दाग दिया गया है. अमेरिकी सेना की मानें तो ईरान ने उनके एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन (Abraham Lincoln) की तरफ एक शाहेद-139 (Shahed-139) ड्रोन भेजा है. हालांकि अमेरिकी कैरियर पर मौजूद एक F-35C Lightning II विमान ने इस ड्रोन को मार गिराया है. ये घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच एक मीटिंग प्रस्तावित है.
अमेरिका ने मार गिराया ईरानी ड्रोन, IRGC का दावा- गिरने से पहले उसने अपना काम पूरा कर दिया
अमेरिकी सेना की मानें तो ईरान ने उनके एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन (Abraham Lincoln) की तरफ एक शाहेद-139 (Shahed-139) ड्रोन भेजा है. यह ड्रोन Iran की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का था. IRGC वही फोर्स है जो सिर्फ और सिर्फ ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei के लिए वफादार है.


अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिंस ने ड्रोन पर जानकारी देते हुए रॉयटर्स को बताया,
ईरान का शाहेद-139 ड्रोन अनजान इरादे से कैरियर की तरफ उड़ता चला आ रहा था. USS अब्राहम लिंकन के एक F-35C फाइटर जेट ने आत्मरक्षा में और एयरक्राफ्ट कैरियर और उस पर मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए ईरानी ड्रोन को मार गिराया है.

वहीं इस मामले पर दूसरी ओर ईरानी मीडिया कुछ और ही कह रही है. मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्र के हवाले से बताया गया है कि एक ईरानी ड्रोन का इंटरनेशनल वाटर में संपर्क टूट गया. ये एक निगरानी ड्रोन था और संपर्क टूटने से पहले ऑपरेशन के दौरान उसने कंट्रोल सेंटर को अपना जासूसी डेटा सफलतापूर्वक भेज दिया था. ईरान की तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने IRGC से जुड़े एक सूत्र के हवाले से बताया कि शाहेद-129 नाम का यह ड्रोन इंटरनेशनल वाटर क्षेत्र में निगरानी से जुड़े एक रूटीन मिशन पर था.
एजेंसी के मुताबिक यह ड्रोन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का था. IRGC वही फोर्स है जो सिर्फ और सिर्फ ईरान के सुप्रीम लीडर के लिए वफादार है. संपर्क टूटने से पहले ड्रोन ने ली गई तस्वीरें सफलतापूर्वक सेंटर को भेज दी थीं. फिलहाल संपर्क टूटने के कारण की जांच अभी जारी है.
अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, अमेरिका के सबसे शक्तिशाली बेड़ों में से एक है. इस कैरियर पर 90 एयरक्राफ्ट और 3,200 लोग जा सकते हैं. इसके साथ में कई और जंगी जहाज भी मिडिल ईस्ट में इकट्ठा हुए हैं. इन सबको ईरानी सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत यहां भेजा गया है.
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