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'फ्री इलाज देंगे, लेकिन सुविधा घटाने दें', EWS मरीजों पर अपोलो अस्पताल की सुप्रीम कोर्ट से मांग

दिल्ली सरकार ने Apollo Hospital को 15 एकड़ भूमि मात्र 1 रुपए प्रति माह के किराए पर पट्टे पर दी है. अस्पताल और स्कूल जैसी संस्थाएं, जिन्हें सरकार से रियायती दरों पर जमीन मिलती है, अपने पट्टे की शर्तों के अनुसार, EWS श्रेणी के लोगों को मुफ्त सेवाएं देनी होती हैं.

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हॉस्पिटल ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. (सांकेतिक तस्वीर: इंडिया टुडे)

दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल ने सुप्रीम कोर्ट (Apollo Hospital in Supreme Court) में एक अर्जी दी है. अस्पताल ने मांग की है कि उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए दी जाने वाली सुविधाओं को कम करने की अनुमति दी जाए.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अपोलो अस्पताल को EWS मरीजों को अस्पतालों में कुछ मुफ्त सुविधाएं देनी होती हैं. क्योंकि सरकार ने अस्पताल को सस्ते दर पर किराए पर जमीन दी है. इसके बावजूद अस्पताल दवाइयां या अन्य चीजें मुफ्त में नहीं देता. सिर्फ उपचार में राहत देता है.

वर्तमान में, अस्पताल को इन-पेशेंट डिपार्टमेंट (IPD) में 33 प्रतिशत और आउट-पेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) में 40 प्रतिशत सेवा EWS वर्ग को देना होता है. IPD में मरीज भर्ती होते हैं जबकि OPD में बिना भर्ती के मरीजों का इलाज और जांच किया जाता है.

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इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल ने शीर्ष अदालत से कहा है कि उन्हें अनुमति दी जाए कि उन्हें EWS के लिए IPD में 10 प्रतिशत और OPD में 25 प्रतिशत सुविधा ही देनी पड़े.

 वर्तमानअस्पताल की मांग
IPD33 %10 %
OPD40 %25 %
अस्पताल ने कहा, ‘सेवाएं कम करेंगे तो दवा मुफ्त देंगे’

इंद्रप्रस्थ मेडिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IMCL) ने 14 मई को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया. उन्होंने कहा कि वो EWS मरीजों को मुफ्त में दवा और कंज्यूमेबल देने को तैयार हैं, अगर वो अपनी IPD सेवाओं का 10 प्रतिशत और OPD की सेवाओं का 25 प्रतिशत ही EWS को दें.

अगर कोर्ट इस मांग को मान लेता है, तो अस्पताल को अब EWS वर्ग के लिए 200 बेड रखने की जरूरत नहीं होगी. इसके बदले उन्हें लगभग 70 बेड ही रखने पड़ेंगे.

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सुप्रीम कोर्ट ने दी थी चेतावनी

25 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अपोलो अस्पताल को एक चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि अस्पताल को दिल्ली सरकार के निर्देश का पालन करते हुए EWS मरीजों को सुविधा देनी है. अगर हॉस्पिटल ऐसा नहीं करता, तो कोर्ट अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) को उसका प्रबंधन अपने हाथ में लेने का आदेश दे सकता है. 

अस्पताल में सबसे बड़ी हिस्सेदारी (26 प्रतिशत) दिल्ली सरकार की है. सरकार ने अस्पताल को 15 एकड़ भूमि मात्र 1 रुपए प्रति माह के किराए पर पट्टे पर दी है. अस्पताल और स्कूल जैसी संस्थाएं, जिन्हें सरकार से रियायती दरों पर जमीन मिलती है, अपने पट्टे की शर्तों के अनुसार, EWS श्रेणी के लोगों को मुफ्त सेवाएं देनी होती हैं.

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