मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में गंदे पानी की वजह से हुई मौतों की असली वजह सामने आ चुकी है. लैब रिपोर्ट में पता चला है कि भागीरथपुरा इलाके में पीने का पानी दूषित होने से ही उल्टी और दस्त का प्रकोप फैला था. रिपोर्ट ने ये भी पुष्टि की है कि पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण इसमें सीवर का पानी मिल गया था.
इंदौर में गलती कहां हुई? पता चला, भागीरथपुरा की घटना पर लैब रिपोर्ट ने सब खोल दिया
Indore की एक लैब की रिपोर्ट में पता चला है कि भागीरथपुरा इलाके में पीने का पानी दूषित होने से ही उल्टी और दस्त का प्रकोप फैला था. ये सब हुआ कैसे? ये भी सामने आया है.


इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉक्टर माधव प्रसाद हसानी ने पत्रकारों को बताया कि शहर के एक मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट से पुष्टि हुई है कि भागीरथपुरा इलाके में पाइपलाइन में लीक के कारण पीने का पानी दूषित हो गया था. इसी इलाके से बीमारी के मामले सामने आए हैं. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने लैब रिपोर्ट की डिटेल्स को शेयर नहीं किया. अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में पुलिस चौकी के पास मेन पाइपलाइन में रिसाव मिला है. उस जगह पर एक टॉयलेट बना हुआ था. अधिकारियों का दावा है कि इसी लीक की वजह से इलाके के पानी की सप्लाई दूषित हो गई.
एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय दुबे के अनुसार, भागीरथपुरा में पीने के पानी की पूरी सप्लाई पाइपलाइन की जांच की जा रही है. ताकि ये पता चल सके कि कहीं और भी लीकेज तो नहीं है. उन्होंने बताया कि जांच के बाद गुरुवार, 1 दिसंबर को भागीरथपुरा के घरों में पाइपलाइन के माध्यम से स्वच्छ पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई है. हालांकि, सावधानी के तौर पर लोगों को पानी को उबालकर ही पीने की सलाह दी गई है.
अधिकारी ने ये भी कहा कि पानी के सैंपल लिए गए हैं और उन्हें जांच के लिए भेज दिया गया है. इस घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा की इस जल-त्रासदी से मिले सबकों के आधार पर पूरे राज्य के लिए एक SOP जारी की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर दुबे ने खुद भागीरथपुरा का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया. पानी की सप्लाई व्यवस्था पर अब और सख्त निगरानी रखी जा रही है, ताकि आगे कोई प्रकोप न फैले.
NHRC का नोटिसराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है. आयोग ने कहा कि स्थानीय लोगों ने कई दिनों से दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायत की थी, लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की. वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उल्टी-दस्त के इस प्रकोप को आपातकाल जैसी स्थिति बताया है. उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है. मुख्यमंत्री ने शहर के विभिन्न अस्पतालों का दौरा किया और मरीजों की हालत के बारे में जानकारी ली. बाद में उन्होंने उच्चस्तरीय बैठक में स्थिति की समीक्षा भी की.
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि गुरुवार, 1 दिसंबर को भागीरथपुरा में 1,714 घरों के सर्वे में कुल 8,571 लोगों की जांच की गई. इनमें से 338 लोगों में उल्टी-दस्त के हल्के लक्षण पाए गए, जिन्हें घर पर ही प्राथमिक इलाज दिया गया. विभाग के अनुसार, 8 दिनों में अब तक 272 मरीजों को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती किया गया है. जिनमें से 71 मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं. फिलहाल 201 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं. जिनमें से 32 मरीजों का ICU में इलाज जारी है.
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