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इंडियन नेवी को मिला INS अंजदीप, ये 'डॉल्फिन हंटर' जहाज PAK-चीन के नए प्लान पर फेरेगा पानी

INS Anjadip इंडियन नेवी के ASW-SWC प्रोजेक्ट का हिस्सा है. यह जहाज तट के पास छिपी दुश्मन की सबमरींस को खोजने और मारने में माहिर है. इस जहाज में ‘अभय’ नाम का सोनार लगा है, जो पानी के अंदर छिपी सबमरींस का पता लगाता है. और भी कई बड़ी खासियतें हैं इस जहाज में.

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इंडियन नेवी को INS Anjadip नाम का जहाज मिल गया (PHOTO-X)

27 फरवरी को इंडियन नेवी को एक नया जंगी जहाज मिला है. नाम है आईएनएस अंजदीप (INS Anjadip). इस जहाज का काम दुश्मन की सबमरीन को खोजकर मार गिराना है. चीन-पाकिस्तान के बीच हाल ही में सबमरीन की डील हुई है. चीन ये सबमरींस पाकिस्तान को देगा. 8 सबमरींस की इस डील में पाकिस्तान को पहली सबमरीन 2026 के मध्य तक मिलने की उम्मीद है. ऐसे में एंटी सबमरीन जहाज इंडियन नेवी के लिए अहम हो गए हैं. 

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पुराना जहाज नए अवतार में

इस जहाज का नाम कर्नाटक के कारवार तट के पास स्थित अंजदीप आइलैंड के नाम पर रखा गया है. साल 2003 तक इंडियन नेवी में आईएनएस अंजदीप नाम का जहाज था. उसे 2003 में रिटायर कर दिया गया था. भारत की नेवी में यह परंपरा रही है कि पुराने, रिटायर हो चुके जहाजों को नए सिरे से बनाकर शामिल किया जाता है. नए अंजदीप को पुराने जहाज की विरासत को आगे ले जाने के उद्देश्य से ये नाम दिया गया है.

इस जहाज में ‘अभय’ नाम का सोनार लगा है, जो पानी के अंदर छिपी सबमरींस का पता लगाता है. इसके अलावा इसमें हल्के टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट भी लगे हैं. यह जहाज तटीय इलाकों में निगरानी, सर्च एंड रेस्क्यू जैसे मिशंस में भी काम आ सकता है. इसे डॉल्फिन हंटर भी कहा जाता है. इसका मतलब असली डॉल्फिन का शिकार करना नहीं, बल्कि खामोश सबमरीन को पकड़ना है.

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ASW-SWC प्रोजेक्ट का हिस्सा

यह जहाज एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट यानी ASW-SWC प्रोजेक्ट का हिस्सा है. यह जहाज समुद्र के किनारे और उथले पानी में छिपी दुश्मन सबमरींस को खोजने और मारने में माहिर है. आज की तारीख में समुद्री युद्ध का बड़ा खतरा सबमरींस को माना जाता है. मौका मिलते ही सबमरीन चुपचाप हमला कर सकती है. ऐसे में यह युद्धपोत समय रहते खतरे का पता लगाकर उसे तबाह कर सकता है. इसके नाम में हमने एक शब्द सुना, 'शैलो वाटर्स'. इसका मतलब है कि ये जहाज उथले पानी ने सबमरीन से लड़ने में माहिर है. यानी अगर कोई सबमरीन भारत के तट के नजदीक आई तो इस जहाज को पता चल जाएगा. और वो न सिर्फ पता करेगा, बल्कि समय रहते उन्हें तबाह भी करेगा जिससे वो भारत के नेवल बेस या तट के नजदीक किसी मिलिट्री ठिकाने पर हमला नहीं कर पाएगी.

वाटरजेट प्रोपल्शन- एक शानदार तकनीक

ये जहाज अपनी एक और खासियत के लिए भी जाना जाता है. खासियत है इसमें लगा एक सिस्टम जिसे 'वाटरजेट प्रोपल्शन' कहते हैं. ये पूरी तरह से न्यूटन के तीसरे लॉ पर काम करता है. तीसरा लॉ ये कहता है हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है, और वो भी बिल्कुल बराबर. इसी लॉ का इस्तेमाल वाटरजेट प्रोपल्शन में किया जाता है. नेवल मामलों पर नजर रखने वाली वेबसाइट मरीन इनसाइट के मुताबिक इस सिस्टम में एक पंप के जरिए पानी को खींचा जाता है. इसके बाद इसे एक नोजल से गुजारा जाता है जहां इसे और स्पीड दी जाती है. आखिर में इसे जहाज के पीछे लगे नोजल से पूरे फोर्स से छोड़ा जाता है. इसकी वजह से जहाज आगे बढ़ता है.

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आईएनएस अंजदीप ऐसा जंगी जहाज है जिसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत बनाया गया है. यानी इसमें सरकारी और प्राइवेट, दोनों निर्माता शामिल हैं. इसे कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिप बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स और एलएंडटी शिपयार्ड ने मिलकर तैयार किया है. यह करीब 77 मीटर लंबा है. इसकी अधिकतम रफ्तार करीब 46 किलोमीटर प्रतिघंटा है. इसमें हाई-स्पीड वॉटर-जेट सिस्टम लगा है, जिससे यह तेजी से दिशा बदल सकता है. इसकी समुद्र में रहने की क्षमता लगभग 3,333 किलोमीटर तक है. इस जहाज को नेवी की पूर्वी कमान (Eastern Command) में तैनात किया जाएगा. इससे तमिलनाडु और बंगाल की खाड़ी के आसपास की सुरक्षा और मजबूत होगी.

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