भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत टल गई है. दोनों देशों के चीफ नेगोशिएटर्स के बीच सोमवार, 23 फरवरी को वाशिंगटन में बातचीत होनी थी. इसी महीने दोनों देशों के बीच एक ट्रेड फ्रेमवर्क पर सहमति बनी थी, जिसमें तय हुआ था कि अमेरिका जाने वाले भारतीय सामानों पर 18 फीसदी टैरिफ लगेगा. अब भारत और अमेरिका ने मिलकर तय किया है कि ये मीटिंग किसी और दिन की जाएगी. फिलहाल, नई तारीख तय नहीं की गई है.
US सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को मिले झटके का असर दिखना शुरू, टली भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर मीटिंग
India US Talks: अमेरिकी Surpeme Court ने 1977 के IEEPA कानून के तहत लगाए तमाम टैरिफ को अवैध करार दिया, तो Donald Trump ने एक अलग कानून के जरिए सभी देशों पर 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ ठोक दिया. इस बीच भारत-अमेरिका की ट्रेड वार्ता टलने की खबर आई है.


यह बदलाव ऐसे समय पर हुआ है, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के लगाए तमाम टैरिफ को रद्द कर दिया. ये टैरिफ 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) लगाए गए थे. इनमें 'रेसिप्रोकल टैरिफ' और 'लिबरेशन डे' से जुड़े आयात शुल्क शामिल हैं. हालांकि, फैसले के बावजूद ट्रंप ने साफ किया है कि भारत के साथ अंतरिम डील के तहत भारतीय सामानों पर 18 फीसदी टैरिफ ही लगेगा.
केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया,
"इंडिया-अमेरिका ट्रेड डील के लिए इंडियन नेगोशिएटर्स की टीम के अमेरिकी दौरे के बारे में दोनों देशों का मानना है कि इंडियन चीफ नेगोशिएटर और टीम का प्रस्तावित दौरा तब तय किया जाए जब दोनों पक्षों को ताजा डेवलपमेंट और उसके असर को समझने का समय मिल जाए. बातचीत को आपसी सहमति से तय तारीख पर रीशेड्यूल किया जाएगा."
भारतीय टीम को वाशिंगटन में 23 फरवरी से तीन दिन की मीटिंग शुरू करनी थी. वाणिज्य मंत्रालय में जॉइंट सेक्रेटरी दर्पण जैन इस एग्रीमेंट के लिए भारत के चीफ नेगोशिएटर हैं.
ट्रंप ने फिर बढ़ाया टैरिफ
अमेरिकी टॉप कोर्ट के फैसले के बाद डॉनल्ड ट्रंप ने 21 फरवरी को ट्रेड एक्ट, 1974 के सेक्शन 122 के तहत सभी देशों पर 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ लगाया. 150 दिन बाद इस टैरिफ को जारी रखने के लिए अमेरिकी पार्लियामेंट 'कांग्रेस' की मंजूरी जरूरी होगी.
इस बीच, 21 फरवरी की रात को ही ट्रंप ने टैरिफ की दर 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी करने का ऐलान किया है. 15 फीसदी टैरिफ लागू हुआ, तो यह मौजूदा मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) रेट या अमेरिका में इंपोर्ट डट्यूटी से अलग वसूला जाएगा.
वीडियो: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप के टैरिफ को रद्द कराने वाले नील कात्याल कौन हैं?














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