इंसान जीवन से क्या चाहता है? खेती की जमीन से बायपास निकल जाए. न निकले तो प्लॉट के बगल से हाइवे निकल जाए. कभी निकला? नहीं? मुआवजे के पैसे से SUV आई! नहीं. अब चलिए एमपी. मध्य प्रदेश में जमीन का एक ऐसा खेल सामने आया है जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर अफसर लोग कितने दूर की चाल चलते हैं. मामला भोपाल के कोलार इलाके के गराड़ी घाट गांव का है. यहां करीब 5 एकड़ कृषि जमीन की खरीद हुई. लेकिन कहानी सिर्फ जमीन खरीदने की नहीं. असली कहानी है उसकी टाइमिंग की.
50 अफसरों ने जहां जमीन खरीदी, वहीं निकला बायपास, 5 करोड़ की प्रॉपर्टी 65 करोड़ की हो गई
MP land scam: मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित कोलार इलाके के गराड़ी घाट गांव से एक मामला सामने आया है. यहां करीब 5 एकड़ कृषि जमीन की खरीद हुई. डॉक्युमेंट्स में दिखाया गया कि इस जमीन को 50 हिस्सों में खरीदा गया. मतलब 50 लोगों ने मिलकर इंवेस्ट किया लेकिन जब कागजों को थोड़ा गहराई से देखा गया तो पता चला कि असल में इसके पीछे 41 अलग - अलग खरीदार थे.


मामले की शुरुआत 4 अप्रैल 2022 से होती है. दैनिक भास्कर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक इस दिन एक जमीन की रजिस्ट्री की जाती है. कुल जमीन करीब 2.023 हेक्टेयर यानी लगभग 5 एकड़ की थी. डॉक्युमेंट्स में दिखाया गया कि इस जमीन को 50 हिस्सों में खरीदा गया. मतलब 50 लोगों ने मिलकर इंवेस्ट किया. लेकिन जब कागजों को थोड़ा गहराई से देखा गया तो पता चला कि असल में इसके पीछे 41 अलग-अलग खरीदार थे.
रिपोर्ट के मुताबिक ये कोई आम खरीदार नहीं थे. इनमें कई IAS और IPS अफसर शामिल थे. सिर्फ मध्य प्रदेश कैडर के ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, हरियाणा और दिल्ली में तैनात अफसरों के नाम भी सामने आए. यानी पूरा ऑफिसर्स क्लब मिलकर जमीन में इन्वेस्ट कर रहा था. इस जमीन की रजिस्ट्री उस वक्त करीब 5 करोड़ 50 लाख रुपए में हुई थी जबकि बाजार कीमत लगभग 7 करोड़ 78 लाख रुपए बताई गई. वहीं IPR में इसे लाइक माइंडेड ऑफिसर्स का इंवेस्टमेंट बताया गया.
अब तक सब कुछ लीगल इंवेस्टमेंट जैसा लग रहा था लेकिन असली मामला कुछ और ही निकला.
जमीन खरीदने के करीब 16 महीने बाद यानी 31 अगस्त 2023 को मध्य प्रदेश कैबिनेट ने 3200 करोड़ रुपए के वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी. ये जो नया बायपास बनने वाला है वो इन अफसरों की खरीदी गई जमीन से सिर्फ 500 मीटर दूर गुजरने वाला है.
अब यहीं से मामले में कुछ गड़बड़ लगनी शुरू हो गई. क्योंकि आम आदमी को तो सड़क बनने की खबर तब पता चलती है, जब जेसीबी उसके मोहल्ले में पहुंच जाती है. लेकिन यहां जमीन पहले खरीद ली गई और फिर उसके पास से बायपास गुजरने की मंजूरी आ गई. फिर आया जून 2024. इस जमीन का लैंड यूज बदल दिया गया. यानी जो जमीन पहले कृषि भूमि थी उसे आवासीय जमीन बना दिया गया. बस यहीं से खेल पूरी तरह पलट गया.
जो जमीन पहले खेती की थी, वो अब कॉलोनी काटने लायक हो गई. नतीजा? उसकी कीमत में जबरदस्त उछाल आया. रिपोर्ट के मुताबिक अब उसी जमीन की कीमत 55 करोड़ से 65 करोड़ रुपए के बीच पहुंच चुकी है. यानी करीब 11 गुना तक फायदा. अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या अफसरों को पहले से जानकारी थी कि यहां बायपास आने वाला है? क्या इसी जानकारी के आधार पर ही इंवेस्टमेंट किया गया? या फिर ये सिर्फ सही समय पर सही जगह इंवेटमेंट वाली कहानी है?
फिलहाल यही बहस चल रही है. सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि सरकारी सिस्टम के भीतर बैठे लोग जमीन में ऐसा दांव खेल गए कि करोड़ों का फायदा हो गया. अब मामला सिर्फ जमीन का नहीं रह गया है. सवाल सिस्टम की पारदर्शिता, अंदरूनी जानकारी और अफसरों की जवाबदेही पर भी खड़े हो रहे हैं.
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