कोलकाता में ED की छापेमारी के बाद पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC अब सीधे कटघरे में है. वजह है 13.5 करोड़ रुपए का एक ऐसा लोन, जिसका सोर्स कागजों में तो है, लेकिन जमीन पर नहीं.
I-PAC ने जिस कंपनी से 13.5 करोड़ के लोन का दावा किया वो कागजों पर ही नहीं
I-PAC पर 13.5 करोड़ रुपए के कथित लोन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है, क्योंकि इंडियन एक्सप्रेस की जांच में पता चला कि जिस कंपनी Ramasetu Infrastructure India से लोन लेने का दावा किया गया, वह ROC के रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं है. इसी नाम से मिलती जुलती एक कंपनी 2018 में बंद हो चुकी थी और उसके शेयरहोल्डर्स ने किसी भी तरह के लोन से इनकार किया है.
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मामला सामने आया है इंडियन एक्सप्रेस के सीनियर जर्नलिस्ट श्यामलाल यादव की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट से. रिपोर्ट कहती है कि I-PAC ने साल 2021 में जिस कंपनी से 13.5 करोड़ का अनसिक्योर्ड लोन लेने का दावा किया, वो कंपनी सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं है.
ED की रेड से शुरू हुआ पूरा बवाल8 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय ने कोलकाता में I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापा मारा. इस कार्रवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंच गईं. मामला पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक गया. इसी बीच I-PAC के फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन पर भी नजर गई.
I-PAC ने 17 दिसंबर 2021 को ROC में दाखिल दस्तावेज में बताया कि उसे “Ramasetu Infrastructure India Private Limited” से 13.5 करोड़ रुपए का लोन मिला. कंपनी का पता दिया गया, थर्ड फ्लोर, अशोका प्लाजा, दिल्ली रोड, रोहतक, हरियाणा.
लेकिन जब इंडियन एक्सप्रेस की टीम वहां पहुंची, तो ऐसा कोई ऑफिस नहीं मिला. और जब ROC के रिकॉर्ड खंगाले गए, तो पता चला कि इस नाम की कोई कंपनी कभी रजिस्टर ही नहीं हुई.
मिलता जुलता नाम, लेकिन तीन साल पहले बंदहां, इसी पते पर एक मिलते जुलते नाम की कंपनी जरूर थी, Ramsetu Infrastructure India Private Limited. ये कंपनी 2013 में बनी थी, लेकिन अगस्त 2018 में ही ROC ने इसे स्ट्राइक ऑफ कर दिया था. यानी I-PAC के बताए गए लोन से करीब तीन साल पहले कंपनी बंद हो चुकी थी.
इसके बावजूद I-PAC ने जून 2025 में जानकारी दी कि 2024-25 में इस लोन में से 1 करोड़ रुपए चुका दिए गए हैं और अब भी 12.5 करोड़ बकाया हैं.
शेयरहोल्डर्स बोले, हमें कुछ नहीं पताRamsetu Infrastructure के छह शेयरहोल्डर्स से इंडियन एक्सप्रेस ने बात की. सभी का एक ही जवाब था. कंपनी कुछ साल चली, कोई बड़ा बिजनेस नहीं हुआ और बंद हो गई. I-PAC को लोन देने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है.
किसी ने कहा जमीन के कारोबार के लिए कंपनी बनाई थी, सौदा फेल हुआ. किसी ने कहा कंपनी बंद होने के बाद कोई ट्रांजैक्शन ही नहीं हुआ. साफ है, लोन की कहानी से सबने पल्ला झाड़ लिया.
ROC फाइलिंग में भी कोई सुराग नहींइंडियन एक्सप्रेस ने इसी तरह के नाम वाली आठ और कंपनियों की ROC फाइलिंग भी जांची. 2021 के बाद की किसी भी फाइलिंग में 13.5 करोड़ रुपए के ऐसे किसी लोन का जिक्र नहीं मिला, जैसा I-PAC ने अपने दस्तावेज में बताया था.
रजिस्टर्ड पते पर भी सन्नाटाअशोका प्लाजा के मैनेजर ने साफ कहा कि पिछले छह सालों में उन्होंने Ramsetu या Ramasetu नाम की कोई कंपनी वहां काम करते नहीं देखी. मौजूदा मालिकों और कर्मचारियों ने भी यही कहा.
I-PAC की चुप्पीइंडियन एक्सप्रेस ने इस पूरे मामले पर I-PAC के को फाउंडर और डायरेक्टर प्रतीक जैन से सवाल पूछे, लेकिन न ईमेल का जवाब मिला, न फोन उठा. कंपनी की चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेटरी ने भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
I-PAC कौन हैROC रिकॉर्ड के मुताबिक I-PAC की स्थापना 2015 में पटना में हुई थी. फरवरी 2022 में इसका रजिस्टर्ड ऑफिस कोलकाता शिफ्ट किया गया. कंपनी के डायरेक्टर और शेयरहोल्डर हैं प्रतीक जैन, रिशिराज सिंह और वाइनेश चंदेल.
कुल मिलाकर मामला क्या हैI-PAC का दावा है कि उसने 13.5 करोड़ का लोन लिया. लेकिन जिस कंपनी से लेने की बात कही जा रही है, वो न कागजों में मिल रही है, न जमीन पर. शेयरहोल्डर्स इनकार कर रहे हैं, ROC रिकॉर्ड खामोश है और I-PAC खुद कुछ बोल नहीं रहा.
अब सवाल सीधा है. ये 13.5 करोड़ आखिर आए कहां से. और यही सवाल ED की फाइल में सबसे ऊपर लिखा हुआ है.
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