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हिमाचल में शिमला के SP ने DGP के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, इंजीनियर विमल नेगी मर्डर केस और उलझा

Himachal Pradesh: Shimla SP संजीव गांधी ने DGP पर आरोप लगाया कि उन्होंने कोर्ट में गलत और गैर-जिम्मेदार हलफनामा दाखिल किया. इसकी वजह से Vimal Negi की मौत के मामले की जांच CBI के पास चली गई.

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शिमला के SP संजीव कुमार और हिमाचल प्रदेश पुलिस के DGP डॉ. अतुल वर्मा. (ANI/HP Police)
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अमन कुमार भारद्वाज

हिमाचल प्रदेश में पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) के मुख्य अभियंता (Chief Engineer) विमल नेगी की मौत के मामले में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इस बार यह विवाद राज्य पुलिस विभाग के अंदर ही दिख रहा है. शिमला के सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) संजीव कुमार गांधी और डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) डॉ. अतुल वर्मा आमने-सामने आ गए हैं.

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इंडिया टुडे से जुड़े अमन कुमार भारद्वाज की रिपोर्ट के मुताबिक, SP संजीव गांधी ने DGP पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि उन्होंने इस संवेदनशील मामले की जांच ईमानदारी से की, लेकिन DGP ने कोर्ट में गलत और गैर-जिम्मेदार हलफनामा दाखिल किया. इसकी वजह से विमल नेगी की मौत के मामले की जांच CBI के पास चली गई.

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में खबर है कि अपने और अन्य सीनियर अधिकारियों पर लगे आरोपों के बाद डीजीपी डॉ. अतुल वर्मा ने हिमाचल प्रदेश सरकार से शिमला एसपी संजीव कुमार गांधी को तत्काल निलंबित करने की सिफारिश की है. रविवार, 25 मई को उन्होंने इसके लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को एक पत्र लिखा है.

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दरअसल, शनिवार, 24 मई को SP गांधी ने DGP पर लगाया कि उन्होंने जानबूझकर जांच को प्रभावित करने की कोशिश की और अपने पसंदीदा अफसरों को जांच सौंप दी. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा,

"जिन संदिग्ध हालात में विमल नेगी की मौत हुई, ये एक बहुत बड़ा चिंता का विषय है...इसकी बहुत गंभीरता से जांच होनी चाहिए...हमारी जांच टीम, जो अनुभवी अधिकारियों की टीम है, वो जांच कर रही है...हम पूरी तरह से प्रतिबद्ध थे और हमने प्रक्रिया और जो स्थापित प्रोसीजर ऑफ लॉ है, उसके अनुसार जांच की, लेकिन पुलिस महानिदेशक (DGP) ने एक शपथ पत्र (हलफनामे) के माध्यम से इस जांच को प्रभावित करने की कोशिश की और बहुत ही गैर-जिम्मेदाराना तरीके से ऐसा किया. उन्होंने अपने स्वार्थ और व्यक्तिगत कारणों से ऐसा किया...उनके खिलाफ शिमला पुलिस में हमारे पास मामले पंजीकृत हैं, हो सकता है उनकी वजह से उन्होंने इस प्रकार की जांच के साथ छेड़छाड़ की."

SP गांधी ने यह भी कहा कि DGP के निजी स्टाफ ने CID से जुड़ी एक गोपनीय चिट्ठी लीक की और कोर्ट को गुमराह करने वाला हलफनामा सौंपा.

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उन्होंने इससे पहले एक कारोबारी निशांत शर्मा के केस का भी जिक्र करते हुए बताया कि तब के DGP संजय कुंडू के कार्यकाल में निष्पक्ष हलफनामा कोर्ट में दिया गया था. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा DGP ने अपने नीचे काम करने वाले अधिकारियों पर झूठी रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाया.

गांधी ने खुलासा किया कि उन्होंने राज्य सरकार को एक पत्र के जरिए बताया था कि कुछ अफसरों को फंसाने की साजिश की जा रही है और इसके लिए नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) की मदद से फर्जी सबूत बनाए गए. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने राज्य सरकार और महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) को इस बारे में जानकारी दी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.

एसपी संजीव कुमार गांधी ने मीडिया को बताया,

"मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि एक मामला जो है पुलिस स्टेशन जो हमारा छोटा शिमला है उसमें CID के द्वारा पंजीकृत कराया गया और उस मामले में पुलिस महानिदेशक (DIG) उनके निजी स्टाफ का जो है, वो जिक्र आया इन्वेस्टिगेशन के दौरान. लेकिन जब उनके निजी स्टाफ को हमने पूछताछ करने की कोशिश की, उनके PA को पूछताछ करने की कोशिश की तो उन्होंने इन्वेस्टिगेशन में बाधा पहुंचाई, जो कि उनको ऐसा नहीं करना चाहिए था. उन्होंने अपनी ऑफिस पोजिशन का दुरुपयोग किया और उस इन्वेस्टिगेशन को जो है वो CID में ट्रांसफर कर दिया. बहुत ही आश्चर्यजनक है, वे अपनी मर्जी के अधिकारियों से इन्वेस्टिगेशन कराना चाहते थे."

SP ने राज्य के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने रामकृष्ण आश्रम जमीन विवाद की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की. गांधी ने कहा कि उन्हें मुख्य सचिव ने अपने दफ्तर बुलाकर साफ कहा था कि वे आश्रम प्रमुख से पूछताछ ना करें और इस मामले को आगे ना बढ़ाएं.

गांधी ने बताया कि 2021-22 की पुलिस भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों की शिकायत उन्होंने आधिकारिक तौर पर की थी. तभी से कुछ अधिकारी उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं. लेकिन उन्होंने साफ कहा कि वे किसी के दबाव में नहीं झुकेंगे और न्याय के लिए लड़ते रहेंगे. एसपी संजीव गांधी ने कहा,

"मैं 25 साल से ईमानदारी से सेवा कर रहा हूं. अगर कोई मेरी ईमानदारी पर शक करता है तो मैं इस्तीफा देना पसंद करूंगा, लेकिन समझौता नहीं करूंगा."

कोर्टरूम वीडियो से और बढ़ा विवाद

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक सुधीर शर्मा ने एक कोर्टरूम की सुनवाई का वीडियो शेयर किया, जिसमें SP गांधी के व्यवहार पर सवाल उठाए गए थे. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए SP गांधी ने कहा,

"विधायक सुधीर शर्मा पिछले साल फरवरी में राज्यसभा चुनाव के दौरान विधायकों की संदिग्ध "खरीद-फरोख्त" में मेन मास्टरमाइंड थे और उन पर जानबूझकर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने और बदनाम करने का आरोप है. जिसकी जांच चल रही है, मैंने विधायक के खिलाफ कॉपीराइट और सूचना अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है."

बीजेपी विधायक ने भेजा लीगल नोटिस

बीजेपी विधायक सुधीर शर्मा ने पलटवार करते हुए SP गांधी को लीगल नोटिस भेजा है. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट खुद कोर्टरूम की लाइव स्ट्रीमिंग करता है. SP गांधी बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं. उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव से जुड़ी FIR में उनका नाम नहीं है और ना ही उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया है.

विमल नेगी मौत का मामला CBI के पास

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने अब विमल नेगी की रहस्यमयी मौत के मामले की जांच CBI को सौंप दी है. नेगी की पत्नी ने याचिका दायर कर जांच में निष्पक्षता को लेकर चिंता जताई थी. कोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि अब इस जांच में हिमाचल प्रदेश कैडर का कोई भी अफसर शामिल नहीं होगा.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान DGP अतुल वर्मा ने शिमला पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच की 'निष्पक्षता' पर सवाल उठाए. राज्य के महाअधिवक्ता अनूप कुमार रतन ने SIT की जांच का बचाव किया. DGP ने आरोप लगाया कि 18 मार्च को विमल नेगी के शव से बरामद पेन ड्राइव को एक ASI ने छिपा दिया था और उसे फॉर्मेट भी कर दिया था, जो एक गंभीर कदाचार है.

हालांकि, शिमला पुलिस इस मामले की जांच अपने पास रखने के लिए हाई कोर्ट में एक रिव्यू पिटिशन दाखिल कर सकती है.

नेगी 10 मार्च को लापता हुए थे और 18 मार्च को उनकी लाश गोबिंद सागर झील से मिली थी. उनकी पत्नी ने आरोप लगाया कि HPPCL में विमल नेगी के साथ उत्पीड़न किया जाता था और वे मानसिक तनाव से परेशान थे. इस मामले में HPPCL के डायरेक्टर देसराज, दूसरे डायरेक्टर शिवम प्रताप सिंह, पूर्व एमडी IAS हरिकेश मीणा के खिलाफ FIR दर्ज कराई है.
 

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