उत्तर प्रदेश में फर्जी डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल कर असिस्टेंट टीचर बने लोगों पर सख्त कार्रवाई होने जा रही है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले को लेकर बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने राज्य के सभी असिस्टेंट टीचरों के डॉक्यूमेंट्स की जांच के आदेश दिए हैं.
यूपी में फर्जी दस्तावेज़ों पर बने टीचरों पर गिरेगी गाज, हाई कोर्ट का बड़ा आदेश
प्रिंसिपल सेक्रेटरी, बेसिक एजुकेशन को आदेश दिया कि गया कि राज्य में सभी असिस्टेंट टीचर्स की नियुक्तियों की जांच कराई जाए. और ये जांच 6 महीने के अंदर पूरी हो.


लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक ये फैसला रविवार, 1 फरवरी को जस्टिस मंजू रानी चौहान की बेंच ने दिया. कोर्ट महिला टीचर गरिमा सिंह से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी. गरिमा को जुलाई 2010 में असिस्टेंट टीचर के पद पर नियुक्त किया गया था. उनके डॉक्यूमेंट्स की जांच जॉइनिंग के समय हो चुकी थी. लगभग 15 साल तक उन्होंने नौकरी भी की.
साल 2025 में उनके एजुकेशनल सर्टिफिकेट और डोमिसाइल सर्टिफिकेट की दोबारा जांच हुई. तो पता चला कि ये डॉक्यूमेंट्स फर्जी थे. BSA ने तुरंत उनकी नियुक्ति रद्द कर दी और सैलरी रिकवरी का ऑर्डर दिया. इसके बाद गरिमा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की.
उनका कहना था कि ये कार्रवाई मनमानी है, उन्हें सुनवाई का मौका नहीं दिया गया और प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ. लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि फ्रॉड से मिली नौकरी कानून की नजर में मान्य नहीं होती. ऐसे मामलों में जांच की जरूरत नहीं पड़ती. यूपी गवर्नमेंट सर्वेंट (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1999 के तहत फ्रॉड वाली नियुक्ति पर सीधे कार्रवाई हो सकती है.
जज ने क्या कहा?रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस चौहान ने कहा कि राज्य में असिस्टेंट टीचरों की नियुक्तियां फर्जी सर्टिफिकेट और डॉक्यूमेंट्स के आधार पर होना चिंताजनक है. जज ने कहा,
“कई टीचर सालों तक नौकरी करते रहते हैं, जबकि अधिकारी मिलीभगत या लापरवाही से चुप रहते हैं. इससे शिक्षा व्यवस्था की जड़ें हिल जाती हैं और बच्चों के हितों को गहरा नुकसान पहुंचता है.”
कोर्ट ने आगे कहा,
"अधिकारी जब कोई एक्शन नहीं लेते तो छात्रों के हित खतरे में रहते हैं. कोर्ट के लिए छात्र सर्वोपरि हैं."
ये देखते हुए कोर्ट ने सख्त आदेश दिया. प्रिंसिपल सेक्रेटरी, बेसिक एजुकेशन को आदेश दिया गया कि राज्य में सभी असिस्टेंट टीचरों की नियुक्तियों की जांच कराई जाए. और ये जांच 6 महीने के अंदर पूरी हो. अगर जांच में फर्जी डॉक्यूमेंट्स पाए जाते हैं, तो टीचर की नियुक्ति तुरंत रद्द की जाए. अब तक मिली पूरी सैलरी रिकवर की जाए. और इस फ्रॉड में शामिल अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलना सबसे बड़ा मुद्दा है. फर्जी टीचरों से शिक्षा की क्वालिटी पर असर पड़ता है, इसलिए सिस्टम को ठीक करना जरूरी है.
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