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प्राइवेट प्लेयर्स बनाएंगे भारत का स्टील्थ फाइटर जेट, HAL को इस वजह से सरकार ने किया आउट

AMCA भारत का स्वदेशी 5th Generation Stealth Fighter Jet है. HAL की जगह इस बार सरकार ने प्राइवेट प्लेयर्स पर भरोसा जताया है. इस प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाने की आखिरी तारीख 27 जुलाई, 2026 रखी गई है. पर सवाल ये कि HAL को रेस से बाहर क्यों किया गया.

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एयरो इंडिया में AMCA का मॉडल दिखाया गया था (PHOTO- Ministry Of Defence)

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  • सरकार ने भारतीय पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट AMCA प्रोजेक्ट के लिए प्राइवेट कंपनियों से बोली लगाने के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया है।
  • हालांकि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भारत की प्रमुख सैन्य विमान निर्माता कंपनी है, पर डिलीवरी में लगातार देरी के कारण सरकार ने AMCA परियोजना में उसे शामिल नहीं किया।
  • यह प्रोजेक्ट अगले सात वर्ष में पूरा करना है, जिसमें पहले 30 महीने के भीतर पहला प्रोटोटाइप बनाना होगा, और चयनित कंपनी को सभी शर्तें पूरी करते हुए 1800 टेस्ट उड़ानें पूरी करनी होंगी।

एक जमाना था जब तीर-तलवार से जंग लड़ी जाती थी. आज के समय में उसकी जगह ड्रोन्स और फाइटर जेट्स ने ले ली है. एक चीज है जिससे हर फाइटर पायलट बचना चाहता है. वो है दुश्मन के रडार पर दिखना. मॉडर्न जमाने के स्टेल्थ तकनीक वाले फाइटर जेट्स की ये खूबी होती है कि वो रडार पर एक चिड़िया से भी छोटे दिखते हैं. फिलहाल अमेरिका, रूस और चीन ऐसे जेट्स ऑपरेट कर रहे हैं. इस बीच भारत भी पीछे नहीं है. वो भी अपना स्टेल्थ फाइटर बना रहा है जिसे एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, शॉर्ट में AMCA कहा जाता है. ये एक पांचवी पीढ़ी (Fifth Generation Stealth Fighter Jet) का फाइटर जेट होगा. खबर है कि सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए प्राइवेट प्लेयर्स से बोली लगाने को कहा है. यानी सालों तक एविएशन के क्षेत्र में काम करने वाली सरकारी कंपनी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) इस प्रोजेक्ट से दूर हो गई है.

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सरकार ने AMCA के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी RFP जारी कर दी है. RFP में ऐसे वेंडर्स को आमंत्रित किया जाता है जो कॉन्ट्रैक्ट पाने के योग्य होते हैं. इसमें क्वालिटी, तकनीकी जानकारी, डिलीवरी की टाइमलाइन जैसी चीजों की जानकारी होती है.

HAL पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

HAL भारत की टॉप कंपनियों में से एक है. इंडियन एयरफोर्स के लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस (LCA Tejas) को भी HAL ही बनाती है. लेकिन इस कंपनी पर अक्सर डिलीवरी में देरी को लेकर सवाल उठते रहे हैं. लेकिन ये सिर्फ सुनी-सुनाई बात नहीं है. इंडियन एयरफोर्स के प्रमुख, एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह खुद इस बात को उठा चुके हैं. फरवरी 2025 में एयरो इंडिया के दौरान उनका एक वीडियो सामने आया जिसमें वो HAL के अधिकारियों से बात कर रहे थे. एयर चीफ मार्शल ने उनसे कहा था,

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'फिलहाल, मैं HAL पर भरोसा नहीं कर रहा हूं, जो कि बहुत गलत बात है. HAL हमारी अपनी कंपनी है, हम सबने वहां काम किया है. मैंने खुद वहां सेवाएं दी हैं. पर मुझे लगता है कि हम मिशन मोड में नहीं हैं. HAL बस ‘सब कुछ हो जाएगा' वाले ढर्रे पर चल रही है.'

ये नाराजगी और शिकायत लाजमी थी क्योंकि HAL ने डिलीवरी में जो देरी की, उसका सीधा असर एयरफोर्स की क्षमता पर पड़ा. इंडिया की 2-फ्रंट सिचुएशन को देखते हुए इंडियन एयरफोर्स के पास 42 स्क्वाड्रन स्वीकृत हैं. यानी कायदे से एयरफोर्स के पास 42 स्क्वाड्रन होने चाहिए. लेकिन इंडियन एयरफोर्स फिलहाल सिर्फ 29 स्क्वाड्रन के साथ ऑपरेट कर रही है. अगर समय पर एयरफोर्स को LCA Tejas डिलीवर किए जाते तो स्क्वाड्रन का नंबर इतना नहीं गिरता.

AMCA के मामले में कोई चांस नहीं लेना चाहती सरकार

Tejas के अनुभवों को देखते हुए सरकार AMCA पर कोई रिस्क नहीं लेना चाहती. वजह है लगातार बढ़ते और अपग्रेड होते हुए खतरे. लिहाजा अब सरकार ने HAL की जगह प्राइवेट प्लेयर्स को AMCA प्रोजेक्ट में शामिल करने का फैसला किया है. रक्षा सूत्रों के मुताबिक इसके लिए तीन कंसोर्टियमों (बिजनेस ग्रुप्स) को शॉर्टलिस्ट किया है. ये तीन कंसोर्टियम हैं -

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  1. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड 
  2. लार्सन एंड ट्यूब्रो (L&T) + भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) 
  3. भारत फोर्ज + BEML
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AMCA की फुल स्केल मॉडल (PHOTO-PIB)
AMCA बनाना है तो शर्तें पूरी करनी होंगी

इस फाइटर जेट के मामले में सरकार बहुत सोच-समझकर आगे बढ़ रही है. चूंकि भारत को ये जेट अगले कुछ सालों में चाहिए और क्वालिटी से समझौता करने का सवाल ही नहीं है. ऐसे में सरकार ने बिडिंग यानी बोली जीतने वाली कंपनी के लिए कुछ शर्तें रखी हैं. जिस भी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट के लिए चुना जाएगा उसे सारी शर्तों को पूरा करना होगा. जैसे -

  • चुनी गई कंपनी को विमान के ढांचे से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, इंजन से जुड़े सिस्टम, फ्यूल सिस्टम और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम तक सब तैयार करना होगा. 
  • कंपनी को टेस्टिंग के लिए जरूरी सुविधाएं और ग्राउंड सपोर्ट वाला इंफ्रास्ट्रक्चर भी बनाना होगा. 
  • रक्षा मंत्रालय ने इस पूरे प्रोग्राम के लिए सात साल का समय तय किया है. 
  • पहला प्रोटोटाइप, खरीद का आदेश मिलने के 30 महीने के भीतर उड़ान भरना चाहिए. 
  • 64 महीनों के अंदर सभी पांच प्रोटोटाइप उड़ान के लिए तैयार होने चाहिए. 
  • कंपनी को 84 महीनों के भीतर करीब 1800 टेस्ट उड़ानें पूरी करनी होंगी. 
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AMCA के लिए जारी RFP में शर्तें रखी गई हैं

इस प्रोजेक्ट के लिए बोली जमा करने की आखिरी तारीख 27 जुलाई 2026 रखी गई है. इंडियन एयरफोर्स फिलहाल मिग-29, सुखोई Su-30MKI, रफाल, मिराज 2000, जगुआर और तेजस जैसे जेट्स का इस्तेमाल कर रही है. इनमें कई विमान जैसे जगुआर पुराने हो चुके हैं. इसलिए जेट्स की कमी को जल्द से जल्द भरना एयरफोर्स की प्राथमिकता है. हाल ही में 114 रफाल की डील भी हुई है. लेकिन ये जेट्स भी 2028-29 से पहले नहीं मिलेंगे. और रफाल स्टेल्थ तकनीक वाला जेट भी नहीं है. ऐसे में ये जरूरी है कि भारत अपने स्वदेशी AMCA पर फोकस करे जिससे आने वाले 7-8 सालों में ये विमान प्रोडक्शन के लिए तैयार हो जाएं.

वीडियो: HAL के MD ने फाइटर जेट तेजस के क्रैश पर क्या कहा?

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