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महाकुंभ में गंगा का पानी नहाने लायक था या नहीं? सरकार ने संसद में बता दिया

Maha Kumbh Prayagraj: महाकुंभ के दौरान गंगा के पानी की क्वालिटी पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. क्या त्रिवेणी संगम का पानी नहाने लायक था? केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने संसद में CPCB की एक रिपोर्ट के हवाले से इसका जवाब दिया है.

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Prayagraj: महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी. (PTI)

केंद्र सरकार ने 10 मार्च को संसद में एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि महाकुंभ के दौरान नदियों का पानी ‘नहाने लायक’ था. संसद में सरकार ने कहा कि हाल ही में संपन्न हुए महाकुंभ में प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर गंगा का पानी नहाने के लिए फिट था. त्रिवेणी संगम वो जगह जहां गंगा, यमुना और सरस्वती नदियां मिलती हैं.

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समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया और कांग्रेस सांसद के सुधाकरन के एक सवाल के जवाब में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि CPCB की रिपोर्ट के अनुसार, सभी मॉनिटरिंग लोकेशन पर pH, डिजॉल्व ऑक्सीजन (DO), बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) और फीकल कोलीफॉर्म (FC) के औसत मान नहाने के लिए तय की गई लिमिट के अंदर थे. ये सभी स्टैंडर्ड्स पानी की क्वालिटी को नापने के लिए जरूरी होते हैं.

एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले CPCB ने 17 फरवरी को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में 3 फरवरी की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया था कि महाकुंभ के दौरान पानी नहाने लायक नहीं था. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि कई जगह पर पानी का क्वालिटी स्टैंडर्ड, खासकर फीकल कोलीफॉर्म का लेवल बढ़ने की वजह से नहाने के लिए ठीक नहीं था.

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लेकिन 28 फरवरी को एक नई रिपोर्ट में CPCB ने बताया कि आंकड़ों का स्टैटिस्टिकल एनालिसिस करने के बाद पता चला कि महाकुंभ के दौरान गंगा का पानी नहाने लायक था. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पानी की क्वालिटी में अंतर आ सकता था, क्योंकि एक ही जगह से अलग-अलग दिन और समय पर पानी के नमूने लिए गए थे, जिससे आंकड़ों में बदलाव आता था.

'कमलेश सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य' के मामले में NGT ने 23 दिसंबर, 2024 को गंगा और यमुना के प्राइमरी वाटर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था. NGT ने कहा था कि महाकुंभ के दौरान नियमित अंतराल पर गंगा और यमुना की वाटर क्वालिटी की निगरानी की जानी चाहिए.

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने संसद में बताया कि इस आदेश के जवाब में CPCB ने संगम नोज (जहां गंगा और यमुना का संगम होता है) समेत श्रंगवेरपुर घाट (प्रयागराज के ऊपर) से डीहाघाट (नीचे) तक सात जगह पर हफ्ते में दो बार वाटर क्वालिटी की मॉनिटरिंग की.

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12 जनवरी से निगरानी शुरू हुई और इसमें अमृत स्नान के दिन भी शामिल थे. CPCB ने 3 फरवरी को एनजीटी को अपनी शुरुआती मॉनिटरिंग रिपोर्ट सौंपी, जिसमें 12 से 26 जनवरी 2025 के बीच इकट्ठा किया गया वाटर क्वालिटी डेटा डेटा शामिल था.

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यादव ने कहा कि रिपोर्ट में प्रयागराज में स्थापित 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और फिल्टरेशन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सात जियोसिंथेटिक डिवाटरिंग ट्यूब (जियो-ट्यूब) का मॉनिटरिंग डेटा भी शामिल था. सरकार ने यह भी कहा कि उसने 2022-23, 2023-24 और 2024-25 (9 मार्च तक) में नदी की सफाई के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) को कुल 7,421 करोड़ रुपये दिए हैं.

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