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चुनाव आयोग ने मोहम्मद शमी को भेजा नोटिस, सुनवाई के लिए बुलाया, SIR से जुड़ा है मामला

West Bengal SIR: Mohammed Shami की सुनवाई 9 से 11 जनवरी के बीच चुनाव आयोग के अधिकारियों के सामने होनी है. वहीं एक्टर से सांसद बने दीपक अधिकारी (देव) और उनके परिवार के सदस्यों को भी नोटिस भेजकर बुलाया गया है.

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शमी की सुनवाई चुनाव आयोग में 9 से 11 जनवरी के बीच होनी है. (Photo: ITG)

पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग ने भारतीय टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को समन भेजा है. आयोग ने मोहम्मद शमी और उनके भाई को SIR से जुड़ी कुछ दिक्कतों के सिलसिले में सुनवाई के लिए बुलाया है. वहीं आयोग ने एक्टर से सांसद बने दीपक अधिकारी (देव) और उनके परिवार के सदस्यों को भी नोटिस भेजकर बुलाया है.

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार शमी को सोमवार को दक्षिण कोलकाता के जादवपुर में कार्तजू नगर स्कूल से नोटिस जारी किया गया. उन्हें असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया है. हालांकि नोटिस में बताए गए समय के अनुसार शमी तय सुनवाई में शामिल नहीं हो पाए, क्योंकि वह फिलहाल विजय हजारे ट्रॉफी में हिस्सा ले रहे हैं.

कोलकाता के निवासी हैं शमी

जानकारी के मुताबिक मोहम्मद शमी कोलकाता नगर निगम (KMC) वार्ड नंबर 93 में वोटर के तौर पर रजिस्टर्ड हैं. यह राशबिहारी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. हालांकि उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अमरोहा में हुआ था, लेकिन वह कई सालों से कोलकाता के स्थायी निवासी हैं. चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि शमी और उनके भाई के एन्यूमरेशन फॉर्म में कुछ दिक्कत आई है, इसी वजह से उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया है. शमी की सुनवाई 9 से 11 जनवरी के बीच होनी है.

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TMC ने आयोग पर लगाए आरोप

द हिंदू के अनुसार TMC सांसद दीपक अधिकारी (देव) के परिवार के तीन सदस्यों को भी सुनवाई के नोटिस मिले हैं. वह पश्चिम बंगाल के घाटाल से तीन बार के सांसद हैं. वही उनका जन्मस्थान भी है. हालांकि दीपक अधिकारी की सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं है. इधर टीएमसी ने मोहम्मद शमी और देव को नोटिस देकर बुलाए जाने पर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं. टीएमसी ने बिना तैयारी के SIR लागू कराने का आरोप लगाया है. TMC के प्रवक्ता ने द हिंदू से कहा कि यह SIR लागू करने की तैयारी की कमी और बिल्कुल गलत प्रक्रिया का एक और उदाहरण है. SIR प्रक्रिया को जल्दबाजी में लागू करने से चुनाव आयोग ने एक निष्पक्ष संस्था होने की अपनी विश्वसनीयता खो दी है.

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