दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्नी को जिंदा जलाने के दोषी पति की सजा कम कर दी. ये पढ़ने के बाद हैरानी होना जायज है. लेकिन हाई कोर्ट ने यही फैसला किया है. बताया गया है कि अपराधी की पत्नी ने ही उसकी सजा कम करने के लिए कोर्ट से गुहार लगाई थी.
दहेज के लिए पति ने पत्नी को जिंदा जलाया, अब उसी ने कोर्ट से सजा माफ करवा दी
महिला ने कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उसने अपने पति को माफ कर दिया है. दोनों अब रहते भी साथ में हैं. लिहाजा पति की सजा कम कर दी जाए. पीड़िता ने कोर्ट से पति की मां और उसके भाई के खिलाफ हुई कार्रवाई को भी कम करने की अपील की थी.


महिला ने कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उसने अपने पति को माफ कर दिया है. दोनों अब रहते भी साथ में हैं. लिहाजा पति की सजा कम कर दी जाए. पीड़िता ने कोर्ट से पति की मां और उसके भाई के खिलाफ हुई कार्रवाई को भी कम करने की अपील की थी.
मामले की सुनवाई जस्टिस विमल कुमार यादव की बेंच कर रही थी. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस यादव ने 4 मई को फैसला सुनाते हुए कहा,
‘इस तरह के मामले साफ तौर पर दहेज जैसी प्रथा की बुराइयों और भौतिक चीजों के प्रति लालच की हद का सबूत हैं, जिसने इंसानों को अंधा बना दिया है.’
पीड़िता के पति को 7 साल की सजा दी गई थी. कोर्ट ने इसे घटाकर दोषी के जेल में बिताए समय के बराबर कर दिया. बाकी सजा माफ कर दी. हालांकि अदालत ने उसे अपराध से दोषमुक्त नहीं किया. उसका दोषी करार देने का फैसला बरकरार रखा गया है.
महिला के साथ ये घटना साल 2000 में हुई थी. उस वक्त को गर्भवती थी. हादसे पीड़िता बुरी तरह से झुलस गई थी. बाद में उसके पति को दहेज हिंसा और अन्य आरोपों से जुड़ी धाराओं के तहत सजा सुनाई गई. लेकिन बाद में महिला वापस ससुराल में रहने लगी. इसलिए उसने पति की सजा माफ कराने के लिए अदालत का रुख किया.
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सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि कपल के 5 बच्चे हैं. इनमें से 3 बच्चे महिला को जलाने वाली घटना के बाद पैदा हुए.
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