दिल्ली हाई कोर्ट ने बीजेपी सांसद राघव चड्ढा से कहा है कि राजनीतिक फैसलों की आलोचना पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन नहीं है. कोई पॉलिटिकल लीडर इतना सेंसिटिव कैसे हो सकता है? कोर्ट ने साफ कहा कि राघव चड्ढा ने जिस कॉन्टेंट पर आपत्ति जताई है, वो पहली नजर में सिर्फ आलोचना लगते हैं.
HC ने राघव चड्ढा को आरके लक्ष्मण की याद दिलाई, आलोचना और मानहानि का फर्क भी समझा दिया
राघव चड्ढा पर्सनैलिटी राइट्स की सिक्योरिटी के लिए दिल्ली हाईकोर्ट गए थे. कहा कि एआई तस्वीरों और वीडियो के जरिए उनकी पहचान और इमेज को खराब करने की कोशिश की जा रही है. कोर्ट ने 21 मई, गुरुवार को उनका केस सुना और साफ-साफ कहा कि ये पर्सनैलिटी राइट्स का मामला ही नहीं है.


कोर्ट ने आरके लक्ष्मण के व्यंग्य कार्टूनों की याद दिलाते हुए कहा कि राजनीतिक क्षेत्र में उनके लिए गए फैसलों की सिर्फ बुराई की जा रही है. यह एक ‘अटैक’ है या ‘क्रिटिक’, इसे आपको समझना होगा. कोर्ट ने माना कि इन कॉन्टेंट्स के लिए मानहानि का केस दाखिल किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए चड्ढा को अपने एप्लीकेशन में बदलाव करना होगा.
राघव चड्ढा की मांग क्या है?राघव चड्ढा ने बुधवार, 20 मई को पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में केस दाखिल किया था. उन्होंने AI से बने नकली वीडियो, फर्जी भाषण और फेक तस्वीरों पर रोक लगाने की मांग की थी. उनके वकील राजीव नायर ने कोर्ट को बताया कि आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आने के बाद राघव चड्ढा पर आपत्तिजनक हमले किए गए, जो आलोचना नहीं कहे जा सकते. ऐसी तस्वीरें लगाई गईं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राघव चड्ढा पर पैसे लुटाते दिख रहे हैं. कुछ तस्वीरों में राघव चड्ढा साड़ी पहने दिख रहे हैं.
ये सब सुनने के बाद हाई कोर्ट ने राजीव नायर से पूछा कि क्या ये सब पर्सनैलिटी राइट्स के उल्लंघन के दायरे में आते हैं? दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल बेंच ने कहा कि राघव चड्ढा ने जिस कॉन्टेंट को फ्लैग किया था, उसमें पहली नजर में ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ का कोई वायलेशन नहीं दिखा. उन्होंने कहा,
मेरे मन में पहली छाप ये है कि इस केस में कोई पर्सनैलिटी राइट शामिल नहीं है. पॉलिटिकल एरिया में आपके लिए गए एक फैसले की बुराई की जा रही है. बेशक आज़ादी के बाद से ही हम आरके लक्ष्मण के कार्टून देखकर बड़े हुए हैं, जहां कई राजनीतिक फैसलों की बुराई की जाती है. शायद उस समय सोशल मीडिया उस हद तक नहीं गया था. अब यह थोड़ा ज्यादा आगे बढ़ गया है.
जस्टिस प्रसाद ने चड्ढा के वकील सीनियर एडवोकेट राजीव नायर से पूछा कि क्या कोई पॉलिटिकल लीडर इतना सेंसिटिव हो सकता है? यहां सिर्फ राजनीतिक फैसले की आलोचना की गई है. यह किसी व्यक्ति की राजनीतिक पसंद पर टिप्पणी है.
राघव चड्ढा के वकील ने कहा कि फिलहाल वो सिर्फ कथित मानहानि वाले सोशल मीडिया पोस्ट्स के खिलाफ अंतरिम राहत चाहते हैं. इस पर कोर्ट ने कहा कि ये मानहानि का केस नहीं है. यह पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर दर्ज मुकदमा है. अगर मानहानि का केस करना चाहते हैं तो केस में बदलाव के लिए एक एप्लीकेशन देना होगा. बेंच ने ये भी कहा कि वो इसकी शिकायत दर्ज कर देंगे, लेकिन किसी भी राहत के लिए उन्हें दूसरा पक्ष सुनना होगा.
नायर ने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट्स में यह दिखाया गया कि राघव चड्ढा ने पैसों के लिए सौदा किया है. इसे आलोचना नहीं कहा जा सकता. इस पर कोर्ट ने कहा कि आलोचना और मानहानि के बीच फर्क बहुत बारीक होता है. हो सकता है कि इस मामले में तुरंत रोक लगाने वाले आदेश देने की जरूरत न हो. ये बहस का विषय हो सकता है. इसलिए मैं एक एमिकस क्यूरी (स्वतंत्र वकील) नियुक्त कर सकता हूं.
आखिर में कोर्ट ने राघव चड्ढा को अंतरिम राहत देने पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
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