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दिल्ली ही नहीं, पूरे देश की पीजी बिल्डिंग्स की जांच होगी, SC पहुंचा हादसे का केस

Delhi building collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पेइंग गेस्ट (PG) की बिल्डिंग ढहने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है. कोर्ट में पहले से ही दिल्ली-एनसीआर में गैरकानूनी कंस्ट्रक्शन और अनसेफ बिल्डिंग्स को लेकर एक मामला चल रहा है.

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सुप्रीम कोर्ट में सत्य निकेतन में बिल्डिंग ढहने का मामला पहुंच चुका है. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पीजी बिल्डिंग ध्वस्त होने के बाद सात लोगों की मृत्यु से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है, जिसमें अवैध और असुरक्षित निर्माण की जांच की मांग की गई है।
  • सत्य निकेतन हादसे के पीछे गैरकानूनी निर्माण, असुरक्षित बिल्डिंग संरचना और अन्य अवैध निर्माण गतिविधियां हैं, जिनके कारण पीजी की सुरक्षा में कमी आई थी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने और दिल्ली हाई कोर्ट से संबंधित जनहित याचिका को अपने पास ट्रांसफर करने पर विचार किया है।

दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पेइंग गेस्ट (PG) की बिल्डिंग ढहने से 7 लोगों की मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है. ये पूरा माजरा अनसेफ बिल्डिंग और अवैध निर्माण से जुड़ा है. कोर्ट की ओर से नियुक्त एमिकस क्यूरी और सीनियर एडवोकेट अजीत कुमार सिन्हा ने सत्य निकेतन हादसे का मुद्दा उठाया था. सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही दिल्ली-एनसीआर में गैरकानूनी कंस्ट्रक्शन और असुरक्षित बिल्डिंग को लेकर एक मामला चल रहा है.  

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इस याचिका में मांग की गई कि दिल्ली के सभी PG, प्राइवेट हॉस्टल्स और छात्रों के रहने की जगहों की जांच और सेफ्टी ऑडिट कराया जाए. यानी सिर्फ ये न देखा जाए कि कागजों पर इमारत की अनुमति है या नहीं. बल्कि मौके पर जाकर यह भी देखा जाए कि इमारत असल में कितने मंजिल की है. क्या उसमें बाद में कोई अवैध निर्माण हुआ? बेसमेंट में बदलाव किए गए या नहीं? बिल्डिंग का ढांचा सेफ है या नहीं और फायर सेफ्टी के नियम पूरे किए गए हैं या नहीं.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मंगलवार, 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कुछ जरुरी बातें कहीं. पॉइंट वाइज उन्हें जान लेते है.

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– सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो इस पूरे बिल्डिंग सेफ्टी के मुद्दे को सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसे पूरे देश यानी पैन-इंडिया लेवल पर देख सकता है. 
– कोर्ट ने ये भी कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही सत्य निकेतन वाली जनहित याचिका (पीआईएल) को सुप्रीम कोर्ट अपने पास ट्रांसफर करने पर विचार कर रहा है.  
– इसका मतलब है कि एक ही मामले पर दो अलग-अलग अदालतों में कार्रवाई करने के बजाय सुप्रीम कोर्ट खुद मामले को आगे देख सकता है.

क्या है एमिकस क्यूरी?

इस मामले में एमिकस क्यूरी की भूमिका समझनी जरुरी है. एमिकस क्यूरी का मतलब ‘कोर्ट का मददगार’ या ‘अदालत का मित्र’ होता है. आसान भाषा में जब किसी मामले में कोर्ट को किसी खास विषय पर अतिरिक्त जानकारी, एक्सपर्ट की राय या मामले को समझने में मदद चाहिए तो कोर्ट किसी व्यक्ति या संस्था को एमिकस क्यूरी की भूमिका दे सकती है. ध्यान रखने वाली बात यह है कि एमिकस क्यूरी खुद इस केस का पक्षकार नहीं होता. उसका काम किसी एक पक्ष का समर्थन करना नहीं, बल्कि कोर्ट को सही फैसला लेने में मदद करना होता है.

कौन-सा मामला पहुंचा था कोर्ट?

सुप्रीम कोर्ट ने 9 जुलाई वाले अपने आर्डर में दिल्ली-एनसीआर में असुरक्षित और बिना अनुमति वाली इमारतों को लेकर चिंता जताई थी. कोर्ट ने साकेत, मालवीय नगर और लाजपत नगर में इमारतों का जमीनी सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया था. इस जांच में आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर, एमसीडी अधिकारी और एमिकस क्यूरी को शामिल किया गया था.

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कोर्ट ने ये भी वार्निंग दी थी कि अगर अधिकारी इमारत से जुड़े नियमों के उल्लंघन को देखकर भी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.

बता दें कि सत्य निकेतन का मामला दिल्ली हाई कोर्ट में भी जा चुका है. वहां कोर्ट ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और दिल्ली यूनिवर्सिटी के एडमिनिस्ट्रेशन पर इलीगल कंस्ट्रक्शन, स्टूडेंट सेफ्टी पर सवाल पूछा था. अब देखना है कि इस मैटर की आगे की सुनवाई हाई कोर्ट करता है या सुप्रीम कोर्ट.  

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