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बिल्डर ने 60 लाख के बाद 90 लाख लेकर फ्लैट दूसरे को बेंच दिया, कोर्ट ने फैसले से जमीन हिला दी

पूरा पेमेंट मिलने के बावजूद, डेवलपर ने कभी भी बिक्री के लिए रजिस्टर्ड एग्रीमेंट नहीं किया, कंस्ट्रक्शन पूरा नहीं किया और आखिर में वही फ़्लैट किसी दूसरे खरीदार को बेच भी दिया. इसके बाद डेवलपर ने कुल 1.25 करोड़ रुपये के चेक जारी किए जिसमें 1.15 करोड़ रुपये पेमेंट की वापसी के लिए और 10 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवज़े के तौर पर थे. लेकिन खाते में पर्याप्त पैसे न होने के कारण सभी चेक बाउंस हो गए.

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बिल्डर के दिए चेक भी बाउंस हो गए

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  • रायगढ़ के एक दंपत्ति ने प्रॉपर्टी बिल्डर के खिलाफ 13 साल की कानूनी लड़ाई के बाद कंज्यूमर कमीशन से 1.05 करोड़ रुपये ब्याज समेत वापस लेने का आदेश जीत लिया है।
  • दंपत्ति ने 2013 में मुंबई के डोंगरी में फ्लैट बुक किया था, लेकिन प्रोजेक्ट बंद हो गया और बिल्डर ने बिना रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के फ्लैट किसी और को बेच दिया था।
  • कंज्यूमर कमीशन ने बिल्डर को बकाया राशि पर 10 फीसदी ब्याज के साथ कुल 1.05 करोड़ रुपये वापस करने, 50 हजार रुपये मानसिक कष्ट व 25 हजार रुपये कानूनी खर्च का भुगतान करने का आदेश दिया है।

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के एक दंपत्ति ने प्रॉपर्टी बिल्डर से एक लंबी कानूनी लड़ाई जीत ली है. कंज्यूमर कमीशन ने एक डेवलपर को ब्याज सहित 1.05 करोड़ रुपये वापस करने का आदेश दिया है. इतना पढ़कर आपको लगेगा कि इसमें क्या नया है. प्रॉपर्टी बिल्डर्स और उनके कभी पूरे नहीं होने वाले लुभावने वादे कोई नई बात नहीं. मगर इस केस की नीव में सिर्फ वादा खिलाफी नहीं है, बल्कि ठगी की कई दीवारें भी हैं. दंपत्ति की 13 साल की कानूनी लड़ाई भी है.

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60-90 का खेल

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट कें मुताबिक कुवैत पेट्रोलियम इंटरनेशनल में काम करने वाले मोहम्मद जलील हार्नेकर और उनकी पत्नी असगर शबनम 60 लाख रुपये देकर साल 2013 में मुंबई के डोंगरी इलाके में 660 स्क्वेर फीट का फ्लैट बुक करते हैं. कुछ सालों के बाद प्रोजेक्ट बंद हो जाता है तो बिल्डर उनको अपने दूसरे प्रोजेक्ट "Bay View" जो मजगाँव में बन रहा था, उसमें शिफ्ट कर देता है. बिल्डर इस फ्लैट के लिए 90 लाख रुपये की रकम मांगता है और साथ ही पुराने 60 लाख को एडजस्ट करने की हामी भी भरता है. दंपत्ति साल 2018 में बाकी का 30 लाख रुपये भी चुका देता है.

वादों का झुनझुना

पूरा पेमेंट मिलने के बावजूद, डेवलपर ने कभी भी बिक्री के लिए रजिस्टर्ड एग्रीमेंट नहीं किया, कंस्ट्रक्शन पूरा नहीं किया और आखिर में वही फ़्लैट किसी दूसरे खरीदार को बेच भी दिया. इसके बाद डेवलपर ने कुल 1.25 करोड़ रुपये के चेक जारी किए जिसमें 1.15 करोड़ रुपये पेमेंट की वापसी के लिए और 10 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवज़े के तौर पर थे. लेकिन खाते में पर्याप्त पैसे न होने के कारण सभी चेक बाउंस हो गए.

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29 जून 2021 के एक नोटराइज़्ड 'मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग' (MOU) में बिल्डर ने औपचारिक रूप से कुल 1.25 करोड़ रुपये के कर्ज़ को स्वीकार तो किया मगर दिया कुछ नहीं. 2022 में Byculla Police Station में रिपोर्ट दर्ज हुई जिसक बाद 2023 में पुलिस की कार्रवाई के दौरान 20 लाख रुपये का आंशिक भुगतान भी किया गया मगर बकाया 1.05 करोड़ रुपये का कोई हिसाब नहीं किया.

दस साल तक परेशान रहने के बाद दंपत्ति ने साल 2023 में कंज्यूमर कमीशन में केस किया. कमीशन ने बिल्डर को 1.05 करोड़ रुपये वापस करने और साथ में MOU के दिन से बकाया रकम पर 10 फीसदी ब्याज देने का आदेश दिया है. मानसिक परेशानी के लिए 50 हजार रुपये और कानूनी खर्च के लिए 25 हजार रुपये देने का आदेश दिया है.

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