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'धर्म में आदिवासी लिखो', कांग्रेस नेता के बयान को बीजेपी ने 'अपराध' बताया, एक्शन की मांग

Umang Singhar census column Adivasi: मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बयान ने सियासी विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने एक कार्यक्रम में आदिवासी समाज के लोगों से जनगणना फॉर्म के लिए एक अपील की. इस अपील पर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई है.

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नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के जनगणना फॉर्म पर दिए बयान से विवाद खड़ा हो गया. (फोटो-इंडिया टुडे)

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के एक बयान ने सियासी विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने एक कार्यक्रम में आदिवासी समाज के लोगों से अपील करते हुए कहा कि जनगणना फॉर्म में अपने नाम के आगे 'आदिवासी' लिखें ताकि उन्हें पहचान मिल सके. उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई है. इंडिया टुडे से जुड़े रवीश पाल सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, अमरकंटक में होली के मौके पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इसमें उमंग सिंघार ने आदिवासियों को संबोधित किया. 

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सिंघार ने कहा कि देश भर में जनगणना की प्रक्रिया चल रही है. इसमें 7वें कॉलम में ‘धर्म’ भरना होता है. इस कॉलम में आदिवासियों को ‘प्रकृति धर्म आदिवासी’ भरना है. सिंघार ने आगे कहा,

"अगर ऐसा नहीं किया तो आदिवासियों को किसी अन्य धर्म में दर्ज कर दिया जाएगा. इस वजह से आरक्षण, अधिकार, पैसा-कानून, वन अधिकार और जमीन के पट्टे (जमीन के सरकारी कागज) प्रभावित हो सकते हैं. अब समय आ गया है कि आदिवासी समाज के लोग एकजुट हों. ऐसा नहीं किया तो पहचान कैसे बचेगी? आदिकाल से वास कर रहे आदिवासियों की पहचान कैसे बचेगी?"

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सिंघार ने आगे लोगों से अपील करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के आदिवासी समाज अपने अलग धर्म कोड की मांग के लिए अधिक से अधिक आवेदन भेजें. कम से कम 50 लाख फॉर्म मध्य प्रदेश से भरकर इस बार राष्ट्रपति के पास जाने चाहिए. ताकि आदिवासियों की सांस्कृतिक पहचान और परंपरा को उचित मान्यता मिल सके. उन्होंने आगे लोगों को आग्रह करते हुए ये भी कहा कि अगर आज वो चुप रह गए तो उनकी आवाज को सुनने वाला कोई नहीं होगा.

उमंग सिंघार के इस बयान पर मध्य प्रदेश सरकार में बीजेपी के मंत्री विश्वास सारंग ने टिप्पणी करते हुए उन पर कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि जनगणना एक संवैधानिक प्रक्रिया है. इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी या हस्तक्षेप करने की कोशिश सीधे तौर पर अपराध की श्रेणी में आती है. इस तरह के बयान देकर सरकारी प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश की जा रही है. भोले-भाले आदिवासियों को भड़काने की कोशिश की जा रही है. यह गैरकानूनी भी है. 

'आदिवासी, हिंदू नहीं'

साल 2025 में उमंग सिंघार ने आदिवासी लोगों से जुड़ा एक और बयान दिया था, जिसके बाद उनकी काफी आलोचना हुई थी. उन्होंने छिंदवाड़ा में आदिवासी विकास परिषद के एक इवेंट में कहा, ‘गर्व से कहता हूं कि हम आदिवासी हैं, हिंदू नहीं. मैं यह कई सालों से कह रहा हूं. यह शबरी ही थीं, जिन्होंने भगवान राम को बचा हुआ खाना खिलाया था. वह भी एक आदिवासी थीं.’

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विवाद बढ़ने के बाद उन्होने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा था कि उनका मकसद किसी भी धर्म को ठेस पहुंचाना नहीं था लेकिन उनके समुदाय, परंपराओं, संस्कृति और विरासत को पहचान मिलनी चाहिए.

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