उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ मेले का भव्य आगाज़ हो चुका है. 13 जनवरी को पहले दिन ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी. लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई. महाकुंभ 26 फरवरी तक चलेगा. इस बार के कुंभ को बेहद खास बताया गया है. कहा जा रहा है कि इस बार 144 साल बाद ग्रहों का दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है. सूर्य, चंद्रमा, शनि और बृहस्पति जैसे ग्रहों की शुभ स्थिति बन रही है. ऐसा संयोग समुद्र मंथन के दौरान भी बना था. पवित्र त्रिवेणी में इस ‘शुभ’ संयोग का साक्षी बनने की चाह सभी में है. अगर परिवार के साथ महाकुंभ आना चाहते हैं तो यहां आपके लिए पूरी गाइड मौजूद है.
महाकुंभ 2025: प्रयागराज कैसे जाएं, कहां रुकें, क्या खाएं, कब नहाएं, पूरी गाइड यहां है
महाकुंभ में परिवार के साथ जाने का बना रहे हैं प्लान तो जान लें सारी बातें. किन दिनों भीड़ मिल सकती है कम, ठहरने के लिए होटल और टेंट सिटी की कहां से करा सकेंगे बुकिंग, प्रयागराज में आसपास किन जगहों पर घुमने का बना सकते हैं प्लान, कहां मिलेंगे स्वादिष्ट व्यंजन, एक-एक बात यहां है.


कुंभ के लिए खास ट्रेनें
बीते दिनों रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया था कि कुंभ के दौरान देशभर से 10,000 रेगुलर ट्रेनें, 3,134 स्पेशल ट्रेनें और 1,869 छोटी दूरी की ट्रेनें चलाई जा रही हैं. इसके अलावा, तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए 706 लंबी दूरी की ट्रेनें और 559 रिंग ट्रेनें भी चलाई जाएंगी. प्रयागराज में मौजूद इन स्टेशनों को याद कर लें. प्रयागराज आने और जाने के लिए इन स्टेशनों तक आने वाली ट्रेनों को चुनना सुविधाजनक रहेगा.
- प्रयागराज जंक्शनः संगम से दूरी 10 किमी.
- नैनीः संगम से दूरी 12.4 किमी.
- प्रयागराज छिवकीः संगम से दूरी 15.5 किमी.
- सूबेदारगंजः संगम से दूरी 15.4 किमी.
- प्रयागराज रामबागः संगम से दूरी 7.8 किमी.
भीड़ से बचने के लिए इन दिनों लगाएं डुबकी
महाकुंभ में कुछ खास तिथियां होती हैं जब पवित्र संगम में स्नान या डुबकी का विशेष महत्व होता है. ये दिन धार्मिक रूप से तय होते हैं. इन तिथियों, जैसे मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी पर लाखों लोग एक साथ स्नान करते हैं. ऐसे में बेशुमार भीड़ होती है. कुंभ जाना चाहते हैं और भीड़ से भी बचना है तो ऐसी तारीखें चुनें जब प्रमुख स्नान न हों. अगर आप परिवार के साथ जा रहे हैं और बुजुर्ग या छोटे बच्चे भी साथ में हैं तो इन प्रमुख तारीखों पर संगम जाने से बचें. इन तारीखों से पहले या बाद में भीड़ कम हो सकती है. इसके अलावा, संगम में डुबकी के लिए सुबह जल्दी या रात को जा सकते हैं. इस दौरान लोगों की संख्या कम होती है. इसके अलावा, कुंभ के अंतिम दिनों से पहले के दिनों में भीड़ कम होती है.
ठहरने की है पुख्ता व्यवस्था
उत्तर प्रदेश सरकार ने 10 लाख लोगों के मेले में रुकने की व्यवस्था की है. इनमें फ्री और पेड दोनों तरह की व्यवस्था है. लग्जरी व्यवस्था चाहते हैं तो संगम के किनारे भी रह सकते हैं. इसके आसपास 2000 कैंप की टेंट सिटी बनाई गई है. यहां रहने पर तीन हज़ार से लेकर 30 हज़ार रुपये तक देने होंगे. इसके लिए बुकिंग भी पहले करानी होगी. मेला क्षेत्र में 100 आश्रय स्थल हैं. हर आश्रय स्थल में 250 बेड हैं. 10 हजार से ज्यादा स्वयंसेवी संस्थाओं ने श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था की है. अगर ट्रेन से आते हैं और प्रयागराज जंक्शन पर उतरते हैं तो स्टेशन के आसपास 40-50 होटल हैं. वहां ठहर सकते हैं.
संगम के आसपास कुल तीन हज़ार बेड के रैन बसेरे बनाए गए हैं. पूरे जिले में कुल 200 से ज्यादा गेस्ट हाउस हैं. संगम के आसपास के इलाके में घरों को पीजी हाउस में बदला गया है. होटलों में बुकिंग ऑनलाइन प्लैटफॉर्म और IRCTC (https://www.irctctourism.com/mahakumbhgram) से की जा सकती है. वहां पहुंचकर भी उपलब्धता के हिसाब से बुकिंग कर सकते हैं. रुकने के लिए अच्छी जगहें ढूंढने के लिए https://kumbh.gov.in/en/Wheretostaylist पर जा सकते हैं.
घूमने की बढ़िया जगहें
- लेटे हनुमान मंदिरः संगम से करीब 1 किमी दूर प्रसिद्ध लेटे हुए हनुमानजी का मंदिर है.
- श्री अक्षयवट मंदिरः यह मंदिर संगम के पास बने अकबर के किले में है. यहां पवित्र बरगद का पेड़ है. ऐसी मान्यता है कि त्रेतायुग में राम-लक्ष्मण और सीता ने वनवास के वक्त इस पेड़ के नीचे आराम किया था.
- पातालपुरी मंदिरः यह देश के सबसे पुराने मंदिरों में एक है. अकबर के किले में ही अक्षयवट के पास बना है.
- मनकामेश्वर मंदिरः यह मंदिर अकबर के किले के पीछे यानी यमुना नदी के किनारे है. यहां काले पत्थर के भगवान शिव, गणेश औं नंदी की मूर्तियां हैं. यहां हनुमान की भी बड़ी मूर्ति है.
- नागवासिकी मंदिरः यह मंदिर संगम से करीब 3 किमी दूर है. इसमें पारंपरिक वास्तुकला को आधुनिक सौंदर्यशास्त्र के साथ जोड़ा गया है.
- शंकर विमानमण्डपमः यह मंदिर भी संगम से महज 1 किमी दूर है. दक्षिण भारतीय शैली का यह मंदिर 4 स्तम्भों पर बना है.
खाने-पीने ये अच्छी जगहें
- देहाती रसगुल्ला: बैरहना में स्थित यह दुकान संगम से 2 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां के रसगुल्ले का स्वाद अनूठा है.
- नेतराम कचौड़ी: कटरा में 168 साल पुरानी यह दुकान प्रसिद्ध है.
- कल्लू कचौड़ी: मुट्ठीगंज में स्थित, जहां दिन भर भीड़ रहती है.
- जायसवाल डोसा: मेडिकल चौराहे पर, यहां क्वालिटी डोसा और इडली मिलते हैं.
- कॉफी हाउस: सिविल लाइंस में स्थित, जहां आप रिफ्रेशिंग कॉफी का आनंद ले सकते हैं.
टेक्नॉलजी बनाएगी यात्रा आसान
पहले के मेलों में आश्रम, मंदिर और मठ तक पहुंचने में लोगों को काफी परेशानी होती थी. लेकिन इस बार सरकार ने गूगल मैप के साथ टाईअप किया हैं. पूरे मेले के पुल, आश्रम, अखाड़ा, सड़क तक सब कुछ चीज़ों की जानकारी ऐप पर मिलेगी. इसके अलावा महाकुंभ का ऑफिशल ऐप भी है. इसे गूगल प्ले स्टोर या iOS पर ‘Maha Kumbh Mela 2025’ के नाम से सर्च कर सकते हैं. इस ऐप में कुंभ की सारी जानकारियां हैं. पूरे कुंभ मेले का मैप भी है. इसमें सभी घाटों और मंदिरों की लोकेशन के साथ शहर की मेन जगहों की भी जानकारी है.
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