इजरायल चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता पर संकट आया, तो कुछ लोगों ने इसे गाजा के लिए उम्मीद की खबर मान लिया. CJP यानी Cockroach Janta Party के को-कन्वीनर सौरव दास भी इस लिस्ट में शामिल हुए. उन्होंने नेतन्याहू की संभावित विदाई पर खुशी जताई, तो सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें घेर लिया. सौरव दास ने क्या कहा, लोगों के क्या रिएक्शन रहे, क्या सिर्फ प्रधानमंत्री का चेहरा बदलने से गाजा की किस्मत बदल जाएगी?
इजरायल की सत्ता से नेतन्याहू की विदाई, CJP के सौरव दास क्यों खुश हुए?
Israel Election Result 2026: कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास ने इजरायल चुनाव के रिजल्ट पर टिप्पणी की है. सौरव ने नेतन्याहू की विदाई पर चल रही अटकलों पर खुशी जाहिर की. हालांकि, सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें घेर लिया.

हालांकि, सौरव के इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी क्लास लगा दी. दरअसल इजरायल के चुनाव नतीजे आ गए हैं. लेकिन, अब तक नई सरकार की तस्वीर साफ नहीं हुई है. ऐसे कयास भी लगाए जा रहे हैं कि नेतन्याहू को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ सकती है.
सौरव दास ने इस खबर को X पर शेयर करते हुए लिखा कि 'जश्न मनाने का ये खास दिन है. लेकिन, गाजा और फिलिस्तीन में नेतन्याहू के हाथों मारे गए लोगों को याद करना भी ज़रूरी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि ये शुरुआत आगे बढ़ेगी और नेतन्याहू को उनके किए की सजा मिलेगी.'
सोशल मीडिया पर लोगों का रिएक्शनइस पर लोगों ने कैसे रिएक्ट किया, उस पर हम आएंगे. लेकिन पहले ब्रीफली बैकग्राउंड समझ लीजिए. इजरायल की राजनीति में बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है. सरकार बनाने की रेस में बेंजामिन नेतन्याहू के राइवल गादी आइज़ेनकोट को 67 सांसदों का समर्थन मिला है. जबकि नेतन्याहू को 46 सांसदों का. अब इजरायल की संसद यानी नेसेट का गणित समझ लेते हैं.
नेसेट में कुल 120 सांसद हैं और सरकार बनाने के लिए 61 का समर्थन चाहिए. 27 अक्टूबर के चुनाव में नेतन्याहू के गठबंधन को 53, आइज़ेनकोट के विपक्षी खेमे को 48 और अरब पार्टियों को 19 सीटें मिलीं. राष्ट्रपति आइजैक हर्ज़ोग से बातचीत के दौरान 67 सांसदों ने आइज़ेनकोट को सरकार बनाने का मौका देने की सिफारिश की. हालांकि, नेतन्याहू की विदाई अभी तय नहीं है. राष्ट्रपति 8 नवंबर को फैसला करेंगे कि किसे सरकार बनाने का न्योता दिया जाए.
सौरव दास की खुशी की वजह गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई है. 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में करीब 1,200 इजरायली मारे गए और 250 से ज्यादा लोगों को बंधक बनाया गया. इसके जवाब में इजरायल ने गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया. इस दौरान बड़े पैमाने पर फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हुई, लोग बेघर हुए और मानवीय संकट गहराया. इसे लेकर नेतन्याहू सरकार की दुनिया भर में आलोचना हुई. लेकिन क्या आइज़ेनकोट नेतन्याहू से अलग हैं? आइज़ेनकोट इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख रहे हैं और नेतन्याहू की वॉर कैबिनेट में भी शामिल थे. जून 2024 में रणनीतिक मतभेदों के चलते उन्होंने इस्तीफा दिया.
रॉयटर्स के मुताबिक, दोनों स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश के विचार का विरोध करते हैं और हमास के हथियार नहीं डालने पर सैन्य कार्रवाई जारी रखने की बात करते हैं. यानी नेतन्याहू की जगह आइज़ेनकोट आएं तो सत्ता का चेहरा बदल सकता है. लेकिन, गाजा पर इजरायल की नीति बदलेगी, इसकी गारंटी नहीं है. फिलहाल नेतन्याहू की विदाई का फैसला बाकी है. उधर सौरव दास के इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर तमाम तरह के रिएक्शन आए. कुछ लोगों ने नेतन्याहू की सत्ता पर संकट की खबर को जल्दबाजी में सेलिब्रेट करने पर सवाल उठाए, तो कुछ ने गादी आइज़ेनकोट के सैन्य रिकॉर्ड की याद दिलाई.
एक यूजर ने लिखा कि आइज़ेनकोट नेतन्याहू से भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं. उन्होंने याद दिलाया कि आइज़ेनकोट इजरायल की सेना के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ रह चुके हैं. 7 अक्टूबर 2023 के बाद शुरू हुए संघर्ष में उन्होंने अपना बेटा और दो भतीजे खोए हैं. यूज़र ने कहा कि अभी उन्हें जीत नहीं मिली है, सरकार बनाने के लिए 28 दिनों की बातचीत बाकी है. इसलिए जश्न मनाने से पहले इंतज़ार करना चाहिए.
एक दूसरे यूजर ने लिखा कि आइज़ेनकोट और नेतन्याहू की नीतियों में बहुत ज्यादा फर्क नहीं है. वहीं, एक यूजर ने तंज कसते हुए कहा कि आइज़ेनकोट तो नेतन्याहू से भी दोगुने खतरनाक हैं.
एक और यूजर ने सौरव दास को सलाह दी कि जश्न मनाने से पहले थोड़ा होमवर्क कर लेना चाहिए. उन्होंने लिखा कि आइज़ेनकोट 2015 से 2019 तक इजरायल की सेना के प्रमुख रहे. उन पर 'दहिया डॉक्ट्रिन' से जुड़े होने का आरोप है. दहिया ड्राक्ट्रिन हमले वाले इलाकों में बड़े पैमाने पर तबाही और asymmetrical माने असमानी मिलिट्री फोर्स के यूज की lobbying या पैरवी करती है.
यह भी पढ़ें: हमास पर खेल अटका... नेतन्याहू को रोकने के लिए अरब पार्टियों के आगे बस एक शर्त
इस यूजर ने ये भी याद दिलाया कि आइज़ेनकोट अक्टूबर 2023 में नेतन्याहू की वॉर कैबिनेट में शामिल हुए थे और करीब आठ महीने तक उसका हिस्सा रहे. उनके मुताबिक, आइज़ेनकोट हमास को खत्म करने के समर्थक हैं.
वीडियो: Ramayana Public Reactions: रणबीर कपूर की फिल्म देखकर लोगों ने क्या कहा?














